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झुंझुनू

12वी क्लास का लड़का बना चैंपियन, U-19 कबड्डी चैंपियनशिप में चयनित होकर किया झुंझुनू का नाम रोशन

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बिना पंख के उड़ ना है तो,
लक्ष्य बनाओ की चढना है।
पथ में कांटे लाख बिछे हो,
बस आगे से आगे बढ़ना है।

दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी शख्सियत से रूबरू करवा रहा हूं जिसने बिल्कुल सामान्य किसान परिवार में जन्म लेकर, खेल के मैदान में झुंझुनू (Jhunjhunu) जिले का नाम रोशन किया है। कुलोद खुर्द (Kulod Khurd Village) निवासी देवेंद्र सिंह (Devendra Singh) के पिताजी का नाम विनोद सिंह तथा माता जी का नाम सुमन कंवर है।

परिचय।
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आदर्श से बात करते हुए देवेंद्र सिंह ने बताया कि मुझे कबड्डी खेलते हुए तीन वर्ष हो चुके हैं। मैं 12वीं क्लास में पढ़ता हूं। मुझे स्कूल टाइम से कबड्डी खेलने का बहुत शौक था। अब तीन साल से मैं स्टेट तथा इंटरस्टेट खेल रहा हूं। सबसे पहले मैंने इंडो नेपाल चैंपियनशिप में तेलंगाना को रिप्रेजेंट किया था। उसके बाद में अब इंडिया टीम में मेरा अगले वर्ष मास्को में होने वाली अंडर-19 टीम के लिए सिलेक्शन हुआ है।

उसने बताया कि मैं जब स्कूल में था, तब से ही कबड्डी खेल रहा हूं, मेरे मम्मी पापा ने मुझे मोटिवेट किया है। मैने पहला टूर्नामेंट तेलंगाना में निजामाबाद में खेला था। उसके बाद में मेरा सिलेक्शन मथुरा के लिए हो गया। मथुरा के बाद में मैं इंडो नेपाल चैंपियनशिप हेतु नेपाल गया। अब अप्रैल 2022 के अंदर मास्को में अंडर-19 चैंपियनशिप (under 19 kabbadi championship) खेली जाएगी। जिसमें मेरा चयन हुआ है। सभी खिलाड़ी अलग-अलग स्टेट के हैं। मैं एक खिलाड़ी को जानता हूं, वह कंचन कुमार है। जो मेरा क्लासमेट भी रहा है। और वह इंडिया टीम को लीड भी करेगा।

उसने बताया कि मेरा आगे का सपना प्रो कबड्डी में जाने का है। मेरा पसंदीदा खिलाड़ी विकास कंडोला है। स्कूल में आपको किस प्रकार देखते हैं के जवाब में वह कहते हैं कि मुझे बहुत प्रोत्साहन मेरी स्कूल की तरफ से मिलता है लेकिन फीस माफ नहीं है।

शुरुआत में जब मैं स्कूल में बच्चों के साथ में कबड्डी खेलता था, तो मेरा खेलने का तरीका सभी को पसंद आया। और तभी से मैं स्कूल की कबड्डी टीम (Kabbadi Team) में चुन लिया गया। देवेंद्र ने बताया कि मैं हरियाणा के जींद में खेला था। वहां पर सब बच्चों के लिए बहुत ही खेलने की फैसिलिटी है। हर स्कूल के अंदर उसी प्रकार की फैसिलिटी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गांव के बच्चों को भी खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। यहां पर अंतर जिला कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया जावे।

उन्होंने कहा कि मैं अगले वर्ष मास्को में आयोजित होने वाली प्रो अंडर-19 कबड्डी प्रतियोगिता के अंदर भाग ले रहा हूं। उसमें हमारा यही प्रयास होगा कि हम वह ट्रॉफी जीत के लाए, और देश का, जिले का और गांव का नाम रोशन करे। सभी घर वालों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि हम बहुत खुश हैं। दादा, दादी, नाना, नानी, पापा, ताऊ सब को बहुत खुशी हो रही है। कि हमारा लाडला बेटा हमारे देश का, हमारे जिले का, हमारे गांव का नाम रोशन करें।

जय झलको ____ जय झुंझुनू।

अपने विचार।
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करो भलाई खुशियां मिलती,
दूसरे को नहीं, अपने आप को।
आगे बढ़ने का शॉर्टकट है ये,
पूछ कर देखो आत्मा की आवाज को

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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