राजस्थान री मायड़ भौम रा वीर सम्राट पृथ्वीराज चौहान री वीरगाथा

राजस्थान (Rajasthan) री मायड़ भौम रै ऊपर कई वीरा रो जलम होयो जिका आपरै छात्र धर्म रे खातर खून री नदियां बहा दी। एडा़ अनेकों वीर क्षत्रिय राजाओं में एक हा सम्राट पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chauhan)। अजमेर री चौहान शाखा रो राजपुत जिके रो जन्म 12 वी शताब्दी में अजमेर रे राजा सोमेश्वर रे घर हुओ। पूत रा पग तो पालने में दिख जावे है, बाल्यकाल सूं ही पृथ्वीराज बड़ौ पराक्रमी हो अर भावी सम्राट रा सुलछण बाळपण में परभावित करण लागा। ग्यारह बरस री अवस्था मे ही पृथ्वीराज रे कांधा माथै राज्य रो भार आ ग्यो। पर केवे नी के वीर री कोई उमर कोनी हुवै। पृथ्वीराज ग्यारह बरस री छोटी आयु में ई राज्य री देखभाल अर उवे रो विस्तार करणै री नीति बणायी।थोड़े ही समै में पृथ्वीराज भारत वर्स रौ सम्राट बण’र दिल्ली रे सिंघासन ऊपर आरूढ़ हुयौ।

राजपुताना अर गुजरात माथै विजय पताका लहरा परा पृथ्वीराज अब भारत रो सबसूं बड़ो दरबार बण’ र दुनिया सांम्ही आयौ। पृथ्वीराज चौहान तलवार रा धणी तो हो ही साथ ही साथै ई प्रेम रो पुजारी भी हो। पृथ्वीराज अर संयोगिता री प्रेम कहानी राजस्थान रै कोने कोने में गूंजे है। संयोगिता कन्नौज रे शासक जयचंद्र री बेटी ही अर पृथ्वीराज री प्रियसी। आपसी मतभेद रै कारण जयचंद अर पृथ्वीराज रे बीच जुद्ध री स्थिति बन्योडी रेवती अर इये आग में घी रो काम संयोगिता रे प्रेम प्रसंग कीन्हो। जयचन्द आपरी बेटी रे वास्ते स्वयंवर रौ आयोजन कियो पण उण स्वयंवर नैं पृथ्वीराज ने कोनी नूंत्यौ।

पृथ्वीराज रो अपमान करण खातर पृथ्वीराज री एक प्रतिमा किले रे प्रवेश द्वार पर लगा दी। पृथ्वीराज ((Prithviraj Chauhan)) ओ अपमान सहन नहीं कर पायौ अर बहरूपियों रूप धारण कर कन्नौज पहुच ग्यो। संयोगिता भी वरमाला सभी स्वयंवर में आयोडा राजावां ने छोड़ पृथ्वीराज री प्रतिमा ने पहना दी, इते में भीड़ चिरतो हुओ पृथ्वीराज संयोगिता रो हरण कर अजमेर ले आयो अर संयोगिता सू विवाह रचायो।

Prithviraj Chauhan

कन्नौज रो राजा आपरो इतो बड़ो अपमान सहन नीं कर सक्यौ पण करे तो करे कांई? पिरथीराज री सगती आगै उवे रो बस नीं चाल्यो। जयचन्द पृथ्वीराज सू प्रतिकार वास्ते दिन रात ईस्के में हो,अचाणचक उणनैं गजनी रे शासक मोहम्मद शहाबुद्दीन गौरी री याद आई। गौरी काफी वर्षा सू भारत और आक्रमण करने री तैयारी में हो, वा एक दो बार कोशिश भी करी पण उण आपरा पग लारै कर लिया ।

जयचन्द ओ मौको हाथ सू नी जा’ण देणौ चावतौ। वा गौरी ने पृथ्वीराज पर आक्रमण करने रो नूंतौ भेज दियो। गौरी जेडो लालची शासक एडौ़ ई मौको ढूंढ रियो हो कि कद घर को भेदी मिले अर म्हे भारत पर आक्रमण कर उवे री धन दौलत ने लूट लूं। अंग्रेजी बरस 1191 में तराईन रे मैदान में गौरी अपनो डेरो जमायो अर दूजी तरफ़ पृथ्वीराज आप री सेना ले युद्धभुमि में आए पुगो। गौरी ने जयचन्द अर खयड री सेना पर विश्वास हो पण नियति ने कीं और ई मंजूर हो, जुध सरू हुयौ पण देखते ही देखतां पृथ्वीराज काल रो रूप धारण कर टूट पड्यो।

गौरी सी सेना रा पांव उखड़ ग्या अर गौरी ने बंदी बना पृथ्वीराज रे सामने खड़ो कर दियो। गर्दन झुका गौरी पृथ्वीराज ((Prithviraj Chauhan)) रे कदमा में आए गिरो अर गोरी गाय बन जान री भीख मांगण लागो। पृथ्वीराज उसूला रो पक्को हो शरण आन रे बाद दुश्मन ने भी माफ कर देनो उ रो उसूल हो अर पृथ्वीराज मुहम्मद गौरी ने माफ कर सही सलामत गजनी भिजवा दियो। इतिहास रे पन्ना मा पृथ्वीराज री ओ गलती पूरे भारत वर्ष ने भौगणी पड़ी। इन एक गलती रे खातर भारत पर मुसलमान साम्राज्य रो आधिपत्य होयो जो अंग्रेजा रे आगमन तक बण्यो रेयो। खैर पृथ्वीराज सू जान री भीख मांग गौरी गजनी आयगौ। पण मन ही मन पृथ्वीराज सू बदलो लेवण री तेवड़ दी। उवे ने ओ समझ आ ग्यो के पृथ्वीराज ने युद्ध रे मैदान में हराणौ असंभव है।अब छल रे सहारे ही पृथ्वीराज ने पराजित कर सका। गौरी पराजित होन रे बाद युद्ध री तैयारी में जुट ग्यो पण ईया पृथ्वीराज जीत रे मद मा चूर हो संयोगिता रे सौंदर्य में डूब ग्यो।

एक बरस बाद 1992 ईसवी मा गौरी एक बार फिर तराईन रे मैदान में आए अपनो डेरो जमायो, इये बार गौरी पूरी तैयारी कर आयो हो। पृथ्वीराज (((Prithviraj Chauhan))) तक जब ओ खबर मिली तो वा आपरे सेनापति ने तराईन रे मैदान भेज दिया। पण गौरी इये बार छल रो चोळौ प्हैर आयो। वा संदेशो भेज्यो की मैं तो संधि कर्ण आयोडो हूँ। गजनी रो शासक पृथ्वीराज सू संधि करणो चावे है, मित्रता करणो चावे है तो युद्ध करने री कई जरूरत है। पृथ्वीराज या छल में फंस ग्यो अर समझौतों करन गौरी के पास पहुंच ग्यो। गौरी अपनी नीति सू पेला ही अपने सैनिका ने छुपाए बैठो हो अर ज्यूँ ही पृथ्वीराज संधि करने गौरी के शिविर आयो गौरी हमले रो आदेश दे दियो।

अचानक होयै इये आक्रमण में राजपूतां रा पांव उखड़ गया अर पृथ्वीराज ने हार रो समनो करणो पड्यो। गौरी पृथ्वीराज ने कैद कर अपने साथ गजनी लौट ग्यो अर अजमेर ने पुरो तहस नहस करणे रो आदेश दे दियो। मुसलमान सैनिक हिन्दू जनता लरा टूट पड़ी अर अजमेर में मौत रो तांडव शुरू होयो। इतिहास म्हा कहानियां है कि पृथ्वीराज री मृत्यु काबुल में होई जेथ पृथ्वीराज री समाथि बन्योडी है।

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