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झुंझुनू

शेखावाटी की दंगल छोरी पहलवान बलकेश मीणा की संघर्षभरी कहानी, राजस्थान का किया नाम रोशन

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आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताएंगे जिसे सुनकर आपकी आंखों में आंसू आ सकते हैं। आप भी सोचने व विचार करने पर मजबूर हो जाएंगे कि देश में नेशनल स्तर के खिलाड़ियों की क्या हालत हो चुकी है। आज हम आपको कहानी बताएंगे रेसलर पहलवान बलकेश मीणा की। आपने फोगाट सिस्टर्स का नाम तो जरूर सुना होगा लेकिन उनके जैसी ही एक और पहलवान है राजस्थान की बलकेश मीणा।

बलकेश मीणा का जन्म 15 नवंबर साल 1995 को हुआ। वह राजस्थान के झुंझुनू जिले के खुडाना की रहने वाली है। उन्होंने बगड़ के पीरामल स्कूल से बीए फाइनल किया हुआ हैं। साल 2011 में उनके पिता रामप्रसाद मीणा का दिसंबर के महीने में निधन हो गया। जिसके बाद उनकी मां ने मजदूरी करके सभी भाई बहनों को पाला पोसा।

करियर की बात करे तो जब बलकेश आठवीं कक्षा में थी तब उनके स्कूल के पीटीआई ने उन्हें रेसलर यानी पहलवान बनने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद उन्होंने पहलवान बनने की ठानी और प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया। साल 2011 में उन्होंने जिला स्तर प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया। 2012 में चिड़ावा में हुई जिला स्तर प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल हासिल किया। 2013 में बतौर राज्य स्तर की खिलाड़ी बनकर राजधानी जयपुर में दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं 2014-16 में जयपुर में ही राज्य स्तर की खिलाड़ी बनकर प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया। वहीं इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर मैच खेला और 2014, 2015, 2017, 2018 और साल 2019 में अंडर 23 खिलाड़ी बनके पहलवानी में अपना मुकाम बनाया।

वह अब तक 5 गोल्ड, 10 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं। लेकिन इस सबके बावजूद भी आज आर्थिक तंगी से जूझ रही बलकेश मीणा मात्र ₹235 रोजाना की ध्याडी मजदूरी करने पर मजबूर है। वह मनरेगा में रोजाना की ध्याडी मजदूरी करती हैं। जिसमें उनका काम बाकी मजदूरों और श्रमिकों का हिसाब किताब रखना होता है। वह कहती हैं कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नेतृत्व करना चाहती हैं। साथ ही भारत के लिए गोल्ड मेडल लाना चाहती हैं।

लेकिन सबसे पहले उनका एक ख्वाब है कि खेल कोटे से उन्हें एक अच्छी नौकरी मिले। जिससे आर्थिक तंगी दूर हो सके,उन्होंने कहा कि पहलवान के लिए सबसे जरूरी चीज अच्छी डाइट होता है। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह इन सब चीजों को पूरा नहीं कर पा रही है, नौकरी लगने के बाद अच्छी डाइट और मेहनत के साथ भारत का नेतृत्व करना चाहती हैं।

अब तक का उनका पहलवान करियर:

2013 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक।

2014 में राजधानी जयपुर में रजत पदक,यह प्रतियोगिता राज्य स्तर पर हुई थी।

2015 में भी राज्य स्तरीय जूनियर पहलवानी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, प्रतियोगिता सीकर में आयोजित हुई।

2016 में सिल्वर मेडल,प्रतियोगिता जयपुर में राज्य स्तरीय पर हुई। यह प्रतियोगिता सीनियर वर्ग के लिए आयोजित हुई।

2017 में राज्य स्तरीय सीनियर कुश्ती में रजत पदक।

2017 में झुंझुनू में इंटर कॉलेज में गोल्ड मेडल।

2018 में नाथद्वारा में आयोजित कॉम्पिटिशन पहलवानी में गोल्ड मेडल।

सीकर में 2018 में अंडर-23 कुश्ती में गोल्ड मेडल। राज्य स्तरीय पर एक बार फिर गोल्ड जीता।

2019 में राज्य स्तरीय सीनियर कुश्ती में ब्रॉन्ज मेडल।

नवलगढ़ के शेखावाटी कुश्ती में शेखावाटी केसरी का खिताब। यह बात 2018 की है।

2019 व 2020 को आबूसर में हस्तशिल्प मेले की कुश्ती प्रतियोगिता में ट्रॉफी जीती है।

आज भी बलकेश मीणा बगड़ में प्रैक्टिस करती हैं और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही भारत की तरफ से खेलते हुए नजर आएंगी। उनकी लगन और जज्बे को हम सलाम करते हैं और उम्मीद जताते हैं कि राज्य सरकार के साथ भारत सरकार उन पर ध्यान देगी। सरकार उनकी जरूरतों को पूरा करेगी जिससे एक अच्छे खिलाड़ी होने के नाते वह भारत के लिए स्वर्ण पदक ला सके।

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