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जोधपुर

पर्यावरण का बचाने का सन्देश देते खेजड़ली आंदोलन और इमरती देवी समेत 363 वीरों के ब’लिदान की गाथा

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आज हम बात करेंगे एक ऐसे आंदोलन की जिसने अपने पर्यावरण को बचाने की जिद लेकर संग्राम खडा़ कर दिया वह गांव था खेजड़ली।और इस संग्राम की नायिका थी इमरती देवी। 1730 की बात है। जोधपुर में अभय सिंह का राज था। अभय सिंह को एक बात सूझी।उसने अपने लिए महल बनाने की सोची जिसमें छत लकड़ी की होनी थी।वह इसे अपने ढंग का महल बनवाना चाहता था और उसने अपनी सेना को कह दिया कि किसी भी प्रकार, कहीं से भी से लकड़ियां लेकर आएं।

सेना ने खेजड़ली गांव को चुना क्योंकि खेजड़ली गांव बिश्नोईयों का गांव था और वहां पेड़ पर्याप्त संख्या में थे।बिश्नोई जांभोजी के अनुयायी होते हैं और जांभोजी के ये प्रवर्तक 29 नियमों में से उल्लेखित एक यह नियम भी अच्छे से मानते हैं कि वन्यजीवों और वृक्षों की रक्षा करनी है। सेना आयी, पेड़ काटने शुरू किए, अचानक गांव की एक स्त्री जिसका नाम था इमरती देवी, प्रतिरोध किया लेकिन वे नहीं माने, तब गाँव की वह स्त्री अपनी 3 बेटियों आसू, भागु और रत्नी के साथ खेजड़ी के पेड़ से लिपट गयी और बोली- “सर सान्टे रूख रहे तो भी सस्तो जाण”

जिसका अर्थ होता है “अगर पेड़ो की रक्षा के लिए सर भी कट जाये तो उससे भी पीछे नहीं हटना”।गिरधारी सिंह भंडारी जो राज दरबार में हाकिम था, के हुक्म पर सेनिको ने अमृता देवी और उनकी 3 बेटियों पर कु’ल्हाड़ी से प्रहार कर उनके टुकड़े टुकड़े कर खेजड़ी के पेड़ो को काटना शुरू किया।बात समीप गांवों में फेल गई और 83 गाँवो के विश्नोई समाज के लोग वहा आ गए।एक जानकारी के हिसाब से 363 विश्नोई खेजड़ी के पेड़ो से लिपटते गए और मारवाड़ के सैनिक पेड़ो सहित उनके शरीर के टुक’ड़े करते गए।

खेजडली र’क्तरंजित हो गया फिर भी विश्नोई समाज के लोग बड़ी संख्या में पेड़ो से लिपटते रहे जो उनकी प्रकृति को लेकर खूबसूरत सोच को दर्शाता है।यह सब मारवाड़ के हाकिम सेना को लेकर पुनः जोधपुर दरबार लोट गए।आज उसी की याद में खेजडली गाँव में 363 विश्नोई भाइयो तथा अमृता देवी उनकी बेटियों के सम्मान में समस्त हिन्दू समाज एकत्र होता हे।खूब बड़ा मेला भरता है।बताते हैं कि जब राजा को इस बात का पता चला तो वे दुखी हुए।

ऐसी थी इमरती बाई के ब’लिदान की कहानी।ऐसी कहानियाँ पढ़ने से कुछ नहीं होगा।हमें पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना चाहिए नहीं तो हालात अभी देख ही पा रहे होंगे आप।

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