राजस्थान का हाई-टेक सरकारी अस्पताल जो देता है प्राइवेट अस्पतालों को भी मात!

Rajasthan: यूं तो राजस्थान में कई ऐसे अस्पताल हैं जो अपनी अत्याधुनिक तकनीक और सुपरस्पेशिलिटी के लिए जाने जाते हैं। मगर कोटा (Kota) के नयापुरा में स्थित कोटा संभाग का बच्चों का सरकारी अस्पताल जेके लोन (JK Lone Hospital in Kota) मातृ तथा शिशु अस्पताल अपनी सुविधाओं और सुखद एटमॉस्फेयर को लेकर खूब चर्चा में है। अस्पताल की सुविधाएं इतनी उत्तम है कि यह प्राइवेट अस्पतालों को भी पीछे छोड़ दे। गरीब तो छोड़ो यहां पर सांसद से लेकर बड़े-बड़े अधिकारी भी बच्चों का उपचार कराने तथा महिलाओं की डिलीवरी कराने के लिए विजिट करते हैं।

JK Lone Hospital in Kota

जेके लोन अस्पताल के नीकू वार्ड, जो नवजात बच्चों के लिए होता है, के सामने बड़े से बड़े प्राइवेट अस्पताल के वार्ड भी फीके से नजर आते हैं। जब इस वार्ड में कदम रखते हैं तो ऐसा लगता है मानो किसी फाइव स्टार होटल में विजिट कर रहे हों। यहां आधुनिक और विश्वस्तीरय सुविधाएं मिलती हैं।

JK Lone Hospital in Kota ronovation

मिली जानकारी के मुताबिक, जेके लोन अस्पताल ((JK Lone Hospital in Kota)) के नीकू  वार्ड में पिछले दिनों 5.79 करोड़ की लागत से कार्य कराए गए हैं। इस वार्ड में 36 बेड की 2 नवजात शिशु इकाई हैं. 20 बेड का मदर वार्ड, एटेंडेंट के आराम करने के लिए प्रतीक्षालय तथा बच्चों को खेलने के लिए प्ले एरिया है। अस्पताल में आपातकालीन वार्ड का भी रिनोवेशन किया गया है। जेके लोन अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा बताते हैं कि नीकू वार्ड में नवजात शिशुओं की गंभीर बीमारियों का भी इलाज किया जाता है।

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डॉ. शर्मा बताते हैं कि नीकू वार्ड में जीवनरक्षक उपकरण भी मौजूद हैं। इनमें मुख्य रूप से दो हार्ड फ्रीक्वेंसी नवजात वेंटीलेटर, 8 हार्ड एंड नवजात वेंटीलेटर, 1 पोर्टेबल सोनोग्राफी एवं कार्डियक इको मशीन, ईटीओ मशीन, नवजात हेड कूलिंग मशीन, मल्टी पैरा मॉनिटर एवं वार्मर, फोटोथेरेपी पल्स ऑक्सीमीटर जैसे सभी अत्याधुनिक इक्यूपमेंट उपलब्ध हैं।अत्याधुनिक सुविधाओं युक्त नवजात बेड होने से गंभीर नवजात शिशुओं के इलाज की गुणवत्ता के स्तर में वृद्धि हो रही है।

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आशुतोष बताते हैं कि जेके लोन हॉस्पिटल संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, हसवाई माधोपुर, टोंक, भीलवाड़ा तथा मध्यप्रदेश के सीमावर्ती इलाकों से इलाज के लिए रैफर होने वाले बच्चे व गर्भवती महिलाएं आती हैं। वहीं, मृत्यु दर की बात की जाए तो नेशनल और राज्य औसत से इस अस्पताल में शिशु मृत्यु दर काफी कम है।

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