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जोधपुर

1971 की जंग के जाबांज लेफ्टिनेंट कर्नल प्रभु सिंह भाटी, नेहरू ने दिल्ली बुलाकर किया था सम्मानित

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1962 में इंडो-चाइना युद्ध से लेकर 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले जोधपुर के कर्नल प्रभु सिंह भाटी का इस साल फरवरी में 93 साल की उम्र में निधन हो गया।

कर्नल प्रभु सिंह भाटी को माइजो हिल्स कांउटर इनसर्जेंसी ऑपरेशन में अहम भूमिका के लिए जाना जाता है। 18 जनवरी 1929 को जन्मे लेफ्टिनेंट कर्नल प्रभु सिंह भाटी के पिता राव बहादुर हीर सिंह भाटी ने भी काफी लंबे समय तक सेना में सेवाएं दी।

लेफ्टिनेंट कर्नल 61 केवलरी, 20 राजपूत, 17 राजपूत, 3 जेएंडके राइफल और 20 लांसर्स में रहे। वहीं भाटी ने 1962 भारत-चीन, 1965 और 1971 भारत-पाकिस्तान जंग में हिस्सा लिया।

नेहरू ने किया था दिल्ली बुलाकर सम्मानित

ओटीए-मद्रास की सबसे पहली सोर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित ले. कर्नल भाटी सेना में एक कुशल घुड़सवार भी थे। उनके पराक्रम को देखते हुए 6 मार्च 1960 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें दिल्ली बुलाया और तीन मूर्ति भवन में सम्मानित किया। नेहरू ने भाटी को चैंपियन जंपर ऑफ इंडिया घोषित किया था।

सेना के बाद किए कई सामाजिक कार्य

रॉयल एडिनबर्ग टैटू में ले. कर्नल भाटी ने हॉर्स माउंटेन परेड कंटेनमेंट में भी भारत की ओर से मोर्चा संभाला। इसके साथ ही वह इक्वेस्ट्रीअन शो में 5 बार इंडियन हॉर्स राइडर चैंपियन भी रह चुके हैं। भाटी ने सेना से रिटायर होने के बाद सामाजिक कार्यों की तरफ रूझान बढ़ा लिया और वह कई सामाजिक संस्थाओं से सालों तक जुड़े रहे।

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