27 किलो वजन कम कर आर्मी में लेफ्टिनेंट बनी झुंझुनू की धाकड़ छोरी, ईशु की फौज की दिलचस्प कहानी

वीरों की कहानियां सुन सुन,
जोश जगाती हर रोज मैं।
तपा तपा कर देह को,
लेफ्टिनेंट बनी फौज में।

दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी शख्सियत से रूबरू करवा रहा हूं। जिसने अपने शरीर को तपा तपा कर सेना में जाने की अपनी जिद को, अपने से ही जीता।वीर और वीरांगनाओं के इस झुंझुनू (Jhunjhunu) जिले के शेखावाटी (Shekhawati) में हर गांव में फौजी (Foji) जरूर मिल जाएगा।

इसी कड़ी में एक और कड़ी जोड़ते हुए झुंझुनू जिलेके नावता गांव (Navata Village) की ईशु (Ishu) ने फौज में मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (Military Nursing Service) में सत्रहवीं रैंक हासिल कर लेफ्टिनेंट (Lieutenant) का पद प्राप्त किया है। 18 वर्षीय ईशु गांव में पहली बड़े ओहदे पर पहुंचने वाली महिला कैंडिडेट है। इनको 10 जनवरी को लखनऊ में अपनी ट्रेनिंग ज्वाइन करनी है।

फौज में जाने के प्रेरणा किससे मिली।
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ईशु की फौज में जाने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। इनके गांव से 20 से 25 जवान पहले से ही फौज में सेवा दे रहे है। शोर्य, वीर और वीरांगनाओं की कहानियां सुन सुनकर अपने में दृढ़ संकल्प जगाने वाली ईशु ने फौज में जाने की ठान ली। बचपन से ही शहीदों की प्रतिमाएं और वीर गाथाएं सुनने के बाद में ईशु ने फौज में जाने की अपनी बात को घर वालों के सामने रखा।

28 जुलाई 2021 को उसने अपना पहला एग्जाम दिया, और क्लियर किया है।28 अगस्त को इंटरव्यू हुआ और फिजिकल हुआ। लेकिन 27 किलो वजन अधिक होने की वजह से वह फिजिकल में अटक गई। तब घर वालों को भी लगता था, कि 27 किलो वजन कैसे कम हो सकता है। चयन समिति की तरफ से ईशु को 40 दिन का समय दिया गया।

डाइट में एक चपाती और जूस।
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27 किलो का वजन कम करने का टास्क मिलने पर गांव के ही सिद्ध बाबा मंदिर (Siddh Baba mandir) में उसने रोजाना 880 सीढ़ियां चढ़ना और उतरने का क्रम बना लिया। इसके अलावा दस किलोमीटर हमेशा दौड़ लगाना और डाइट पर विशेष ध्यान देकर लंच में एक चपाती के साथ जूस शुरू कर दिया। 80 दिन का एक्स्ट्रा टाइम मिलने के कारण ईशु ने 27 किलो वजन कम कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया और एग्जाम क्वालीफाई किया।

गांव में शहीदो की वीर गाथाएं सुनने पर वह बहुत मोटिवेट (Motivate) होती और उसकी इस उपलब्धि के कारण गांव वालों ने हर्षोल्लास के साथ उस का विजय जुलूस निकाला। ईशु के दादाजी प्रभाती लाल जी चाहते थे कि उनकी पोतिया डॉक्टर बने। पापा जयदेव सिंह और ताऊ सुमेरसिंह के मार्गदर्शन में ईशु ने 2020 में 12वीं की परीक्षा बायोलॉजी और मैथ्स से दी। ईशु अपने फूफा जी के पास में भी पढ़ी थी, तथा मेडिकल एंट्रेंस (Medical Entrance) का एग्जाम भी दिया था, लेकिन क्लियर नहीं हुआ था।

अपने विचार।
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जज्बा था मन में देश सेवा का,
तो पहाड़ सा वजन घटा दिया।
ऐसी लगन लगी थी मन में,
यह करके दुनिया को बता दिया।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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