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झुंझुनू

70 की उम्र में कुछ हटके करने का जज्बा, शेखावाटी में किन्नू से सालाना 10 लाख कमा रहे चौधरी सुमेर राव

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राजस्थान की धरती पर आपको ऐसी कई जिंदादिल कहानियां मिल जाएंगी जिनके कुछ करने की धुन के आगे उम्र का पड़ाव कभी बाधा नहीं बना। पूरी जिंदगी रोजी रोटी में खपा देने के बाद आराम के दिनों में भी आपको यहां लीक से हटकर काम करने वाले भतेरे मिल जाएंगे।

कुछ ऐसे ही चौधरी सुमेर राव हैं जिन्होंने 70 बसंत बिताने के बाद कुछ हटके करने का सोचा और किन्नू की बागवानी शुरू की और आज सालाना 10 लाख की कमाई के साथ उनका किन्नू अमेरिका तक पहुंच गया है।

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के सिंघाना से करीब 15 किलोमीटर दूर घरड़ाना कलां गांव में 1950 में पैदा हुए चौधरी सुमेर राव ने 2014 में एक दोस्त की मदद से 100 पौधे खरीदे और अपनी दो बीघा जमीन में लगाए। आज उनके बगीचे में 500 पौधे हैं जिनमें 200 किन्नू, 150 मौसमी व अन्य पौधे हैं।

खाद और दवा करते हैं खुद ही तैयार

शेखावाटी की वातावरणीय परिस्थितियों में किन्नू की बागवानी करना आसान काम नहीं था, शुरूआत के कुछ ही महीनों बाद राव के पौधे मुरझा कर नष्ट होने लगे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और नीम के पत्ते व गोबर से खुद एक जैविद खाद तैयार कर पौधों में दी और इस खाद ने पौधों में जान डाल दी जिसके बाद से वह सालों से खुद ही खाद बना रहे हैं।

अब दूसरे किसानों को सिखाते हैं किन्नू की बागवानी

किन्नू (किन्नू एक तरह से देसी संतरे का विदेशी रूप है) की बागवानी में महारथ हासिल करने वाले राव अब दूसरे किसानों की मदद करते हैं। वह उन्हें बगीचा लगाने में मदद करते हैं और खुद तैयार की हुई खाद और दवा देते हैं।

वहीं राव किसानों को पौधे लगाने के बाद उसकी मार्केटिंग करने में भी मदद करते हैं जिसके लिए वह फीस भी लेते हैं।

झुंझुनूं में करीब 200 किसान लगा चुके हैं किन्नू के बगीचे

जैसा कि हम जानते हैं कि राजस्थान में किन्नू की बागवानी के लिए श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ जाने जाते हैं लेकिन राव ने शेखावाटी के कई जिलों में किन्नू की बंपर पैदावार कर हर किसी को हैरान किया है। राव के मुताबिक वह सिंघाना, मंडावा, सूरजगढ़ में करीब 200 से अधिक किसानों के यहां किन्नू का बगीचा लगा चुके हैं।

किन्नू से लाखों की कमाई

एक समय में 2 बीघा से शुरू हुआ राव का बगीचा आज 10 बीघा में पहुंच चुका है। राव किन्नू को खुदरा और थोक दोनों में बेचते हैं। राव के किन्नू दिल्ली-जयपुर के अलावा अमेरिका तक जाते हैं।

राव के अनुसार किन्नू की बिक्री से उन्हें सालभर में 7 लाख रुपए और किसानों को ट्रेनिंग देने संबंधी कामों से उन्हें कुल मिलाकर 10 लाख की आमदनी हो रही है।  रुपए से अधिक की आय हो रही है।

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