उत्तराखंड के बद्रीनारायण मंदिर की तर्ज पर बना देश का दूसरा एकमात्र- फतेहपुर बद्रीनारायण मंदिर

Badrinarayan Temple in Sikar: दोस्तों नमस्कार! दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी जगह की कहानी बताने जा रहा हूं, जो अपने चमत्कारिक किस्सों के लिए जानी जाती हैं, एक ऐसी जगह जहां जाने से मन कभी नहीं भरता। वह जगह जहां पर गुलामी (Gulami Picture) की भी शूटिंग हुई थी। दोस्तों, हम बात कर रहे हैं, फतेहपुर (Fatehpur) में मौजूद बद्रीनारायण मंदिर (Badrinarayan Temple) की, जो भारत में उत्तराखंड के बाद एकमात्र है। यहां पर सन् 1985 में गुलामी पिक्चर की शूटिंग की गई थी। संगरमरमर पत्थर से निर्मित यह मंदिर एक अलौकिक वातावरण का अहसास कराती है।

मंदिर की स्थापना।

Badri Narayan Mandir Fatehur

इस मंदिर की स्थापना लगभग 150 वर्ष पहले ओम गोपाल (Om Gopal) जी गणेडी वाले सेठ जी के द्वारा करवाई गई थी। एक बार सेठ जी और सेठानी जी उत्तराखंड (Uttrakhand) घूमने के लिए गए, तब उन्होंने वहां पर भारत का एकमात्र बद्रीनारायण मंदिर के दर्शन किए। वह मंदिर की बनावट और खूबसूरती से इतने प्रभावित हुआ कि उन्होंने प्रदेश में भी यह मंदिर बनवाने का विचार किया। सेठ जी का उद्देश्य था कि वह एक ऐसा हूबहू मंदिर बनाएं जिसके दर्शन एक आम आदमी बड़ी ही आसानी से देख सके। इस बात को लेकर सेठ जी ने अपनी धर्म पत्नी से प्रश्न किय। उन्होंने सेठानी जी से पूछा कि कैसा लगा। सेठानी जी ने कहा कि कैसा लगा यह बाद में बताऊंगी। पहले यह बताओ कि कोई भी गरीब आदमी ऐसी दुर्लभ जगहों को देखने यहां पर आ सकता है क्या! नहीं आ सकता। इसलिए कृपा करके फतेहपुर (Fatehpur) में ऐसा ही मंदिर बनवाए, जो इससे किसी भी सूरत में कम ना हो। सेठ जी ने मिलता-जुलता विचार देख, वैसा ही मंदिर फतेहपुर में बनवाया जिसके सुंदरता वाकई अलौकिक है यहां पर कुआं, बावड़ी, जोहड, छतरिया और जंगल एवम् बाग बगीचे जैसे रमणीक स्थानों से पूरा मंदिर घिरा हुआ है। पूरे मंदिर में मकराना का संगमरमर लगा हुआ है। बहुत सा पत्थर तो इस प्रकार का है कि दीवार के एक तरफ आप कुछ करते हो तो दूसरी तरफ वैसा का वैसा दिखाई देता है। अनेक चमत्कारों से भरा हुआ यह मंदिर अब देखरेख की कमी को महसूस करने लगा है।

कारीगरी एवम् शक्ति। 

Badri Narayan Mandir Fatehpur

संगमरमर के पत्थर से बने हुए गुंबद और उन पर की हुई कारीगरी अपने आप में एक आश्चर्य का विषय है। इतने विशाल पत्थर किस प्रकार से रखे गए हैं यह सोचने पर मजबूर करता है कि बिना मशीनों के यह काम किस प्रकार किया गया है। लकड़ी की नक्काशी और उन पर की हुई कारीगरी, विशाल छतरियां आश्चर्यचकित करती है। यहां पर कुबेर नारद जी, बद्री विशाल जी, लक्ष्मी जी आदि के मंदिर बहुत ही सुंदर संजोए हुए हैं। Badrinarayan Temple in Sikar

भोग।

जब पुजारी जी से पूछा कि किस चीज का भोग लगता है तो उन्होंने कहा की मूंग के लड्डू, केला, सेब, मखाना और पेड़ा आदि का भोग अलग-अलग समय पर यहां पर चढ़ाया जाता है। उसके बाद में पंडित जी ने गुलामी पिक्चर की शूटिंग के दृश्यों का वर्णन करते हुए बताया कि कहां पर घोड़े दौडाए गए। किस प्रकार हीरो हीरोइन के दृश्य फिल्माए गए थे। छतरियों की विशेषता अपने आप में देखते ही बनती है।उनकी ऊंचाई, पिलर, रंग बिरंगी तस्वीरों से सजी हुई छतरियां अपने आप में निराली है।

अपने विचार।

कुआ बावड़ी स्कूल और मंदिर, पहले सब बनवाते थे। अब तो पाप ने पैर जमाए, कि कुतर कुतर के खाते हैं। विद्याधर तेतरवाल, मोतीसर।

बद्रीनारायण- सीकर का संगरमरमर से बना अनोखा भव्य मंदिर, सुंदरता में देता है ताजमहल को मात

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