पाली का सूर्य मंदिर- मंदिर की स्थापना से लेकर जीर्णोद्वार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

Surya Mandir in Pali: सूर्य मंदिर, रणकपुर, देसूरी तहसील पाली।
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जब से सृष्टि रची गई,
भक्त और भगवान का मेल है।
हजारों साल पुराने मंदिर,
ना कोई यह बच्चों का खेल है।

हजारों साल पुराने मंदिर की सत्यता।
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दोस्तों नमस्कार!
दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसे देवस्थान में ले चलता हूं,जहां की ऐतिहासिक सत्यता को सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। मंदिर की स्थापना से लेकर जीर्णोद्वार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का यहां पर उल्लेख किया गया है।

स्थान तथा परिचय।
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Surya Mandir in Pali

मंदिर के पुजारी ने हमारा संवाददाता खुशबू से बात करते हुए बताया कि यह मंदिर 1427 ई में सूर्यवंशी महाराणा उदयपुर (Maharana Udaipur) ने बनवाया था। इसकी पूजा पाठ का कार्य हमारे परिवार द्वारा किया जाता है। मेरे परिवार की 21वीं पीढ़ी है जो इस कार्य में निर्बाध रूप से लगी हुई है। महाराजा मुकुल जी ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। अपने वंश की परंपरा के अनुसार यदि कभी किसी दिन सूर्य भगवान दिखाई नहीं दे तो, इस मंदिर में प्रतिस्थापित मूर्ति के दर्शन कर अन्न जल ग्रहण किया जा सके।
यह मंदिर 1427 ईस्वी में पूर्ण रूप से बनकर तैयार हो गया था, लेकिन लंबे अर्से के पश्चात इस मंदिर का जीर्णोद्धार पचास वर्ष पूर्व घनश्याम दास जी बिरला के द्वारा करवाया गया। लोगों की भीड़ कितनी रहती है, उत्तर देते हुए पुजारी जी कहते हैं कि कोविड के बाद में थोड़ी सी कमी आई है। पहले विदेशों से और देश के कोने कोने से दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता था। यह पहाड़ी का मनमोहक दृश्य है जो सब को अपनी ओर आकर्षित करता है। (Surya Mandir in PaliSurya Mandir in Pali)

मंदिर की स्थापना तथा समस्या।
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यह सूर्य मंदिर मेवाड़ और मारवाड़ की सीमा रेखा पर पहाड़ी के पर बना हुआ है। यह मंदिर एकलिंगजी ट्रस्ट के अंदर आता है जिसमें सिटी पैलेस भी है, उदयपुर महाराज के आधीन आज भी है।
यहां पर नेटवर्क की सबसे बड़ी प्रॉब्लम है। कहीं भी किसी भी प्रकार की सूचना देने के लिए डेढ़ किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।इसपर पुजारी जी ने कहा कि आपके चैनल के माध्यम से सरकार से प्रार्थना करता हूं कि इस अनुपम, मनमोहक, सूर्य मंदिर की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए यहां पर यह सुविधा जल्द उपलब्ध करवाने की कृपा करेंगे।
पुजारी जी ने कहा कि यह जोधपुर और उदयपुर का राष्ट्रीय राजमार्ग है। यहां से पंद्रह किलोमीटर तक कोई भी गांव या शहर नहीं है। इसलिए यहां पर नेट की सुविधा होना बहुत ही आवश्यक है। सूर्य भगवान की मूर्ति की फोटो लेने के उत्तर में पुजारी जी कहते हैं कि पहले भी एक बार मूर्ति चोरी हो चुकी है। लोग बाग सेल्फी लेते हैं अर्थात कई प्रकार की परेशानियों से गुजरना पड़ता है, इसलिए दर्शन कर सकते हो फोटोग्राफी नहीं।

विशेषता।
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मंदिर की विशेषता के बारे में पूछने पर पुजारी जी कहते हैं कि यह सूर्य भगवान की सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होने जैसा ही दृश्य इस मंदिर में प्रतिस्थापित किया गया है जो अपने आप में एक विशेष है। इस मंदिर का निर्माण घट के चुने में किया गया है, जो अपने आप में एक विशेष है।
अन्य।
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मंदिर प्रांगण में यज्ञ का स्थान गोबर का लेप करके तैयार किया गया है। जो बहुत ही पवित्र माना जाता है। खुशबू ने मंदिर की सफाई के बारे में बढ़-चढ़कर व्याख्यान किया। अतः लोगों से विनती है कि जहां भी जाएं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

अपने विचार।
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विश्वास मन की शक्ति है,
विश्वास से समाज है।
विश्वास ही भक्ति है,
इसी से कल और आज है।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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