छोटे से गाँव की लड़की WTO में बनी लीगल अफेयर्स ऑफिसर, आलोचकों को दिया करारा जवाब जानें कैसे

ना धनी ना होशियार थी, यह मातृभाषा की ताकत है।
डब्ल्यूटीओ तक पहुंचा दिया, यह उसी की नजाकत है।

दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी शख्सियत से रूबरू करवा रहा हूं। जिसने गांव के सरकारी स्कूल में हिंदी मीडियम में पढ़ कर दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन तक का मुकाम हासिल कर सबको चौंका दिया है।

परिचय और शिक्षा : झुंझुनू (Jhunjhunu) जिले के सूरजगढ़ (Surajgarh) तहसील के काजड़ा (Kajda Village) गांव के शिवकुमार शर्मा की 28 वर्षीय बेटी स्वाति शर्मा (Swati Sharma) ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में हिंदी मीडियम से की।

आपने यह मंजिल कैसे हासिल की : अपनी बात को दोहराते हुए स्वाति बताती है कि इरादे बुलंद हो तो मुश्किलें अपने आप छोटी दिखने लग जाती है। मैंने गांव में सरकारी स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के बाद में टैगोर स्कूल सूरजगढ़ और डालमिया स्कूल चिड़ावा से ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की। इसके बाद में लॉ की पढ़ाई करने के लिए देहरादून गई।

देहरादून में मेरे क्लास के बच्चे जो लॉ कर रहे थे, उनका सब का बैकग्राउंड कानून की पढ़ाई से जुड़ा हुआ था। लेकिन मेरे बैकग्राउंड में कहीं भी कानून का नामोनिशान नहीं था। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए स्वाति को बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। स्वाति ने बताया कि जब मैं लॉ की सेकंड ईयर में थी तब मैंने सोच लिया था कि इंटरनेशनल लॉ में पोस्ट ग्रेजुएट करनी है, और मैंने वैसा ही किया।

उनका कहना है कि मैंने तभी सोच लिया था कि दुनिया के टॉप संस्थानों में मुझे काम करना है। स्वाति ने बताया कि यदि कोई मन में ठान ले और मेहनत करें तो कोई भी मुकाम पाया जा सकता है। उसने बताया कि इस सफर में मुझे बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मैं पढ़ाई में ओसत थी, टॉपर नहीं थी, मेरा मीडियम हिंदी था। लेकिन आगे बढ़ने का जज्बा था। मैं कभी पढ़ाई करने से थकी नहीं थी और यही ललक मेरे काम आई।

नौकरी।
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स्वाति ने बताया कि जुलाई 2020 के अंदर मेरी लॉ की पढ़ाई पूरी हो गई। और मैंने दुनिया के टॉप लॉ इंस्टिट्यूट में रिसर्च के लिए ट्राई किया। इस बीच बोरीक यूनिवर्सिटी यूके की प्रोफ़ेसर रीना पटेल से मुलाकात हुई। उसके गाइडेंस में लंदन के इंटरनेशनल लॉ कॉलेज में रिसर्च करना शुरू किया। वहां पर वर्ल्ड ट्रेड इंस्टिट्यूट स्विट्जरलैंड के डायरेक्टर पीटर वान डेन बॉस से मुलाकात हुई, जिन्होंने मेरे रिसर्च और काम की तारीफ की। और मुझे मौका दिया। तब उसके बाद बेल्जियम में 6 महीने की ट्रेनिंग के बाद में मुझे डब्ल्यूटीओ में लीगल ऑफिसर के पद का ऑफर मिला।

अन्य।
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स्वाति ने बताया कि मैं टॉपर नहीं थी, पर आगे बढ़ने की ललक थी। मेरा परिवार कानून से ताल्लुक नहीं रखता था, लेकिन वो पढ़ाई में थकी नहीं थी। मेरा मीडियम हिंदी था, लेकिन मैंने मन में ठान लिया था। और जब मन में ठान लिया जाता है, और हौसले बुलंद हो तो समस्या छोटी हो जाती है।

” जय झलको –जय राजस्थान।”

अपना विचार।
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हौसले बुलंद हो तो
समस्याएं छोटी दिखती है।
सब कुछ आसान है,
पर जज्बे और मेहनत से मिलती है।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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