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झुंझुनू

शेखावाटी के लोकप्रिय नेता मदनलाल सैनी की सादगी भरी जिंदगी की बातें,रोडवेज बसों में सफर के शौक़ीन

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होनहार बिरवान के, होत चिकने पात। सादगी और ईमानदारी ने जिनको जन जन का प्यारा बनाया। हां दोस्तों महापुरुष के कोई जाति पांति नहीं होती है वह इन सबसे ऊपर होता है। आज हम आपको शेखावाटी के ऐसे ही एक महापुरुष की जीवनी के बारे में बताएंगे जो जनसेवा, समाज सेवा एवम् संगठन सब में निपुण होते हुए जाति पांति से ऊपर रहा। उदयपुरवाटी उपखंड के सेवा भावी भाजपा नेता श्री मदन लाल जी सैनी उनमें से एक हैं।

श्री सैनी जी का जन्म 13 जुलाई 1943 को सीकर जिले के गांव पुरोहितों की ढाणी में श्री बालूराम जी के घर हुआ। उनकी माता जी का नाम मोहनी देवी था। जब सैनी जी दसवीं क्लास में पढ़ रहे थे तब उनकी शादी नवलगढ़ के पास गुमाना राम की ढाणी की श्रीमती पतासी देवी के साथ 21 मई 1961 को कर दी। उनके एक पुत्र और छ पुत्रियां हैं। मदन लाल सैनी छह भाइयों में सबसे बड़े हैं।

सैनी जी ने राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री लेने के पश्चात एलएलबी की पढ़ाई की। सन 1970 में वकालत के पेशे से जुड़े तथा आपातकाल में इस पेशे को छोड़कर भूमिगत होना पड़ा तथा जेल भी गए।

राजनैतिक जीवन :

श्री सैनी जी जनसंघ के समय से राजनीति में सक्रिय रहे हैं, मदन लाल सैनी 1952 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े, एबीवीपी के प्रदेश मंत्री का पद भी उन्होंने संभाला।
आपातकाल के दौरान सैनी जी जेल भी जा चुके हैं, सन 1990 में झुंझुनू में उदयपुरवाटी के गुढ़ा गोड़जी से विधायक चुने गए। सैनी जी बीजेपी में प्रदेश महामंत्री और अनुशासन समिति के सदस्य भी रह चुके हैं।

साल 2017 में सैनी जी राज्यसभा के सदस्य बने। 1 जून 2018 में उनको भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।

खुशियों की फसल खड़ी मेरे अंदर,
उसी के बीज मैं बांट रहा।
ईमानदारी है नाम फसल का,
उसी फसल को मैं काट रहा।

ऐसे भाव थे उनके जब वो उदयपुरवाटी से निर्वाचित हो कर विधान सभा गए थे। कर्मचारी नेता से विधायक, भाजपा अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद तक पहुंचने वाले श्री मदन लाल सैनी जी का व्यक्तित्व बहुत ही मृदु भाषी था। सादगी और ईमानदारी उनकी मुख्य पूंजी थी वह लगभग अपना सफर रोडवेज की बसों में ही करते थे।दो जोड़ी कपड़े और वो स्वयं ही धोना और सादा खाना उनकी पहचान थी।

राज्यसभा का टिकिट मिलने से पहले की बात है वो अपने खेत में खेजड़ी की कटाई कर रहे थे तो उनके हाथ में ऐसी चोट आई कि ऑपरेशन करना पड़ा। वो किसान मजदूर के मसीहा रहे हैं। मजदूर संगठनों में जिले से लेकर राष्ट्रीय लेवल तक उन्होंने हर पद पर काम किया है। भारतीय मजदूर संघ का नेतृत्व करते हुए एक बार वे अमेरिका भी गए थे।

सादा जीवन उच्च विचार,
मन में था ना कोई विकार।

निधन : श्री मदन लाल जी सैनी का 76 वर्ष की उम्र में 24 जून 2019 को दिल्ली एम्स में निधन हो गया। फेफड़ों में इन्फेक्शन के कारण कई दिन से उनका इलाज चल रहा था। वह अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ कर गए हैं। उनका इकलौता पुत्र राजस्थान हाई कोर्ट जयपुर में वकील है।

विद्या धर तेतर वाल, मोती सर।

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