परमवीर चक्र मेजर शैतान सिंह की कहानी जिनसे चीन की फौज कांपती थी थर थर ~ शौर्य गाथा

पीछे हटना सीखा नहीं,
आगे बढ़ना हमारा काम है।
देश प्रेम के खातिर हमारा,
पहला काम देह दान है।

दोस्तों नमस्कार।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी शख्सियत की कहानी बता रहा हूं। जिसने 1962 की लड़ाई में चाइना को नाकों चने चबवा दिए थे। वीर सपूत शहीद मेजर शैतान सिंह ने चाइना की लड़ाई में 18 नवंबर 1962 को अपने प्राणों की आहुति दी थी।

शिक्षा।
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झलको जोधपुर (Jhalko Jodhpur) की गरिमा से बात करते हुए गांव वालों ने बताया कि मेजर शैतान सिंह (Major Shaitan Singh) गांव में पढ़ाई करने के बाद में चौपासनी स्कूल और फिर जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी से डबल m.a.किया था। पढ़ाई में सबसे अब्बल रहने वाले शैतान सिंह एक मिलनसार व्यक्ति थे। उनकी काम करने की शैली हमेशा जुझारू प्रवृति की रहती थी, इसलिए वह हर कार्य को मन लगाकर किया करते थे।

रिजांगला पहाड़ी।
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चीन (China) की युद्ध कौशल में पारंगत तथा विशेष जुझारू टुकड़ी से मेजर शैतान सिंह की मुठभेड़ चल रही थी। अन्वेषण खत्म होने जा रहा था, तो मेजर शैतान सिंह ने अपने उच्च अधिकारियों से अतिरिक्त सेना की मांग की, लेकिन उन्होंने सेना भेजने से मना कर दिया और कहा कि पीछे हट जाओ। अब हम इनका मुकाबला नहीं कर सकते। उच्च अधिकारियों ने बताया कि हमारे पास में सर्दी के लिए और लड़ाई के उपयुक्त अन्वेषण नहीं है, इसलिए अब हम को पीछे हटना ही पड़ेगा। शहीद मेजर शैतान सिंह ने पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। और चाइना की सेना के साथ लोहा लेते हुए शहीद हो गए।

मेजर शैतान सिंह ने शहीद होने से पहले चाइना की फौज के छक्के छुड़ा दिए थे, और लाशों के ढेर लगा दिए थे। इसी वजह से वह चौकी आज भी भारत के कब्जे में है। इसी वजह से मेजर शैतान सिंह को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। वह हमेशा कहा करते थे कि पत्र व्यवहार हमेशा इंग्लिश में करो, जिससे अभ्यास बना रहे। आज उस गांव के हर घर से भारतीय सेना में जाने का जज्बा है। उन्हीं की वजह से आज गांव स्कूल, सड़क, पानी आदि हर सुविधा से जुड़ा हुआ है।

मंदिर।
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यह मंदिर परमवीर चक्र से सम्मानित वीर सपूत मेजर शैतान सिंह जी की याद में 1962 में बनाया गया था। इस मंदिर की विशेषता यह है कि इसमें शराब पिया हुआ व्यक्ति नहीं आता है। ना शराब चढ़ाई जाती है और ना ही किसी जानवर की बलि दी जाती है। यहां खीर चूरमा का और मिठाई का भोग लगाया जाता है, और नारियल चढ़ाया जाता है। श्रद्धा से जो भी व्यक्ति यहां पर आता है उसकी हर आस पूरी होती है। जो देश प्रेम और समाज सेवा उनके अंदर भरी हुई थी। उसी के अनुरूप मंदिर में भी सभी लोगों की इच्छाओं की पूर्ति होती है।

अन्य।
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गांव के मौजीज लोगों से बात करते हुए बताया कि बड़े-बड़े सभी शहरों में मेजर शैतान सिंह की मूर्ति है। लेकिन फलोदी (Phalodi) के अंदर नहीं है। इसलिए हमारी सरकार से रिक्वेस्ट है कि फलोदी में मेजर शैतान सिंह की स्टेचू बनाकर शहीद का सम्मान करें। नारी शिक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि मेजर साहब की इच्छा थी कि एक लड़की पांच परिवारों को पालती है। इसलिए नारी शिक्षा और उसके सम्मान पर विशेष बल दिया जाए।

अपने विचार।
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मन सुंदर तो तन सुंदर,
तन सुंदर विचारों से।
विचारों में हो दृढ़ निश्चय,
तो भारी पड़े वो सारों पे।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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