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सीकर : शहीद सुल्तान सिंह जिन्होंने सीनियर की जान के लिए अपनी जांघ पर खाई दुश्मन की गोली

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शहीदों की चिताओं पर लगेगें हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाक़ी निशां होगा, जगदंबा प्रसाद मिश्र की ये लाइनें आज भी देश के लिए जान की बाजी लगाने वाले जवान के लिए कही जाती है। आज हम आपको एक ऐसे ही शहीद की कहानी बताएंगे जिन्होंने शहीदों के सम्मान में बड़ी जीत दर्ज की।

हम बात कर रहे हैं सीकर के गांव बागड़िया वास के रहने वाले शहीद सुल्तान सिंह, जो जम्मू कश्मीर के माछिल सेक्टर में पेट्रोलिंग के दौरान अपने कमांडिंग ऑफिसर को बचाते हुए शहीद हो गए।

शहीदों के परिवार में हुई परवरिश

सुल्तान सिंह एक सैनिक परिवार से आते हैं जहां पहले से ही सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ में बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियों पर लगभग 15 जवान सेवाएं दे रहे हैं। इसलिए सुल्तान सिंह भी उसी लाइन में चलते हुए हमेशा सुबह अपने दोस्तों के साथ, बच्चों के साथ दौड़ने जाते और दौड़ते-दौड़ते जैसे ही पहली भर्ती आई वह भर्ती होने चले गए और उनका चयन हो गया।

कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर में हुए शहीद

सुल्तान सिंह जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में माछिल सेक्टर में पोस्टेड थे जहां पर वह अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे थे और आतंकवादियों से लोहा लेते हुए अपने कमांडिंग ऑफिसर को बचाने के बाद एक गोली उनकी जांघ में लगी और दो घंटे तड़पने के बाद में वह अनंत में विलीन हो गए।

शहीद के सम्मान में घरवालों की लंबी लड़ाई

सुल्तान सिंह के शहीद होने के बाद उनके परिजानों ने नेताओं और सरकारी विभागों के कई चक्कर लगाए लेकिन उनसे किए गए सभी वादे कभी पूरे नहीं किए गए। सुल्तान की पत्नी ने अपने पति के सम्मान की कई सालों तक लड़ाई लड़ी। लंबी लड़ाई के बाद राजस्थान विधानसभा के एक सत्र के दौरान शहीद के लिए गोचर भूमि, चारागाह भूमि या जोड़ की भूमि, जो भी हो उसमें से 500 वर्ग गज का प्लॉट मुफ्त में अलॉट करने का फैसला किया गया।

स्कूल के नामकरण को भी दबाए रखा !

सुल्तान सिंह के परिवार का आरोप है कि उस समय के सैनिक कल्याण मंत्री प्रेमसिंह बाजोर ने श्रीमाधोपुर से नालवा तक सड़क बनाने का ऐलान किया था जो आज तक नहीं बनी। वहीं स्कूल का नामकरण हो गया था लेकिन उसको भी एक साल तक दबाए रखा।

बता दें कि सुल्तान सिंह की मूर्ति का अनावरण 16 जनवरी 2016 को श्रीमान वीरेंद्र सिंह जी, श्रीमान कीलक साहब आदि गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में हुआ और हर साल उनकी पत्नी यहां खुद के खर्चे पर आयोजन करती है।

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