अगर पढ़ाई में दिल नहीं लगता तो सुनील जी की यह कहानी आपमें प्रेरणा भर देगी

Sunil ji Professor in Jhunjhunu: सुनील जी व्याख्याता टॉपर धतरवाला, झुंझुनू।
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वह क्या सफलता हासिल करेंगे,
जो दूसरों की छाया में पलते हैं।
सफलता उनके कदम चूमती है,
जो अपने पैरों पर चलते हैं।

सुनील जी व्याख्याता टॉपर का करिश्मा।
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दोस्तों नमस्कार!
दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे शख्स से रूबरू करवा रहा हूं, जिसने नेवी से सेवानिवृत्त होने के बाद व्याख्याता पोस्ट के लिए राजस्थान को टॉप किया है। उन्होंने पटवारी की परीक्षा में भी सफलता हासिल की थी।और आरएएस (RAS) प्री भी क्लियर किया था, लेकिन रुचि व्याख्याता में होने के कारण उन्होंने इसी को चुना। उनके संघर्ष की पूरी कहानी आगे दर्शायी गई है।

परिवार और परिचय।
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झुंझुनू (Jhunjhunu) जिले के चिड़ावा (Chidawa) तहसील के धतरवाला गांव (Dhatarwala Village) के रहने वाले सुनील जी ने अरुण से बात करते हुए अपनी सफलता और संघर्ष की पूरी कहानी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि जैसे नेवी से सेवानिवृत्त हुआ वैसे ही मैंने दो जगह से पीएचडी (PhD) हेतु अप्लाई कर दिया- मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी व शेखावाटी यूनिवर्सिटी। मैंने सोशियोलॉजी से दोनों जगह पर ही टॉप किया। तत्पश्चात शेखावाटी यूनिवर्सिटी नजदीक होने के कारण इससे मैंने पीएचडी किया।
उसी समय व्याख्याता हेतु फार्म निकले हुए थे, मैंने बिना समय गवाएं फॉर्म भर दिया तथा राजस्थान टॉप करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। मैंने नहीं सोचा था कि मैं राजस्थान टॉप करूंगा। मैं मेरी नियमित पढ़ाई कर रहा था और जब रिजल्ट आया तो दोस्तों ने बताया कि आपकी फर्स्ट रैंक आई है। तो मैंने सबसे पहले मेरी मां को बताया। सुनील ने बताया कि मेरे माता-पिता अनपढ़ है, लेकिन मेरी पढ़ाई हेतु हमेशा तत्पर रहे।

सोशियोलॉजी क्या है।
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सुनील जी ने बताया कि सोशियोलॉजी में हमारा परिवार और परिवार से जुड़ी हुई सभी बातें होती हैं, जिनमें मेरी हमेशा से रुचि रही है। सर्विस में जाने के बाद में जो थोड़ा परिवार से फासला हो जाता है,तो मेरी रुचि और ज्यादा बढ़ गई।
उन्होंने बताया की मेरी 2005 में जॉब लगी थी। मैं स्वयंपाठी स्टूडेंट के रूप में 2009 में मैंने स्नातक किया। बाद में 2014 में कोटा ओपन यूनिवर्सिटी से मैंने MA किया। मैं सर्विस में रहते रहते पढ़ाई से जुड़ा रहा और नेट क्लियर कर लिया तथा सर्विस से आने के बाद दो बार नेट किया। Sunil ji Professor in Jhunjhunu

परिवार ही आधार है।
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सुनील जी ने बताया कि मैंने टैगोर चिल्ड्रन एकेडमी सूरजगढ़ से सीनियर पास करने के बाद में साइंस सब्जेक्ट से मोतीलाल कॉलेज में एडमिशन ले लिया था। लेकिन उसी समय मेरा नेवी में सिलेक्शन हो गया और मुझे उस पढ़ाई को वहीं पर छोड़ना पड़ा। तथा आर्ट्स सब्जेक्ट ले लिया व स्वयं पार्टी के रूप में आगे का सफर तय किया। उन्होंने बताया कि किसी भी व्यक्ति की सफलता का राज उसका परिवार है,परिवार आधार है।
सुनील जी ने कहा की फौजी कोटा को अपनी कमजोरी मत बनाओ। सामान्य स्टूडेंट की तरह पढ़ाई करो। मैंने वही किया था। मेरा सब्जेक्ट समाजशास्त्र था। जिसका राजस्थान में कोचिंग सेंटर नहीं हैलेकिन बड़े लोगों से सलाह मशवरा और अच्छी पढ़ाई ही मेरी सफलता का राज है। उन्होंने बताया की पढ़ाई में निरंतरता जरूरी है। सुनील जी कहते हैं की मेरे ग्रुप में सकारात्मक विचारधारा के साथी थे।जो हमेशा एक दूसरेको मोटिवेट करते रहते थे। एक दूसरे को कहीं भी नेगेटिव सोचने का मौका नहीं मिला।यहभी मेरी सफलता का बहुत बड़ा राज है।

अपने विचार।
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सकारात्मकता और आत्मविश्वास,
दोनों में सफलता छुपी हुई।
सफलता उनके कदम चूमेगी,
जिनको इन में रुचि हुयी।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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