झुंझुनू के 90 साल के अध्यापक जिन्होंने अब तक नहीं छोड़ा अध्यापन का साथ!

Yadram Ji Teacher in Jhunjhunu: यादराम जी पूर्व अध्यापक, लांबी अहीर झुंझुनू।
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गुरु ज्ञान का भंडार है,
चाहे जितना करो बखान।
पहली गुरु माता होती,
जिसका सबको ज्ञान।

90 वर्ष के गुरु जी का बेबाक इंटरव्यू।
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दोस्तों नमस्कार!
दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी अभूत पूर्व शख्सियत से रूबरू करवा रहा हूं, जिसने अपना पूरा जीवन समाज को जगाने में लगा दिया। किस प्रकार पहले पढ़ाया जाता था, कैसी पढ़ाई होती थी। और आज के हालात में क्या अंतर है। इस बारे में खुलकर अपने अनुभव साझा किए।

परिचय।
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झुंझुनू (Jhunjhunu) जिले की सूरजगढ़ (surajgarh) तहसील के लांबी आहिर (Lambi Aahir) गांव के भूतपूर्व अध्यापक यादराम (Yadram) जी ने हमारी संवाददाता खुशबू से बात करते हुए अपने अनगिनत अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया ,मेरा जन्म विक्रम संवत १९८९ में हुआ था, अर्थात इस समय मैं 90 वर्ष का हो गया हूं। मैंने 1955 में अध्यापक के पद पर राजकीय सेवा में अपना कार्यकाल शुरू किया था, और 34वर्ष की सेवा के बाद में सेवानिवृत्त हुआ।

शिक्षा
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Yadram Ji Teacher in Jhunjhunu
मास्टर जी ने अपनी शिक्षा के बारे में बताया कि मैंने चार क्लास तक गांव में पढ़ाई की। उस के बाद में आठवीं क्लास तक पचेरी में, नौवीं क्लास मैंने चिड़ावा से पास की। वहां किराये का मकान लेकर हाथों से रोटी बनाता था। तो साथ वाले बच्चे सब फेल हो गए। मेरा भी वहां मन नहीं लगा, तो मैंने खेतड़ी में आकर दसवीं में पढ़ाई करनी शुरू की। खेतड़ी के कोर्स में और चिड़ावा के कोर्स में अंतर होने के कारण मैं होशियार होने के बजाय थर्ड डिवीजन से 10वीं में पास हुआ।

नौकरी और काम
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यादराम जी ने दसवीं पास करने के बाद में कई विभागों में इंटरव्यू दिए, जिनका पूरा ब्यौरा बताया। आखिर में मुझे टेंपरेरी पोस्ट पे घरड़ाना में अध्यापक हेतु नियुक्ति मिली।जिसको छ माह बाद में परमानेंट कर दिया गया। मैं दूर-दूर गांवों से ढाणियों से बच्चों को गोदी लेकर या अंगुली पकड़ कर लाता था, और पढ़ाने में बहुत ज्यादा रुचि रखता था। उस समय मैंने स्कूल के अंदर सत्तर बच्चे कर लिए थे।
यादराम जी कहते हैं कि मैंने मेरे पूर्वजों के खाती के काम को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग किया है। मैंने फर्नीचर का काम भी मेरे पिताजी के साथ किया है, और लोहार का काम भी मैंने किया है। मैंने कभी काम में कोई शर्म नहीं की। आज भी मेरे पास में औजार रखे हैं। आसपास के 5 –6 गांवों के किसान मेरे पास में काम हेतु आते थे। मैंने खाती का, लोहार का, अध्यापक का, पशु पालन का, खेती का सब काम किया है।
अपनी पढ़ाई से संबंधित बातें बताते हुए यादरामजी कहते हैं कि पढ़ाई के समय स्कूल में पढ़ाई करनी पड़ती थी।मास्टरजी भी बहुत तेज हुआ करते थे। पूरे दिन पढ़ाते थे।

आजादी की लड़ाई की बात।
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आजादी से पहले की अपनी कुछ यादगार बातों के बारे में बताते हुए, यादराम जी कहते हैं कि हिंदू मुसलमानों की लड़ाई हुई थी। लड़ाई क्यों हो रही थी यह मुझे याद नहीं है। उसमें हमने खूब औजार बनाना शुरू कर दिया था। हमारे बहुत से बुजुर्ग हरियाणा चले गये थे, हरियाणा से इधर आ गये थे। आर्य समाज के लोग गीतों के द्वारा समाज को जगाने का काम करते थे। हम भी उसमें शामिल हुए थे।आज भी आजादी के बहुत से गीत मेरे को याद है।

सेवानिवृत्ति तथा अन्य
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जुलाई 1993 में सेवानिवृत्त होने के बाद यादराम जी कहते हैं कि मैंने सत्संग में बहुत काम किया है। मुझे हारमोनियम तथा तबला बजाने का बहुत शौक है। मैंने बहुत से प्रोग्राम किए हैं। Yadram Ji Teacher in Jhunjhunu

अपने विचार।
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तन पर झुर्रियां पड़ी हुई,
पर मन तो तरोताजा है।
आज भी 90 वर्ष की उम्र में,
जैसे वह कहीं का राजा है।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

देखें पूरा इंटरव्यू…

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