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झुंझुनू

पत्रकारिता के भीष्म पितामह पद्म विभूषण पंडित झाबरमल शर्मा की 134वी जयंती पर उनके जीवन की कहानी

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इतिहास में कुछ लोग ऐसे हुए जिनको उनके काम के लिए याद किया जाता है, उनका नाम काम के साथ सालों बाद भी सम्मान के साथ लिया जाता है।

ऐसे ही एक महापुरुष थे जो अपनी लेखनी से सीधे लोगों के दिलों में उतर गए। हम बात कर रहे हैं पत्रकारिता के बेताज बादशाह खेतड़ी उपखंड के जसरापुर निवासी पंडित झाबरमल शर्मा की जिनका नाम एक लेखक, पत्रकार, साहित्यकार, समाजसेवी और इतिहासकार के तौर पर स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है।

पिता थे संस्कृत के विद्वान

पंडित झाबरमल शर्मा का जन्म 1888 में खेतड़ी कस्बे के जसरापुर गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित रामदयालू था जो संस्कृत के विद्वान और आयुर्वेद के बड़े चिकित्सक थे।

झाबरमल ने अपने पिता के सानिध्य में संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी और बांग्ला आदि भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया। संन 1905 और 1906 में इन्होंने अपने पिताजी के गुरु गणनाथ सेन द्वारा कलकत्ता में शिक्षा प्राप्त की।

वहीं कलकत्ता में रहते हुए पंडित दुर्गाप्रसाद मिश्र के संपर्क में आए और 1905 में वहां रहकर ज्ञानोदय तथा मारवाड़ी बंधु पत्रों के संपादन का काम किया। 1909 में इन्होंने भारत साप्ताहिक पत्रिका के संपादन का काम किया।

1914 में इन्होंने कोलकता समाचार नामक अखबार का संपादन कार्य शुरू किया तथा कड़े विरोध के बावजूद सन 1925 तक कोलकात्ता समाचार का प्रकाशन जारी रखा।

राजा ने फटकार लगाई,

मारवाड़ी नहीं मैं छोडूंगा।

पंडित ने हुंकार भरी तब,

अखबार का मुख नहीं मोडूंगा।

कई किताबें और लिखे सैकड़ों निबंध

झाबरमल 1925 में वह दिल्ली आ गए और पिताजी के खराब स्वास्थ्य के चलते इन्हें गांव आना पड़ा एवं 1958 में खेतड़ी में रामकृष्ण मिशन की एक शाखा की आधारशिला रखी।

इस दौरान झाबरमल ने कई पुस्तकें लिखी जिनमें क्षेत्रीय नरेश और विवेकानंद, गुलेरी ग्रंथावली, राजस्थान और नेहरू परिवार शामिल है। इनमें राजस्थान और नेहरू परिवार किताब का विमोचन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 26 मई 1982 को प्रधानमंत्री आवास पर किया था।

इसके अलावा उन्होंने सीकर का इतिहास, खेतड़ी का इतिहास, श्री अरविंद चरित्, आदर्श नरेश, हिंदी गीता रहस्य सार, आत्म विज्ञान शिक्षा, तिलक गाथा, भारतीय गोधन आदि पुस्तकों का संपादन भी किया। इन्होंने अपने गांव में इतिहास अनुसंधान गृह स्थापित करके जनपदीय लोक साहित्य और पत्रकारिता पर निबंध लिखे। इसके कुछ समय बाद वह जयपुर आ गए और वहीं पर अपना काम जारी रखा।

पदम भूषण से हुए सम्मानित

भारत सरकार ने 1982 में झाबरमल को पदम भूषण से पुरस्कृत किया गया एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पंडित झाबरमल शर्मा को साहित्य के क्षेत्र में किए गए अपने उत्कृष्ट कार्यों के लिए एक विशेष पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।

पंडित झाबरमल शर्मा का 4 जनवरी 1983 को जयपुर में निधन हो गया। झाबरमल शर्मा की स्मृति में राजस्थान पत्रिका एवं माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा स्मृति व्याख्यान का आयोजन हर साल किया जाता है।

इसके साथ ही “पंडित झाबरमल शर्मा पत्रकारिता पुरस्कार” जयपुर के झाबरमल शर्मा संग्रहालय और पत्रकारिता अनुसंधान केंद्र द्वारा दिया जाता है।

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