श्याम सुंदर पालीवाल जिन्होंने गांव को समर्पित कर दिया जीवन, प्रकृति और बेटियों के प्रति प्रेम की विदेशों में चर्चा

कुछ लोग होते हैं जो आजीवन अपने लिए नहीं बल्कि समाज, प्रकृति, गांव के लिए जीते हैं, उनकी भलाई के लिए अपना सबकुछ लगा देते हैं। ऐसे ही एक समाजसेवी की आज हम आपको कहानी बताएंगे जिन्होंने लोगों की सेवा करने के लिए अपना तन-मन-धन सब कुछ समर्पित कर दिया।

हम बात कर रहे हैं श्याम सुंदर पालीवाल की जो राजसमंद के ऐतिहासिक मॉडल गांव पिपलांत्री के सरपंच रह चुके हैं। समाज सेवा के क्षेत्र में उनका काम उल्लेखनीय हैं, उनके काम के लिए गृह मंत्रालय और राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

क्या है उनका खास काम

श्याम सुंदर पालीवाल के पिपलांत्री मॉडल गांव की बात करें तो उन्होंने जल संग्रहण, पर्यावरण संरक्षण जैसी विभिन्न योजनाओं के तहत बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नवाचार जैसे अभियान की शुरूआत बिना किसी सरकारी सहायता के गांव से की।

गांव का मानते हैं एहसान

श्याम सुंदर पालीवाल की बात करें तो वह कहते हैं कि उनका गांव उनके लिए पुश्तैनी गांव है। पालीवाल की कई पीढ़ियां इसी गांव में रह रही चुकी है। उनका कहना है कि जब गांव में उन्हें इतना दिया है तो वह गांव का कर्ज उतार रहे है।

जंगल और वन जीवन बचाना एकमात्र लक्ष्य

श्याम सुंदर पालीवाल की बात करें तो उनके मॉडल के तहत वे आगे भी जनता के लिए कई अन्य काम करना चाहते हैं। वह जंगल, वन जीवन को बचाना चाहते हैं। वह कहते हैं कि औद्योगिकरण के चलते इंसान लगातार जंगल को काट रहा है और जंगल को काटकर विकास की बात करना बेमानी है। वह कहते हैं कि सरकार को औद्योगिकरण करना चाहिए लेकिन लगातार इस तरीके से जंगलों को काटना भी गलत है।

निधि योजना से मिला बेटियों को सम्मान

श्याम सुंदर पालीवाल ने गांव के सरपंच बनने के बाद एक बेहतरीन योजना शुरू की थी, उन्होंने किरण निधि योजना की शुरुआत की थी। आपको बता दें कि श्याम सुंदर के यहां बेटी का जन्म हुआ इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी का नाम किरण रखा था।

उसके जन्म पर उन्होंने गांव में 111 पेड़ लगाए और बाद में इस योजना शुरू की शुरुआत की थी। योजना के तहत गांव में अब जिस घर में बेटी पैदा होती है उस घर के व्यक्ति द्वारा गांव में 111 पेड़ लगाए जाते हैं।

इसके अलावा पैदा होने वाली बेटी के बैंक खाते में ₹21000 की राशि जमा करवाई जाती है। साथ ही उस बेटी से फॉर्म भरवा कर यह वचन लिया जाता है कि बच्ची का विवाह 20 साल से पहले नहीं किया जाएगा।

श्याम सुंदर के बारे में विदेशों में होती है पढ़ाई

श्याम सुंदर पालीवाल के जनहित के लिए की गए बेहतरीन कार्य के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा डेनमार्क में श्याम सुंदर पालीवाल के पिपलांत्री मॉडल के बारे में पढ़ाया जाता है। बच्चों को उनके द्वारा किए गए बेहतरीन कार्यों के बारे में जानकारी दी जाती है।

गांव में बेरोजगारी है शून्य

श्याम सुंदर पालीवाल की बात करें तो उन्होंने सिंचाई के लिए 4500 डैम बनवाए हैं, उन्होंने सरकारी जमीन को भी भूमाफिया से छुड़वा करके एलोवेरा आंवला जैसे पेड़ लगाकर के पर्यावरण को शुद्ध करने का काम किया है। इसके सात ही एक चौंकाने वाली और बेहतरीन बात यह है कि इस गांव में एक भी व्यक्ति बेरोजगार नहीं है।

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