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झुंझुनू

राजस्थान की इस जगह पर मिलती दुनिया की मशहूर कैंची जिसकी विदेशी में भी रहती है डिमांड

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mukundgarh famous kainachi

धार धरोहर धन बड़ा, सबसे बड़ा है नाम। नाम बड़ा है काम से, तो सबसे बड़ा है काम। Rajasthan Story : दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी वस्तु की कहानी बताने जा रहा हूं। जो हर घर में, हर वक्त पर, हर जगह काम आती है। वह वस्तु है मुकुंदगढ़ की कैंची (Mukundgarh ki Kainachi)। जिसकी विदेशों में भी बड़ी मांग रहती है।

मुकुंदगढ़ (Mukundgarh) में विश्वंभर जी (Vishambhar Ji) का वंशानुगत कैंची बनाने का धंधा है। इनकी दुकान में सात पीढ़ी से कैंची बनाने का काम किया जा रहा है।

विश्वंभर जी कहते हैं कि हमारे नाम से अलग-अलग जगह पर जो कैंची बेची जाती है। उसकी हमारी कोई गारंटी नहीं है, लेकिन यदि हमारी दुकान से कोई कैंची लेकर जाता है। और उसकी कोई शिकायत हो तो हम पांच साल से भी वापस ले लेंगे या बदले में दूसरी दे देंगे। वह कहते हैं कि धार कितनी भी बढ़िया लगा दो, यदि कच्चे लोहे के लगाओगे तो वह बिल्कुल नहीं चलेगी। यह राजस्थान की कहानी (Rajasthan Story) आपको अचम्भे में डाल देगी

कैंची की धार के पीछे की असली कहानी

जब खुशबू ने पूछा कि आप ऐसा क्या करते हो जिससे उस कैंची की धार बनी रहे। तब विश्वंभर जी ने कहा कि हम पक्का लोहा लाते हैं और उसकी सरसों के तेल में धार लगाते हैं। हम हमारे हाथ से दी हुई कैंची की पूरी गारंटी लेते हैं। हम आगे का पक्का लोहा कबानी और रेती का लेकर बठ्ठी में तपा कर उसकी कैंची बनाते हैं। इसलिए हम हमारे हाथ से दी हुई कैंची की पूरी गारंटी लेते हैं।

हत्था तांबे का या पीतल का क्यों बनाते हो इसका जवाब देते हुए वह कहते हैं कि पीतल में तांबा मिलाने से उसका हत्था मजबूत होता है और हल्का होता है। इसलिए अकेला पीतल अच्छा नहीं होता उसमें तांबा मिलाया जाता है। हम तांबा मिलाकर हत्था बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि हम नौ इंच से लेकर बारह इंच तक की कैंची बनाते हैं। और हमारी कैंची पर एक मोहर लगी होती है, इसलिए हम हमारी कैंची को पहचान लेते हैं। कीमत के बारे में पूछने पर वह कहते हैं कि जिसका हत्था भारी होगा, उसकी कीमत ज्यादा होगी। जिसका हत्था हल्का होगा उसकी कीमत कम होगी। इसलिए कीमत हत्थे के हिसाब से तय की जाती है।

वह कहते हैं कि हमारे औजार हमारे खुद के बनाए हुए हैं, और भारत में इतनी तेज धार और इतनी पक्की धार केवल हमारी दुकान पर ही लगाई जाती है। हमारी दुकान पर हम मजदूर नहीं रखते हैं, क्योंकि मजदूर उतना विश्वास का अच्छा काम नहीं करता। जितना हम खुद घरवाले करते हैं, इसलिए हम केवल घर के व्यक्ति ही दुकान पर काम करते हैं।

विदेशों में भी रहती है डिमांड

राजस्थान (Rajasthan) के बाहर भी बहुत सी जगह हमारी कैंची सप्लाई होती है। और विदेशों में भी जो व्यक्ति टेलरिंग का काम करते हैं वह अपनी जानकारी के हिसाब से हमारी कैंची ही मंगवाते हैं। एक फोटो दिखाते हुए वह कहते हैं कि यह लोग अमेरिका (America) से आए थे। और हमारी दुकान से बहुत सी कैंचियां लेकर गए थे। उनके वहां पर बूटीक का धंधा है।

अपने विचार।
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धर्म बड़ा है काम से,
काम बड़ा कर नीत।
तन मन धन से काम करो,
तब होगी सब की जीत।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

   
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