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करौली

सुंदर गुर्जर का अवसाद से टोक्यो पैरालंपिक तक का सफर, एक दर्दनाक हादसे में गंवाया हाथ

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एक खिलाड़ी आत्मा से खेल को समर्पित होता है, खेल के लिए वह रूह और शरीर की तमाम चुनौतियों को दर्द सहकर भी पार कर लेता है।सफलता की ऐसी ही नजीर पेश करते हैं राजस्थान के करौली जिले से आने वाले इंडियन पैरालंपिक के जेवेलियन थ्रोअर खिलाड़ी सुंदर सिंह गुर्जर, जिन्होंने फिर एक बार साबित किया है कि शारीरिक असमक्षता मंजिल को पाने में रूकावट जरूर डाल सकती है लेकिन बाधा नहीं बन सकती।

सुंदर ने अपनी शारीरिक डिसेबिलिटी को अपना हथियार बनाया और सफलता का परचम लहरा दिया। आपको बता दें कि हाल में सुंदर ने टोक्यो पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई किया है, जिसके बाद अब वह अगस्त होने वालि इस प्रतियोगिता में देश का झंडा लहराने के लिए तैयार है। आइए जानते हैं कैसा रहा सुंदर का यहां तक का सफर।

अपनी कमजोरी को बनाया ताकत

सुंदर गुर्जर इंडियन पैरालंपिक के जेवेलियन थ्रोअर खिलाड़ी हैं जिनका खेलों के प्रति लगावा बचपन से ही रहा है। लेकिन साल 2016 में एक हादसे के दौरान सुंदर ने अपना हाथ गंवा दिया था।

सुंदर ने बताया कि जयपुर में तैयारी के दौरान वह अपने दोस्त के घर पर लोहे की शीट उतारते वक्त हादसे का शिकार हो गए जिसकी वजह से उन्हें एक हाथ खोना पड़ा।

इस हादसे के बाद सुंदर पूरी तरह से टूट गए लेकिन उन्होंने इस कमजोरी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और इसी को ताकत बनाकर आगे बढ़े।

अवसाद से देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने की यात्रा

सुंदर बताते हैं कि हाथ खो देने के बाद वह एकदम से टूट गए और अवसाद में चले गए। उन्हें ऐसे लगा मानो दुनिया खत्म हो गई है, लेकिन उनके दोस्तों और परिवार वालों के समझाइश के बाद उन्होंने पैरालंपिक का ट्रायल दिया.

इस दौरान वह कोच महावीर प्रसाद सैनी के सानिध्य में ट्रेनिंग ले रहे थे। इसके बाद सुंदर ने लंदन में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में देश के लिए सोना जीता और एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया।

तोड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड

वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सुंदर ने 62.15 मीटर का जेवेलियन थ्रो का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी तोड़ा. चैंपियनशिप में सुंदर ने 68.42 मीटर भाला फेंक कर इस रिकॉर्ड को ध्वस्त किया.

इसके बाद सुंदर के नाम के साथ कई रिकॉर्ड जुड़ते चले गए। वहीं सुंदर ने 2018 में एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल और ब्रोंज मेडल भी जीते जिसके लिए उन्हें अर्जुन अवॉर्ड भी दिया गया।

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