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सीकर

सीकर की प्लांट बेबी मशहूर अभिलाषा रणवा जो लगा चुकी है लाखों पौधे, ग्रीन गर्ल की अनोखी कहानी

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आज मैं आपको जिनके बारे में बताने जा रहा हूं उनका नाम है अभिलाषा रणवा। अभिलाषा का जन्म 4 मार्च 1993 को सीकर जिले के धोलपालिया गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। स्व. मनसुख जी रणवा की पुत्री अभिलाषा ने माता दुर्गा देवी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी उम्र से बड़ा होने का परिचय दिया।

15 अक्टूबर 2011 को पिताजी का देहांत हुआ उस समय अभिलाषा की उम्र मात्र साढ़े अठारह वर्ष थी। पापा का सपना था कि बेटी की शादी में गाड़ी दूं। इसलिए उन्होंने बेटी के नाम से एक एफडी करवाई थी। अभिलाषा अपने छोटे भाई अभिषेक और मां दुर्गा देवी के साथ बहुत सदमे में आ गए। उस समय पिता द्वारा चलाए गए पर्यावरण के प्रति लगाव ने इस परिवार को सहारा दिया और आज एक मिसाल बन गई।

मम्मी पापा और हम दो बच्चे,  वो थे कुशल पर हम दो कच्चे। पापा ने जब किनारा किया,  तो पर्यावरण ने ही हमको सहारा दिया।

“होनहार बिरवान के होत चिकने पात” अभिलाषा रणवा ने उक्त लोकोक्ति को चरितार्थ कर दिखाया और गाड़ी के लिए कराई गई एफडी को तुड़वा कर सीकर जिले में जगह जगह गार्डन तैयार करवाएं। समाज में यह संदेश पहुंचाया की गाड़ी नहीं गार्डन चाहिए और एक दर्जन से ज्यादा गार्डन सरकारी जगहों पर तैयार करवा कर समाज में एक सकारात्मक संदेश पहुंचाया। बाल गृह, समाज कल्याण भवन, स्मृति वन, जेल, कॉमर्स कॉलेज, साइंस कॉलेज, अस्पताल, स्कूल, पार्क एवम् अनेक सरकारी महकमो की जगहों पर तरह-तरह के पेड़ लगाए जिनमें छायादार फलदार और औषधीय पौधे अधिक मात्रा में हैं।

पापा की रुचि पेड़ पौधों में थी इसलिए उनके साथ अभिलाषा को भी 10 वर्ष की उम्र से ही पर्यावरण के प्रति अधिक लगाव हो गया था और इसी लगाव के कारण अपने पापा की स्मृतियों को संजोए रखने हेतु तन मन धन से अभिलाषा ने पेड़ पौधों को ही अपनी जिंदगी बना लिया।

अभिलाषा का कहना है की व्यक्ति को अपनी जिंदगी में कम से कम चार पेड़ अवश्य लगाने चाहिए। (i) अपने कपड़ों और पुस्तकों के लिए। (ii) अपने जीवन में फर्नीचर के लिए। (iii) अपनी जिंदगी को जीने हेतु ऑक्सीजन के लिए। (iv) अपनी जिंदगी का आखिरी पड़ाव अर्थात दाह संस्कार हेतु।

Plant Baby के नाम से मशहूर अभिलाषा रणवा ने राजस्थान में स्कूल ,कॉलेज ,उद्यान अर्थात निजी और सरकारी जगहों पर लाखों पेड़ लगाकर अपने जिले का नाम रोशन किया है।

सुख समृद्धि सांसों का स्रोत, कच्ची उम्र ना हो कोई मौत। पेड़ों का सब जाल बिछाओ, जन जन तक यह संदेश पहुंचाओ।

इसी मकसद के साथ अभिलाषा ने गांव ढाणी खेत खलियान से लेकर बाग बगीचे स्कूल कॉलेज सभी जगहों पर पेड़ों का जाल बिछाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

शत प्रतिशत बीमारी में काम करें, वह गिलोय ,अमृता कहलाती है। एक पंथ दो काज सवारे, हरियाली से मन बहलाती है।

औषधिय पौधों में गिलोय का अपना एक अलग महत्व है। अभिलाषा ने हजारों परिवारों को गिलोय पहुंचाकर इस करोना बीमारी से निजात दिलवाई है। अपनी टीम के साथ अभिलाषा वर्ष में दो बार झुंझुनू सीकर नागौर जैसलमेर बाड़मेर आदि जगहों पर और विशेष तौर पर मरू क्षेत्रों में जनजागृति हेतु इस धरती मां को हरि ओढ़नी उढ़ाने का संदेश देती है।

लाल चुनर की सोची नहीं, मां को हरी चुनर उढानी है। हे मां तेरा कर्ज उतारू कैसे, हर घर यह बात पहुंचानी है।

प्रत्येक व्यक्ति को अपने जन्मदिन पर शादी की सालगिरह पर या अन्य उत्सव पर वृक्ष लगाने के कार्य को एक आदत में शुमार कर दिया। बच्चों के जन्म पर या शादी समारोह में लोगों ने दहेज की जगह वृक्ष बांटने के कार्य को अंजाम देना शुरू कर दिया। अपने विचार शेयर करते हुए अभिलाषा कहती है,,,,,,

मैं तो एक कंगुरा हूं, नींव तो मेरी मम्मी है। भाई मेरी ताकत है, सबकी माता यह जमीं है।

आप समाज को क्या संदेश देना चाहती हैं के जवाब में अभिलाषा कहती है कि आज बच्चों में बहुत तनाव है जिस को हल्के में मत लो । यह बहुत बड़ी बीमारी है इसलिए इसका एक ही उपाय है और वह है पर्यावरण। बच्चों को पर्यावरण से जोड़ो। हमसे पर्यावरण हैं और हम पर्यावरण से हैं।

धन भी छोड़ो भवन में छोड़ो, तनाव का कारण मत छोड़ो। पेड़ पौधों का जखीरा छोड़ो, हो सुख समृद्धि जब तन छोड़ो।

अपने भाई बहनों से अलग हटकर कार्य करने की रुचि ने सभी का मन मोह लिया। बाल्यावस्था से ही पेड़ पौधों की तरफ लगन ने अभिलाषा को आगे बढ़ने का मौका मिलता रहा। पेड़ पौधों से बतियाना अभिलाषा की दिनचर्या बन गया।अभिलाषा के स्पर्श मात्र से पौधों की रौनक बढ़ जाती है।

एक अभिलाषा है तो बाग बगीचे हैं, पर्यावरण सबसे ऊपर बाकी सब नीचे है।

सर्दी गर्मी मौसम सारे, खुशियां ले आते हैं द्वारे।

पक्षियों का चहचहाना बच्चों का खिलखिलाना।एक अभिलाषा की अभिलाषा ने यह सब जाना।

लेखिका और समाज सेवा
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प्रतिभाशाली व्यक्तित्व की धनी अभिलाषा एमए (MA) मैं अध्ययनरत होने के साथ-साथ एक कुशल लेखिका भी है। इस समय योगा से एम ए प्रवेश में अध्ययनरत है। पर्यावरण का कार्य और समाज सेवा के साथ-साथ अभिलाषा एक कुशल लेखिका भी है। उनके कुशल लेखन कार्य के लिए आप को राजस्थान पाठ्य पुस्तक मंडल शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यास जयपुर द्वारा राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया है । समाज के हर कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेना अभिलाषा की आदत में शुमार हो गया है।

पापा भी राइटर मम्मी भी राइटर, मैंने भी कदम बढ़ाया। पापा ने जब तन छोड़ा, उनकी स्मृतियों को मैंने परवान चढ़ाया।

अभिलाषा ने सन 2014 में एक पुस्तक लिखी जिसका नाम है शेखावाटी की मदर टेरेसा। इस पुस्तक में अभिलाषा ने कस्तूरबा सेवा संस्थान की संस्थापिका श्रीमती सुमित्रा शर्मा की जीवनी और उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों का वर्णन किया है। सन 2015 में अभिलाषा की प्रेरणादायक कहानियां प्रकाशित हुई। सामाजिक कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेने वाली अभिलाषा को कदम कदम पर एक अच्छी लेखिका का कार्य करना पड़ता है। अभिलाषा ने अपनी पुस्तकों में युवा पीढ़ी को संस्कारवान इमानदारी सकारात्मक सोच और धैर्यवान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सन 2016 में अभिलाषा की एक पुस्तक और प्रकाशित हुई जिसका नाम है जनचेतना। इस पुस्तक में अभिलाषा ने समाज की ज्वलंत समस्याओं का वर्णन किया है और युवा पीढ़ी को धैर्य के साथ उनका सामना करना और अपने दायित्व का भरपूर निर्वहन करने के बारे में बताया है।

ब्रांड एम्बेसडर
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एंबेसडर रह चुकी अभिलाषा रणवा ने सीकर जिले में बेटियों के लिए पुरजोर आवाज उठाई और मनसुख रणवा स्मृति संस्थान के जरिए समाज सेवा में बड़ी भूमिका निभा रही है ।आपने मंदबुद्धि बच्चों के सुधार के लिए कार्यरत कस्तूरबा सेवा संस्थान सीकर में स्वर्गीय पिता मनसुख रणवा की याद में एक पुस्तकालय स्थापित किया है अभिलाषा रणवा इन बच्चों के लिए समय-समय पर आर्थिक सहायता करती है।

बेटी बचाओ अभियान के अंतर्गत नवजात बालिकाओं की माताओं को एक एक किलो घी और साल भेंट करती है ।ग्रामीण महिला शिक्षण संस्थान सीकर के साथ मिलकर सफाई अभियान तथा युवा कार्यक्रम भी संचालित करती है। आपने कच्ची बस्तियों के बच्चों को शिक्षित करने और संस्कारित करने का अभियान भी चला रखा है।

योग ——–

स्वस्थ शरीर की एक पहचान, पर्यावरण और योगा को लो तुम जान। पर्यावरण के प्रति समर्पित अभिलाषा का कहना है की पर्यावरण के बिना हम नहीं और हमारे बिना पर्यावरण नहीं। इसी प्रकार योग को नित्य जीवन में अपनाने वाली इस बालिका का कहना है कि योग ही हमारा जीवन है। हमेशा योग की कक्षाएं लेती है और योगा में MA प्रवेश कर लिया है।वह अपनी योग की बेहतर सेवा के लिए बाबा रामदेव द्वारा सम्मानित की गई है। अभिनव समाज सेवा के लिए वह अनेक संस्थानों द्वारा सम्मानित की जा चुकी हैं।

एक लड़की क्या है, कौन है,,,,,,
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काम करण की होड़ मची है , पढ़ाई में सबसे आगे।
परिवार को ऐसे बांध के रखे , ज्यों गुदडी में धागे।

दो घर और एक जान है वो, शुभ शुभ सारे काम करें।
समदर सी गहराई को वो,माता बन के पार करें।

अभिलाषा ने अपनी प्रेरणादायक कहानियों के द्वारा नारी को सम्मान दिलाने और भ्रूण हत्या रोकने में विशेष कार्य किया है। यह बताने का पूर्व प्रयत्न किया है कि आज नारी किसी भी क्षेत्र में किसी से भी कम नहीं है चाहे समाज सेवा हो, खेल हो, प्रशासनिक कार्य हो ,कला का क्षेत्र हो ,विज्ञान का क्षेत्र हो अर्थात हर क्षेत्र में नारी ने अपना परचम फहराया है।
अभिलाष ने समाज में दुष्क’र्म के विरुद्ध पुरजोर आवाज उठाई और जिलाधीश महोदय को कसम दिलाकर कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया। अभिलाषा ने लावारिस मिली बच्ची का जन्मदिन मना कर एक विशेष कार्य किया। इस अवसर पर अस्पताल परिसर में पौधे लगाकर पर्यावरण को बढ़ावा दिया और पुस्तके बांटी गई।

अभिलाषा रणवा ने सीकर जिला कलेक्टर अविचल चतुर्वेदी को ऑक्सीजन प्लांट के लिए 11000 रुपए का चेक अपनी पॉकेट मनी से बचा के दिया और उन्होंने अपने आप को साबित करते हुए इसी साल 1 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया। वैसे तो अभिलाषा ने बहुत सारे पेड़ पौधे लगाने का काम कर चुकी है और बहुत सारे गार्डन भी तैयार कर चुकी है जिन्होंने पहले से ऑक्सीजन की महत्ता लोगों को पेड़ पौधे लगाने के संकल्प से करती रहती है।

लेखक की कलम:
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अभिलाषा तेरा आभार, तुम आई हर बेटी के द्वार। जग गई हर सोई हुई नार, अभिलाषा तेरा आभार।

प्रशासन हिल गया, हर पिता का चेहरा खिल गया। हिम्मत में भरा है हर सार, अभिलाषा तेरा आभार।

नारी बहुत मजबूत है, वह ईश्वर का भेजा एक दूत है। ना समझो अपनी हार, अभिलाषा तेरा आभार।

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