झुंझुनूं के इन 3 पशु प्रेमियों ने बेजुबानों का रखा है पूरा ख्याल, समाज को भी किया है जागरूक!

Jhunjhunun Doctors saves dogs: बेजुबान हमारे समाज का ही हिस्सा है, यही कारण है कि लोग उन्हें अपने किसी परिवार के सदस्य के रूप में मानते हैं। आज यानी 26 अगस्त को विश्व में डॉग डे (International Dog Day) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हमें श्वान (Dog) की दशा और ख्याल को लेकर जागरूक करता है। इन पर किसी प्रकार का अत्याचार न हो तथा लोग श्वान से प्यार करें इसलिए इस दिवस को मनाया जाता है। आइए, इस मौके पर आज हम आपको राजस्थान (Rajasthan) के उन तीन व्यक्तियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने इन बेजुबानों के मर्म को समझा, आज ये तीनों आवारा श्वानों का इलाज करते हैं, सर्दी हो या बरसात, हर मौसम में वे श्वानों के भोजन, दवा और पानी का ख्याल रखते हैं।

झुंझुनूं के भडौंदा के रहने वाली सुमन चौधरी (Suman Choudhary) पिछले 5 सालों से आवारा श्वानों का का ख्याल रख रख रही हैं। बीएड (B.Ed.) कर चुकीं सुमन ने इसके लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण भी लिया हुआ है। वह बताती हैं कि सर्दियों में रात को जब उन्होंने एक श्वान को तड़पता देखा तो वह उसे घर ले आई तथा उसका उपचार किया। इसके बाद जहां भी उन्हें बीमार श्वान दिखता वह उनका अपने खर्च पर इलाज करातीं। गंभीर रूप से घायल श्वानों को भी वह उचित उपचार दिलाती हैं। सुमन, हर दिन श्वानों को खाना खिलाती हैं तथा दूध पिलाती हैं। इस नेक कार्य में उनके ससुराल वाले भी साथ देते हैं।

खेतड़ीनगर के केसीसी (KCC) टाउनशिप की निवासी प्रिया महरिया (Priya Mahariya) पिछले सात सालों से बीमार श्वानों का प्राथमिक इलाज कर रही हैं, श्वान के गंभीर होने की स्थिति में वह अस्पताल में ले जाकर अपने खर्च पर उक्त पशु का इलाज कराती हैं। यदि उन्हें कोई व्यक्ति श्वानों का मारता दिखाई देता है, तब उस स्थिति में वह उसे टोकती हैं और बेजुबानों को लेकर जागरूक करती हैं, यही कारण है कि अन्य व्यक्ति और बच्चे अब पशुओं को मारने की बजाय उनसे प्रेम करने लगे हैं, आसपास के लोग प्रिया को डॉग वाली दीदी कहकर बुलाते हैं।

वहीं जिले के नवलगढ़ (Nawalgarh) के अंतर्गत एक गांव है निवाई- यहा भी एक पशु प्रेमी रहते हैं। अनिल खींचड़ (Anil Khinchad) पेशे से पशु चिकित्सक हैं, और श्वानों से इतना प्यार कि यदि बीस किलोमीटर पर भी उन्हें किसी श्वान के लिए जाना पड़ जाए तो वह पीछे नहीं हटते। बीकानेर से बैचरल ऑफ वेटरनरी की डिग्री हासिल कर चुके डॉ अनिल बताते हैं कि वह अभी न्यू हाउसिंह बोर्ड झुंझुनूं में रहते हैं और साल 2014 से श्वानों का फ्री इलाज कर रहे हैं, इस काम में उनकी पूरी टीम जुटी है, वह निशुल्क श्वानों (Jhunjhunun Doctors saves dogs) को कृत्रिम पैर भी लगाते हैं। इसके साथ ही अनिल लोगों को पशुओं के प्रति जागरूक भी करते हैं। वह जिला कलेक्टर से सम्मानित भी हो चुके हैं।

यह भी पढ़ें- जयपुर: डॉ तपेश बेजुबानों का इलाज कर देतें हैं नया जीवन- अब तक 200 जानवरों की बदल चुके जिदंगी

Add Comment

   
    >
राजस्थान की बेटी डॉ दिव्यानी कटारा किसी लेडी सिंघम से कम नहीं राजस्थान की शकीरा “गोरी नागोरी” की अदाएं कर देगी आपको घायल दिल्ली की इस मॉडल ने अपने हुस्न से मचाया तहलका, हमेशा रहती चर्चा में यूक्रेन की हॉट खूबसूरत महिला ने जं’ग के लिए उठाया ह’थियार महाशिवरात्रि स्पेशल : जानें भोलेनाथ को प्रसन्न करने की विधि