ताज होटल के हमले की पूरी कहानी बताने वाले सैनिक आज भी हैं दुश्मनों से लोहा लेने का तैयार

एनएसजी कमांडो केशव गुर्जर (NSG Commando Keshav Gurjar)

जिसकी मिट्टी में देश प्रेम की खुशबू, वह हमारा जन्म स्थान है। खून से जिसे सींचा है हमने, वह प्यारा राजस्थान है- मौ’त से बात करने वाला एनएसजी कमांडो।

दोस्तों नमस्कार! दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे जांबाज वीर फौजी की दास्तान सुना रहा हूं जो देश के लिए शहादत देने के लिए सदैव तैयार रहता है…

” कि ए मौत जरा रुक जा हम यहां कुछ करने के लिए आए हैं तो करके ही जाएंगे ” 

यह साल था 2008 और तारीख थी- 26 नवंबर, मुंबई के ताज होटल (Taj Hotel) में घुसे दस आतंकियों ने मुंबई को खून से रंग दिया था। इन हमलों में करीब 167 लोग मारे गए थे। इसमें नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (National Security Guard) की ओर से चले रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल रहे एनएसजी कमांडो केशव गुर्जर (NSG Commando Keshav Gurjar) ने 60 घंटे चले ऑपरेशन का पूरा हाल बताया। वह बताते हैं कि हमलों की खबर आने के बाद वे अपने ब्रिगेडियर ए.सी. रंगा (S.C Ranga) की अगुवाई में हरियाणा (Haryana)के मानेसर (Manesar) स्थित एनएसजी हेड क्वार्टर से 32 जवानों की टीम के साथ 27 नवंबर की सुबह मुंबई पहुंचे। मुंबई (Mumbai) में उनको गेटवे ऑफ इंडिया (Gate way of India) के सामने ताज होटल में घुसे आतंकियों को पकड़कर और होटल में रह रहे लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। होटल की ऊपरी मंजिलों में आग लग चुकी थी। बार-बार हथियार लेकर जाना भी बड़ा चैलेंज था। केशव ने बताया कि उनका ऑपरेशन 29 नवंबर की सुबह 3:00 बजे के बाद खत्म हुआ। आज भी मैं उसे 60 घंटे का एक दिन मानता हूं, क्योंकि बच्चे जवान बुजुर्गों की चित्कार हर तरफ से आ रही थी- प्लीज बचाओ। गोलियों की तड़-तड़ की आवाजें दहला देने भर के लिए काफी थीं, ऐसा लगता मानो कोई मेरे अपनों की छाती पर गोलियां बरसा रहा है। दिल कांप रहा था बल्कि आग की तरह सुलग रहा था और दहशतगर्दो के लिए जो कि ना तो हमको दिखाई दे रहे थे और ना ही हमको पता था कि कहां किस ओर से छुपकर गोलियां बरसा रहे हैं। लेकिन वे हम को देख पा रहे थे।

चीख-पुकार के बीच ऑपरेशन। 

उन्होंने बताया इस ऑपरेशन में 9 आतंकवादी मारे गए। जबकि सेना की तरफ से मेजर संदीप उन्नीकृष्णन व कमांडो गजेंद्र सिंह शहीद हो गए थे। एक आतंकवादी कसाब (Kasab) को बाद में नरीमन इलाके के पास से मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था जिसे बाद उसे फांसी की सजा दी गई।

3 घंटे की गोलीबारी के बाद जवानों ने ग्रेनेड फेंककर किचन में आग लगा दी।

उन्होंने बताया की हमने 6-6 कमांडो की 5 टीमें बनाई एक टीम सर्च कर रही थी। दूसरी लोगों को कमरों से सुरक्षित बाहर निकालने में जुटी थी और मैं तीसरी टीम में शामिल था। शाम करीब 5:00 बजे हमें आतंकियों की लोकेशन मिली। वे पीछे की तरफ कॉर्नर में बनी किचन में थे। करीब 3 घंटे की गोलीबारी में हमने ग्रेनेड फेंककर किचन में आग लगा दी। किचन से जवाबी कार्रवाई नहीं होने के कारण रात 9:00 बजे हम किचन में घुस गए। वहां दो आतंकी मृत मिले।

आप सेना में कब भर्ती हुए और क्यों हुए। 

केशव ने बताया कि मैं सेना में 2000 में भर्ती हुआ। भर्ती होने का कारण बताते हुए केशव बताते हैं कि कारगिल युद्ध (Kargil War)ने मुझे झकझोर कर रख दिया था इसलिए,,,,,, पूजे नहीं गए वीर तो वो कौन पंथ अपनाएगा।

दुश्मन की तोपों के आगे सीना को अड़ाएगा। 

उपरोक्त कविता की पंक्तियां बोलते हुए केशव गुर्जर ने राजस्थान की भूरी भूरी प्रशंसा की और बताया की राजस्थान (Rajasthan) की भूमि को खून से सींचा है हमने। यह भूमि तो वीरों की गाथाओ से भरी पड़ी है।

एनएसजी कमांडो का ठप्पा 

ताज होटल की सफलता के बारे में बताते हुए केशव ने बताया कि हर क्षण छाती पर दिख रहे एनएसजी कमांडो के बेल्ट से डबल जोश भर जाता था और देखते ही देखते आतंकियों के छक्के छुड़ा दिए और ताज होटल को उनके शिकंजे से छुड़ा लिया। जो कि पूरी दुनिया देख रही थी।

कानून व्यवस्था बदली जाए 

कमांडो ने बताया कि पूरी दुनिया के सामने दिख रहे आतंकवादी को पकड़ कर फांसी लगाने में इतना समय क्यों लिया। और उस पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए। ऐसी व्यवस्था को बदला जाए। ऐसे लोगों की पैरवी करने वाले संसद में ठहाके लगाते हैं और पूरी जिंदगी पेंशन लेते हैं।

कायर आतंकवादी। 

केशव ने आतंकवादियों को कायर और नीच करार देते हुए बताया कि उनको मुकाबला करना है तो हमसे करें। हम मरने के लिए तैयार हैं। हम मरने के लिए ही भर्ती हुए हैं। छोटे-छोटे बच्चों को और बुजुर्ग लोगों को निशाना बनाने से क्या हासिल होगा।

भारत वासियों को जगाने का आव्हान

केशव ने सभी नव युवकों और भारत के होनहारो से आव्हान किया है कि ऐसी व्यवस्था को बदला जाए और भारत को फिर से विश्व गुरु बनाया जाए। (NSG Commando Keshav Gurjar)

अपने विचार 

केशव तुम्हारी वीरगाथा, बार-बार पढ़ने को जी करता है। इसीलिए फौजी हरदम जिंदा, फौजी कभी नहीं मरता है।

पूरा इंटरव्यू देखें…

 

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