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जोधपुर

1000 साल पुराने हिंगलाज माता मंदिर का रहस्य, राईका नाथ जी महाराज की दिव्य तपोस्थली की कहानी

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मां के मंदिर जो भी जाता,
खुशी से चेहरा खिल गया।
एक बार हुई घटना ऐसी,
कैलाश पर्वत हिल गया।

दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी तपोस्थली में ले चलता हूं। जहां के तप के कारण महादेव (Mahadev) का कैलाश पर्वत (Kailash Parwat) भी हिल गया था। फलोदी तहसील (phalodi tehsil) में शैतान सिंह नगर गांव (Shaitan Singh Nagar Village) में हिंगलाज माता के मंदिर (hinglaj mata mandir) की स्थापना 1000 साल पहले हुई थी।

स्थापना तथा विशेषता।
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गरिमा से बात करते हुए वहां के प्रबंधक श्रीमान किशन लाल जी ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना कौशलगिरि जी महाराज (KaushalGiri Ji Maharaj) ने 1000 साल पहले की थी। वहां पर खड़े एक जाल के पेड़ की तरफ इशारा करते हुए वह कहते हैं कि यह 700 साल पुराना पेड़ है।

एक बार की बात है कि गांव बानासर (Banasar) में राईका नाथ जी महाराज (Raika Nath Ji Maharaj) ने जब समाधि ली थी, तो कैलाश पर्वत भी हिलने लग गया था। तब महादेव ने नारद जी से पूछा कि यह क्या हो रहा है। तब नारद जी ने बताया था कि इस समय राईका नाथ जी महाराज समाधि ले रहे हैं।

बहुत से संत महात्मा जब माता जी के दर्शनों के लिए आते हैं। तो रात को विश्राम के लिए वह यहां सो नहीं सकते, क्योंकि उनके किसी न किसी प्रकार की तकलीफ हो जाती है। इसलिए बानासर के राईका नाथ जी महाराज के मंदिर की फेरी लगाने के बाद में ही यहां पर विश्राम कर सकते हैं। बुधवार का दिन माताजी के लिए विशेष महत्व का दिन है, तथा मिंगसर की पूर्णिमा को प्रतिवर्ष बड़ा मेला लगता है।

चैत्र मास में नवरात्रि (Navratri) के नौ दिन तक माताजी का मंदिर बिल्कुल बंद रहता है। बहुत पुराने समय से, संत महात्माओं के समय से ही औरतों का प्रवेश वर्जित था। और आज भी वर्जित है। वहां पर गांव वालों के लिए पीने का पानी नहीं था। गांव वालों ने पूछा कि आपको कुछ भी दिखाई दे तो मुझे बताना। जब राईका नाथ जी महाराज यहां पर आए थे, तो एक उड़ते हुए कबूतर के बारे में बताया और वह कबूतर कहां से उड़ा है, इसकी खोज करते हुए, वह जिस पेड़ में से निकला था। वहीं पर बहुत पुराना एक कुआं निकला और उसी से पूरे गांव के लिए पीने का पानी आज तक चल रहा है।

अब आपको क्या फायदा होता है।
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गांव के बारे में लोगों का कहना है कि यहां पर पहले भील जाति के लोग रहते थे। जो बाण चलाते थे। इसलिए इस गांव का नाम बाणासर रखा गया। राईका नाथ जी महाराज की भभूत राईका समाज के लिए आज भी एक अनुपम भेंट है क्योंकि जब भी ऊंटों के किसी प्रकार की तकलीफ होती है, तब भभूत के रगड़ने मात्र से ऊंट ठीक हो जाते हैं। बच्चों के लिए भी यह भभूत दवाई का काम करती है।

” जय झलको_____ जय मारवाड़।”

अपने विचार।
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शक्ति भी है और चमत्कार भी,
विश्वास सबसे बड़ी बात।
काम करो कोई ऐसा,
हों साथ हजारों हाथ।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर

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