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बीकानेर

श्री कोलायत झील जिसे कहा जाता है राजस्थान का हरिद्वार, कपिल मुनि ने यहां की थी तपस्या

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राजस्थान में कई जिले हैं जिनका अपना सौंदर्यशास्त्र है और इन्हीं जिलों में श्री कोलायत का नाम भी प्रसिद्ध है। यह झील बीकानेर से 50 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। बताया जाता है कि इस झील का निर्माण 52 घाटों से हुआ था यहां कपिल मुनि ने तपस्या की थी।

कपिल मुनि प्राचीन भारत के एक प्रभावशाली मुनि थे जिन्हें प्राचीन ऋषि कहा गया है। इन्हें सांख्यशास्त्र के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है। कई लोग उन्हें नास्तिक मानते हैं, बिल्कुल नास्तिक लेकिन गीता में इन्हें श्रेष्ठ मुनि कहा गया है। उन्होंने विकासवाद का प्रतिपादन किया और संसार को एक क्रम के रूप में देखा. “कपिलस्मृति” उनका धर्मशास्त्र है और कपिलवस्तु जहाँ बुद्ध पैदा हुए थे, कपिल के नाम पर बसा नगर था और सगर के पुत्र ने सागर के किनारे कपिल को देखा और उनका श्राप पाया तथा बाद में वहीं गंगा का सागर के साथ संगम हुआ।

इससे मालूम होता है कि कपिल का जन्मस्थान कपिलवस्तु और तपस्याक्षेत्र गंगासागर था। इस प्रकार 700 वर्ष ई.पू. कपिल का काल माना जा सकता है। बता दें कि झील के पास हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन आचार्य कपिल मुनि का मेला लगता है। कोलायत झील के पास कार्तिक पूर्णिमा को आचार्य कपिल मुनि का भरने वाला मेला जांगल प्रदेश का सबसे बड़ा मेला माना जाता है।

यहां मान्यता हैं कि यदि आप हरिद्वार न जाएं तो आप कोलायत झील भी जा सकते हैं। यही कारण हैं कि कोलायत के नाम के ‘श्री’ लगता है। इस झील पर कई प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा रहता है जिनके कलरव का सुन्दर नजारा आप अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं। कपिल सरोवर में नाव की सवारी की सुविधा है। शाम के समय सुर्यास्त का नज़ारा देखने योग्य हैं।

इसी कोलायत झील से संदर्भित मान्यता यह भी है कि यहां चारण जाति के लोग नहीं आते क्योंकि इस तालाब में चारण समुदाय की आराध्य देवी श्री करणी माता का पुत्र डूब गया था और मान्यता है कि जब माता ने धर्मराज के आगे अपने बेटे को जिवित करने का प्रश्न रखा तो वे नहीं माने, उसके बाद में श्राप दे दिया और यह हुकुम भी कि मेरे कुल के लोग यहां नहीं आयेंगे।

कैसे पहुंचे?

आप अगर कभी घूमने जाएं तो रेल, बस, फ्लाइट से बीकानेर पहुंच जाएं और फिर बीकानेर से बस या टैक्सी द्वारा कोलायत पहुंच सकते हैं। कोलायत बीकानेर-जैसलमेर हाइवे पर है, लेकिन थोड़ा अंदर आया हुआ कस्बा है।

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