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झुंझुनू

राय माता के चमत्कार से बैल बनी गाय, 400 साल पुराना मंदिर जहां चढ़ता है बाजरे का प्रसाद

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राजस्थान के कई जिलों में ऐसे मंदिर हैं जहां सालों पहले हुए चमत्कारों के किस्से आज भी स्थानीय लोग सुनाते हैं। हर साल इन मंदिरों में लाखों श्रृद्धालु आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं। झलको राजस्थान पर मंदिरों के इतिहास की कड़ी में आज हम आपको एक ऐसे मंदिर की यात्रा करवाएंगे जहां पहुंचे हर इंसान की मनोकामना पूरी होती है।

हम बात कर रहे हैं 400 साल पुराने झुंझुनूं जिले के बिसाऊ के पास गांगियासर स्थित राय माता मंदिर की जहां देश के कोने-कोने से साल भर श्रृद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

हमने राय माता मंदिर के इतिहास और महत्व के बारे में जानने के लिए पुजारी से बातचीत की जिन्होंने पौराणिक घटनाओं के साथ विस्तार से समझाया।

30 साल तपस्या वाली जगह प्रकट हुई राय माता

पुजारी के मुताबिक गांव में सालों पहले एक शिवपुरी महाराज हुआ करते थे जिनकी अपने गुरु से अनबन होने के बाद वह एक जगह तपस्या करने बैठ गए और लगभग 30 साल तक उन्होंने तपस्या की।

पुजारी आगे जोड़ते हैं कि एक बार किसी दूसरे गांव से एक चोर बैल चुरा कर भाग रहा था जिसके पीछे 100-150 गांव वाले पड़े थे। चोर बचने के लिए शिवपुरी महाराज की तपस्या वाली जगह आ गया और देखा कि बाबा की धूनी जल रही थी।

चोर ने धूनी के आगे नतमस्तक होकर कहा कि, महाराज मुझे बचा लीजिए। इसके बाद शिवपुरी महाराज ने बैल को गाय के रूप में बदल दिया और इसी घटना के बाद इस जगह से राय माता प्रकट हुई थी।

3 रूप में छोड़ा शरीर

पुजारी ने आगे बताया कि शिवपुरी महाराज ने शरीर छोड़ते समय तीन रूप बनाकर शरीर को छोड़ा था जिसमें एक मलसीसर गांव गया, दूसरा टाई गांव गया और तीसरा राय माता के मंदिर के पास ही रह गया।

टिड्डियों के दल ने फैलाई थी भूखमरी

पुजारी के मुताबिक एक बार गांव के अंदर टिड्डियों का आक्रमण हो गया था। जंगल होने की वजह से टिड्डियों ने यहां सारी फसलों को बर्बाद कर दिया। लोगों के सामने भूखमरी जैसी स्थिति पैदा हो गई थी।

ऐसे में सभी गांव वालों ने शिवपूरी महाराज का नाम लेते हुए मन्नत मांगी जिसके बाद टिड्डियां गांव से लौटने लगी और इतिहास गवाह है कि उस गांव में आज तक टिड्डियां वापस लौटकर नहीं आई है।

लोग चढ़ाते हैं बाजरा, भरा रहता है भंडार

मंदिर में आज हर एक घर से 10 किलो बाजरा भोग के स्वरूप में चढ़ाया जाता है। पुजारी ने बताया कि मंदिर का भंडार कभी खाली नहीं होता है। लोग बाजरा हर साल चढ़ाते हैं और जिन लोगों को खाने की आवश्यकता पड़ती है उनकी बाजरे के प्रसाद से मदद की जाती है।

हलवे का चढ़ता है प्रसाद

राय माता को हलवा, चना, पूरी का प्रसाद चढ़ता है। इसके अलावा कई लोग नारियल, पेड़़ा और अन्य तरीके के प्रसाद चढ़ाते हैं। पुजारी ने बताया कि माता के मंदिर में अखंड ज्योत 24 घंटे जलती रहती है। वही मंदिर में धनबाद, बिहार, कोलकाता, मुंबई से भी लाखों लोग दर्शन के लिए आते हैं।

वहीं नवरात्रों के दौरान माता के त्रिशूल पर आकर एक बार चील बैठती है तब यह माना जाता है कि माता खुद भवन में लोगों की पुकार सुनने के लिए प्रकट हो गई हैं। राय माता का मेला नवरात्रि की अष्टमी और नवमी के दिन गांगियासर गांव में ही भरता है जहां लाखों लोग दर्शन के लिए आते हैं।

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