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करौली

श्रीकृष्ण जी की बहन योगमाया का अलौकिक कैला देवी मंदिर के चमत्कार, बहूरा चरवाहा की किवदंती

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कैला देवी का मंदिर करौली में स्थित है।माँ दुर्गा के अनेकों अवतार के रूप में कैला देवी भी एक अवतार है।करौली में माता का मंदिर है व प्राचीन शक्तिपीठ के रूप में विराजमान हैं।मंदिर पहाड़ी की तलहटी पर बना हुआ है।इतिहास कहता है कि इस मंदिर का निर्माण राजा भोपाल ने करवाया था। एक मान्यता के मुताबिक जिस मूर्ति की पूजा की जाती है।वह कन्या के रूप में है और वही है जिसकी कंस ह’त्या करना चाहता था।

बताते हैं कि पहले इस इलाके में एक राक्षस रहता था।उसने इलाके में उसने आ’तंक मचा रखा था, परेशान होकर लोगों ने माँ से अनुरोध किया कि कैसे ही करके इसका खात्मा करो।माँ ने अपने भक्तों की सुनी।कैला देवी ने अपनी शक्ति से नरकासुर का व’ध कर दिया और माता की वह शक्ति आज प्रतिमा में विराजमान है।एक अन्य किवदन्ती यह भी मिलती कि त्रिकूट पर्वत पर बहूरा नामक चरवाहा अपने मवेशियों को लेकर आया करता था,

एक दिन उसने देखा कि उसकी बकरियां एक स्थान पर दूध दे रही।इस चमत्कार ने उसे आश्चर्य से भर दिया उसने इस जगह की खुदाई करवायी तो देवी मां की प्रतिमा निकली। चरवाहे ने पूजन कर ज्योत जगाई और धीरे-धीरे प्रतिमा की प्रसिद्धि पूरे क्षेत्र में फैल गई।आज भी परिसर में बहूरा भगत का मंदिर बना हुआ है।

पहले यह प्रतिमा नगर में ही थी फिर जब समय क्रू’र शासकों का आया तब इसे प्रतिस्थापित करने की सोची।बताते हैं कि मां के पुजारी योगीराज उनकी प्रतिमा मुकुंद दास खींची के यहां लेकर जाने लगे। वे मार्ग में रात्रि विश्राम के लिए रुके। निकट ही केदार गिरि बाबा की गुफा थी। उन्होंने देवी की प्रतिमा बैलगाड़ी से नीचे उतारी तथा बैलों को विश्राम के लिए छोड़ दिया। इसके बाद वे बाबा से मुलाकात करने चले गए।

अगले दिन तब प्रतिमा उठाने लगे लेकिन तब वह अपनी जगह से नहीं हिली।लोक की समझ और बातेँ कहती हैं कि काफी प्रयास के बाद भी जब वे प्रतिमा को उठा नहीं सके तो इसे देवी की इच्छा मान उनकी सेवा-पूजा की जिम्मेदारी बाबा केदारगिरि को सौंप कर चले गए।

माता के प्रति उनके श्रद्धालुओं की ग़ज़ब की आस्था है।चैत्र मास में खूब बड़ा मेला भरता है।लखी मेला।मंदिर के बारे में कई मान्यताएं हैं।मंदिर परिसर में श्रद्धालु नृत्य करते हैं जिसे लांगुरिया नृत्य कहते हैं।इतिहास के मुताबिक फिलवक्त जो कैला ग्राम है वह करौली के यदुवंशी राजाओं के आधिपत्य में आने से पहले गागरोन के खींची राजपूतों के शासन में था।खींची राजा मुकन्ददास ने सन 1116 में राजा रघुदास ने लाल पत्थर से माता का मंदिर बनवाया।

कैलादेवी मंदिर पहुंचने के लिए आप जयपुर -आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर महुवा से कैलादेवी आ सकते है।इसके अलावा पश्चिमी मध्य रेलवे के दिल्ली- मुंबई रेलमार्ग पर हिण्डौन के स्टेशन से 55 किमी एवं गंगापुर सिटी स्टेशन से 48 किमी की दूरी पर है।जहां से आप सीधे पहुंच सकते।

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