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सवाई माधोपुर

हजार फिट ऊपर बने चौथ माता मंदिर की कहानी, माता ने स्वप्न में आकर दिए थे राजा को दर्शन

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Chauth Mandir

24 अक्टूबर को पूरे देश भर में करवा चौथ का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया गया। करवा चौथ के त्यौहार के दिन भारतीय संस्कृति के अनुसार पत्नी अपने पति की लंबी आयु की कामना करते हुए पूरे दिन का निर्जला व्रत रखती है। शाम को चांद के निकलने के बाद इस व्रत को तोड़ा जाता है और इसके बाद पत्नी पानी व भोजन ग्रहण करती हैं। आज हम आपको चौथ माता की कहानी और उसके मंदिर के बारे में बताएंगे,राजस्थान के सवाई माधोपुर (Sawai Madhopur) से लगभग 35 किलोमीटर दूर चौथ का बरवाड़ा (Chauth Ka Barwada)  है। चौथ का बरवाड़ा में चौथ माता का एक बेहतरीन विशाल मंदिर है। अरावली पर्वतमाला (Aravalli Partvatmala) की श्रंखला की चोटी पर यह मंदिर 1000 फिट ऊपर मौजूद हैं।

राजा भीम ने करवाया निर्माण

चौथ माता मंदिर का निर्माण 1451 में महाराज भीम (Maharaj Bhim) ने करवाया था। राजपूताना राज शैली की सफेद संगमरमर पत्थरो (White Sangmarmar Stone) से यह मंदिर बना हुआ है। मंदिर में चौथ माता के अलावा गणेश जी (Lord Ganesh) की प्रतिमा भी मौजूद है। इस वजह से इस मंदिर को चौथ गणेश के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में चौथ माता सरोवर (Chauth Mata Sarovar) भी है, चौथ माता मंदिर में आने वाले लोग सरोवर में डुबकी लगाते हुए नजर आते हैं। कहते हैं कि जिस वक्त मंदिर में आने वाला वक्त इस सरोवर में डुबकी लगाता है तभी उसकी यात्रा पूर्ण होती है। 1463 में यहां विजल की छतरी और तालाब का निर्माण कराया गया था।

Chauth Mata Mandir

यह है इतिहास

चौथ माता मंदिर के इतिहास की बात करें तो किंवदंती के अनुसार राजा भीम को देवी चौरू माता ने सपने में दर्शन दिए थे। उन्हें मंदिर बनाने का आदेश भी दिया था। कहते हैं कि एक समय राजा भीम सिंह बरवाड़ा में शाम के समय शिकार (Animal Hunting) पर जा रहे थे। तभी उसी वक्त उनकी पत्नी रानी रत्नावली (Rani Ratnavali) ने उन्हें रोका लेकिन राजा भीम ने अपनी पत्नी को कहा कि जब राजा घोड़े पर चढ़ जाता है तो शिकार के बाद ही वापस लौटता है। जिसके बाद राजा भीम सैनिकों के साथ जंगल में शिकार के लिए चले गए। शाम के समय सैनिकों और राजा भीम को एक हिरण (Deer) दिखाई दिया। इसके बाद सभी लोग उसे हिरण का पीछा करने लगे। लेकिन रात में अंधेरे की वजह से हिरण गायब हो गया और सैनिक भी राजा की राह से भटक गए। जिसके बाद राजा भीम को प्यास लगने लगी और वह पानी के लिए भटकने लगे। पानी ना मिलने की वजह से राजा बेहोश हो गए और जमीन पर गिर पड़े। जिसके बाद भी उन्हें एक प्रतिमा दिखाई थी और एक छोटी कन्या जंगल में अकेली खेलती नजर आई। राजा भीम ने उस कन्या से पूछा कि आपके माता-पिता कहां है। तब देवी का रूप धारण करने वाली कन्या ने जवाब दिया कि राजन क्या तुम्हें पानी मिल गया, क्या तुम्हारी प्यास बुझी या नहीं और इसके बाद बच्ची का रूप धारण करने वाली देवी रूप में आ गई। राजा ने हाथ जोड़ते हुए कहां की है आदिशक्ति अगर आप मुझसे प्रसन्न है तो हमारे राज्य में ही हमेशा निवास करना। उसके बाद इस मंदिर का निर्माण कराया गया और 500 साल पुराने मंदिर (500 Years Old Temple)  में आज हजारों लाखों लोग दर्शन के लिए आते हैं।

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