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झुंझुनू

फौजी परिवार का बेटा श’हीद मोहसिन खान, शहादत की ऐसी दास्तां जिसने भी सुनी नम हो गईं आंखें!

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धरा धरोहर धन बड़ा,

ना मुश्किल इन्हें सुहाय।

जब-जब मुश्किल आन पड़ी,

फौजी ही सुलझाय । 

या तो कण-कण में भगवान रहता है या फिर दूसरा नाम फौजी। कोई भी कार्य क्षेत्र हो फौजी सबसे आगे अपने कार्य को अंजाम देते हुए मिलता है। शेखावाटी का नाम पूरे भारत में “शेखावाटी शूरवीरों का” के नाम से पहचाना जाता है।

शून्य डिग्री तापमान से नीचे और 50 डिग्री तापमान से ऊपर यदि कहीं कोई मिलता है तो वह फौजी है। आज कोलिंडा निवासी शहीद मोहसिन खान को कौन नहीं जानता। जब जिले के कोने कोने से 22 वर्षीय मोहसिन के शहीद होने की खबर हवा की तरह फैल गई थी, तब नम आँखों से और जुबान पर बस एक ही नाम था “जय हिन्द” झुंझुनू के लाडले।

फौजी परिवार फौजी रुतबा,

देश प्रेम का भरा है जज्बा।

मोहसिन खान का जन्म 15 जुलाई 1997 को सूबेदार सरवर खान के घर हुआ था। सीनियर कक्षा पास करते ही वह सेना में 6 सितंबर 2017 को भर्ती हो गए। चार भाई-बहनों में सबसे छोटे शहीद मोहसिन खान के पिता जी सरवर खान सेना से रिटायर सूबेदार है। मां का नाम बलकेश बानो है। दो भाई और दो बहनो में सबसे छोटे मोहसिन खान की उम्र 22 वर्ष है। इनके बड़े भाई अमजद खान राजौरी इलाके में तैनात हैं।

अपना परिवार बसाने की तरफ एक कदम बढ़ाया ही था कि मोहसीन खान एक छद्म यु’ द्ध में अपनी जिंदगी की जंग हार गया। वह महीने भर पहले महीने भर की छुट्टियों में जब गांव आया तो उनके परिवार वालों ने उनकी सगाई कर दी थी। मोहसिन खान अविवाहित थे।

तपती भूमि तपता खू’न,

यु’द्धाभ्यास महीना जून।

भारतीय सेना की 16 ग्रे’ नेडियर के सिपाही मोहसिन खान इन दिनों जम्मू कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में तैनात थे। 31 जुलाई 2020 को आ’ तंक वादियों से हुई मुठभेड़ में मोहसिन खान शहीद हो गए। दुश्मनों को खदेड़ने के बाद घात लगा कर बैठे एक आ’ तंकवादी की गो’ ली मोहसिन के सी’ने को पार कर गई।बेटे को तिरंगे में लिपटा देखकर हर किसी की आंखें नम हो गई। मां बलकेश बानो दादा सन्नू खान तथा दोनों बहनो समेत परिवार के अन्य सदस्यों का रो रो कर बुरा हाल हो गया।

22 वर्षीय मोहसिन खान को ईद के दिन 1 अगस्त 2020 को अंतिम विदाई दी गई। शहीद मोहसीन खान के पिताजी से जब बात हुई तो वह पूरी तरह से आश्वस्त दिखे कि मुआवजा मिलने में थोड़ा टाइम तो लगता ही है। काम प्रोग्रेस पर है और जल्दी ही काम हो जाएगा।

अनुशासन से शासन पर,
भरोसा दिखा फौजी का।
ना टूटने पाए ऐसा काम करो,
यह सवाल बड़ा है रोजी का।

विद्याधर तेतरवाल, मोती सर।

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