देश का वह पहला मंदिर जहां अवतरित नौ देवियां झूलती थीं झूला- आज भी मौजूद है वृक्ष

आज हम आपको राजस्थान (Rajasthan) के राजसमंद (Rajasmand) जिले के खमनोर (Khamnor) क्षेत्र के पास स्थित पपलाज माता (Paplaj Mata Mandir) यानी वडल्या माता (Vadalya Mata) के मंदिर के बारे में बताएंगे। इस मंदिर की कहानी अपने आप में खास है। बताया जाता है कि मां के नौ अवतार यानी नौ देवियां इस मंदिर में झूला झूलती थीं।

11वीं शताब्दी का है मंदिर

मंदिर की स्थापना 11वीं शताब्दी में हुई थी। बताया जाता है कि विक्रम संवत 1016 में मंदिर की स्थापना हुई थी। मंदिर को मेवाड़ (Mewar) के राजा आलू अल्लाह (Aalu Allah)ने बनवाया था।

वट वृक्ष की अपनी कहानी

Paplaj Mata Mandir

पपलाज माता के पास एक वट वृक्ष है कहा जाता है कि यह धरती का पहला वट वृक्ष है। यहीं से मेवाड़ के गवरी नृत्य (Gavri Dance) की भी शुरुआत हुई थी। ऐसा बताया जाता है कि अकाल के समय देवी शक्तियों ने पाताल से राजा वासु के उद्यान से युद्ध करके वट वृक्ष को पृथ्वी पर लाकर यहीं पर जगह दी थी। इसके  साथ ही कहा जाता है कि उस समय पानी की कमी थी और देवियों ने दूध और दही से उसे वट वृक्ष की सिंचाई की थी। सभी नौ शक्तियां इस वट वृक्ष के नीचे झूला झूला करती थीं। Paplaj Mata Mandir)

गवरी नृत्य की हुई शुरुआत

पपलाज माता के वट वृक्ष सहित गवरी नृत्य की भी शुरुआत मानी जाती है। गवरी नृत्य की शुरूआत भी पीपलाज माता के लाते हुए दरजू कादरी का खेल दिखाया गया था। बाद में इसी का नाम गवरी नृत्य पड़ा। राजस्थान में बहुत मशहूर है।

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