कुंज बिहारी मंदिर की कलाकारी करती है आकर्षित, श्रद्धालुओं को होता है अलौकिक वातावरण का अहसास!

आज हम आपको काल में बताएंगे जोधपुर के 230 साल पुराने कुंज बिहारी मंदिर (Kunj Bihari Temple in Jodhpur) की। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 1847 यानी साल 1790 में जोधपुर के तत्कालीन महाराजा गिजहसिंह की पासवान उप पत्नी गुलाब राय ने करवाया था।

चित्रशैली का अनूठा प्रदर्शन करता है मंदिर

कुंज बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। वही मंदिर में नाथद्वारा द्वारा चित्र शैली के अनूठे कलात्मक चित्र मौजूद है। मंदिर में भगवान राम कृष्ण के जीवन के प्रसंग की चित्र शैली दर्शायी गई है। वहीं देवकी जी और वासुदेव का विवाह,कृष्ण रास प्रसंग,गीता उपदेश,सुदामा कृष्ण सखा भाव,गजेंद्र मोक्ष भागवत के प्रसंग चित्रकला में मौजूद है। मंदिर में मुख्य स्वरूप श्रीनाथजी का है जो बड़ा ही आकर्षित करता है।

तोरणद्वार की अपनी विशेषता

कुंज बिहारी मंदिर की प्रतिमा कबूतरों का चौक स्थित सीताराम मंदिर से लाकर स्थापित की गई थी। वही मंदिर के तोरण द्वार को स्थापत्य कला के उत्कृष्टम नमूने हैं। तोरण द्वार की विशेषता यह है कि एक शिलाखंड को तराश कर इसका निर्माण किया गया हैं।

अन्य प्रतिमाएं भी है मौजुद

मंदिर में कुंज बिहारी के अलावा अन्य प्रतिमाएं भी मौजूद है। मंदिर में महालक्ष्मी,गायत्री,गणपति,सरस्वती,संतोषी माता,राम, समेत निरंजनी संप्रदाय के प्रवर्तक हरी पुरुष दयाल सिंह के भी प्रतिमा मौजूद है। वहीं मंदिर में दिन में छह बार आरती होती है। इसमें मंगला,श्रृंगार,राजपूत,उत्यापन,संध्या,झांकी व शयब आरतियां शामिल हैं। (Kunj Bihari Temple in Jodhpur)

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