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राजस्थान

राजस्थान क जलाल बुबना री प्रसिद्ध कहाणी, 60 साल का राजा बना खलनायक

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सिंध के नवाब के 2 बेटियां थी बूबना और मुमना।मुमना सीधी-सादी थी, घर का काम करती रहती थी और बूबना थोड़ी विशेष थी,चंचल थी।नवाब चाहता था कि वह बूबना की शादी एक ऐसी जगह की करे जहां उसको सुकून मिले अर्थात उसके मन से की जाए। नवाब ने अपने लोगों को बुलाया और आदेश दिया कि ऐसा वर ढूंढ के लाओ जो मनमाफिक हो बूबना के और साथ ही बूबना का चित्र जारी कर दिया। नवाब के आदमी एक राज्य से दूसरे राज्य घूमते रहे और अंत में थटाभखर पहुंचे।

थटाभखर में मृगतामायची नाम का का राज था उसका एक भांजा था जिसका नाम जलाल था।नवाब के लोगों ने जलाल को थोड़ा अलग ले जाकर बूबना का चित्र दिखाया और पूरी कहानी बतायी।जलाल चित्र को देखकर मोहित हो गया और शादी के लिए राजी हो गया।जलाल के बारे में सुन तस्वीर देख सिंध का नबाब भी बहुत खुश हुआ और उसने काजी को बुलाकर थटाभखर भेज दिया जलाल और बूबना की शादी तय करने। उधर बूबना ने भी जलाल का चित्र देख उसे उपने होने वाले पति के रूप में स्वीकार कर लिया।

शादी की तैयारियां होने लगती है और काजी थटाभखर पहुंचता है और जलाल के मामा मृगतामायची को वह तस्वीर दिखाता है और तस्वीर देखकर मुर्ग वह मालदेव हो जाता है और वह काजी को कहता है कि इससे तो मैं शादी करूंगा।मामला सब बिगड़ गया, एक साठ साल का वृद्ध जिसका शरीर भी लड़खड़ाने को है, एक युवा मिरगानैंणी से ब्याह की सोच रहा।बादशाह था, धन की कोई कमी नहीं थी, काजी को कुछ लालच देकर अपनी तरफ कर दिया और काजी ने बूबना की शादी मृगतामायची से तथा मूमना की जलाल से करवा दी।जलाल को यह सब ठीक नहीं लगा, लेकिन वह विवश था, बादशाहत उसके सामने बार बार आड़ी आ रही थी। ख़ैर बारातें दोनों साथ आयीं।एक नौजवान छोरा तो एक बूढ़ा दूल्हा।सब आश्चर्य में थे।काजी से पूछा गया, काजी ने थी जैसी बात बतायी।नवाब को बहुत गुस्सा आया।

लेकिन वह कर कुछ भी नहीं सकता था वह काजी को दं’ड दे सकता था लेकिन बादशाह के ऊपर उसका राज नहीं चल सकता था क्योंकि जिंदगी नवाब की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह हट जा पर के मृगम आईची को बिना शादी किए जाने दे। उसने दिल पर पत्थर रखकर शादियां कर दी अपनी दोनों बेटियों की। बराती वापस गई और जब वह बना को इस बात का पता चला तो वह आग बबूला हो गई बूबना निश्चय कर लिया की शादी तो वे जलाल से ही करेगी और अपनी दासियों को बुलाया और कहा कि जलाल की त’लवा’र को लेकर आएं और रस्म पूरी करें।बादशाह मृगतामायची बूबना के महल में कई बार आया पर हर बार बूबना ने कोई न कोई बहाना बनाकर उसे टाल दिया।

क्योंकि उसका पति तो जलाल था और शादी भी जलाल के खांडे से ही की थी सो उस हिसाब से तो वह जलाल की ही बेगम थी।पर दोनों ने परस्पर बात तक नहीं की। आखिर बूबना दासियों के सहयोग से और दोनों आपस में प्रेम मिलन करने लगे।एक दिन जलाल बूबना के कक्ष में था और बादशाह अचानक वहां आ गया। बूबना ने अपनी दासी के सहयोग से जलाल को पास ही रखे फूलों के ढेर में छुपा दिया।बादशाह महल में नजर डाल निरिक्षण कर रहा था और फूलों के ढेर में छुपे जलाल की डर के मारे सांसे तेज चलने लगी जिससे फूल हिलने लगे।और यह दोहा वहीं से निकलता है- “भंवरा कलि लपेटियो, कायर कंपै कांह । जो जीयो तो जुग समो, मुवो तो मोटी ठांह अर्थ है कि भंवरा कलि में फंस गया है, किंतु बुजदिल काँप क्यों रहा है। डरने से हो भी क्या जाएगा? जिन्दा रहा तो कली का अनुभव लेगा , म’र गया तो क्या हुआ।सुन्दर जगह तो म’रेगा कम से कम।

बादशाह ने कई प्रयत्न किए कि कैसे ही करके जलाल जो है वह बूबना से दूर रहे। लेकिन प्रेम है, प्रेम दीवारें लांघ भाग जाता है।तो वह कभी सफल नहीं हो पाया।बादशाह ने एक दुर्ग के चारों और पानी भर दिया और जलाल को वहां कैद कर दिया वहां रखा लेकिन जलाल जो है उससे मिलने के लिए वहां से निकल आता था जो उस को रोकते थे उनसे बैठ जाता था।

बताते हैं कि जब राजा बिल्कुल परेशान हो गया तो उसने अपनी रानी से पूछा कि जलाल और बूबना की कहानियां प्रसिद्ध हुई जा रही है बताओ इनका क्या किया जाए? जलाल को कैसे भी करके खत्म करें।योजना बनी।मृगतामायची जलाल को शिकार खेलने के लिए ले गया और उधर अपने आदमी भेजकर महल में खबर फैला दी कि शिकार खेलते खेलते जलाल घोड़े से गिर कर म’र गया। पुरे महल में रोना धोना शुरू हो गया। बूबना को भी पता चला तो उसके मुंह से बस यही निकला- “हाय जलाल!” और बूबना गुजर जाती है।

इस दृश्य का जब जलाल को ध्यान लगता है, वह भी गिर जाता है और दोनों दुनिया छोड़ जाते हैं।राजा यह सब देखकर आश्चर्य में पड़ जाता है और अपने लोगों को हुकम देता है कि यह दोनों सच्चे प्रेमी थे इनकी एक ही खबर बनाई जाए और बादशाह क’ब्र पर जाकर फूल चढ़ाते हुए झुककर कहता है कि मुझसे गलती हो परवरदिगार मुझे माफ करो!

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