बलदेव प्रजापत एक नाम जिसने छोटी-छोटी कलाओं से चौंकाया था सबको…

Baldev Prajapat Passes Away: बलदेव जी प्रजापत, टांकला नागौर राजस्थान।
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मनुष्य गुणों की खान है,
सब में ना एक समान।
कौनसा किसमें ज्यादा मिले,
जो दिलवा दे सम्मान।

कारीगरी का अनोखा स्वरूप।
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दोस्तों नमस्कार।
दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे होनहार युवक से रूबरू करवा रहा हूं जिसकी कारीगरी और इंजीनियरिंग को देखकर आप भी हैरान हो जाएंगे, मगर दुख इस बात का ऐसे होनहार और शानदार कलाकार आज हमारे बीच नहीं हैं। एक हादसे में उनका देहांत हो गया, लेकिन उनकी कला अभी भी हम लोगों के बीचोंबीच है, वह कलाकारी जिसे देख बड़े से बड़ा इंजीनियर भी चक्कर खा जाए, ऐसा सुनहरा सपने जैसा उसका आशियाना बनाना एक आश्चर्य की बात है।

परिवार और परिचय।
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नागौर (Nagaur) जिले के टांकला (Tankla) निवासी बलदेव प्रजापत ने हमारी संवाददाता खुशबू से बात करते हुए अपने द्वारा बनाया गया एक आशियाना और पानी की टंकी के विषय में विस्तार से बात की थी। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन लगने पर मुझे एहसास हुआ कि कुछ करना चाहिए।

बैठे-बैठे क्या करें,
करना है कुछ काम।
शुरू करो मकान को,
करना जग में नाम।
इस प्रकार बलदेव प्रजापत ने जग में नाम करने जैसा एक मकान बनाया,जिसकी ऊंचाई लगभग दो फीट है।उस मकान को बनाने में एक महीना लगा और उसमें लगाए गए पत्थर ग्राइंडर से काटकर छोटे-छोटे टुकड़े बनाकर तैयार किए गए थे। उस मकान को बनाने में लगभग बारह हजार रू खर्च हुए थे। उनके इस आशियाने को देखने के लिए बहुत दूर दूर से लोग आते हैं,और पचास हजार तक देने का ऑफर दिया। लेकिन बलदेव ने उनको स्वीकार नहीं किया।
उस मकान में बाहर बैठने के लिए लोन है कुर्सिया बनाई गई है। सामने दरवाजा है, जिसमें गेट लगा हुआ है। पानी की मटकी रखी हुई है, लोहे की रेलिंग है। खुशबू ने उस मकान की छत पर खड़े होकर बताया कि मेरे अंदर साठ किलो वजन है लेकिन इससे मकान का कुछ भी नहीं बिगड़ा।क्योंकि बलदेव ने कहा कि पांचक्विंटल वजन तक यह मकान सहन कर सकता है। शुरु में घर वालों ने काफी बातें की, लेकिन अब सब को अच्छा लगता है। मकान में लाइट फिटिंग है, और ऊपर मोटे मोटे अक्षरों में लिखा हुआ है बलदेव प्रजापति।

शिक्षा और काम।
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बलदेव जी ने बताया की मैंने आठवीं क्लास तक पढ़ाई की, उसके बाद में मैंने मिठाई बनानी शुरू की। अब शादी समारोह में मिठाई बनाने का काम करता हूं। एक हलवाई का और मकान बनाने से कोई संबंध के बारे में पूछने पर बलदेव कहता है कि मिस्त्री तो मुझे लॉकडाउन ने बनाया है।

पानी की टंकी।
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सरकार द्वारा बनाई जाने वाली शहरों में बड़ी बड़ी टंकियों जैसी बलदेव ने चार साल पहले एक टंकी बनाई। जिसकी ऊंचाई लगभग सात फीट है। और पानी की क्षमता 230 लीटर है। इस टंकी को बनाने से पहले बलदेव ने सरकार द्वारा बनाई जाने वाली टंकियों में मिस्त्री का काम किया और वहां से सीखा। खुशबू ने पानी की टंकी के ऊपर चढ़कर भी दिखाया जो बहुत मजबूत बनी हुई थी।इस टन्की को बनाने में बजरी सीमेंट और लोहे का प्रयोग किया गया है।
बलदेव की दादी बाली भी अपने पोते द्वारा बनाया घर देखकर बहुत खुश हुई। (Baldev Prajapat Passes Away but Art Alive)

ऐसे हुई मृत्यु…

नहीं रहा नागौर का होनहार लाडला, करंट लगने से मौ’त- आलीशान मकान और टंकी बना चौंकाया था सबको!

अपने विचार।
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कला छुपाए छुप न सके,
दुनिया देखने आए।
ऐसी कलाएं तो दुर्लभ है,
मन को छू छू जाए।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

इंटरव्यू देखें…

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