सांसद सुमेधानंद सरस्वती समेत 3 लोगों पर FIR दर्ज, धोखाधड़ी केस पर बोले सुमेधा

Sikar News: जयपुर के आदर्श नगर (Adarsh Nagar) थाने में सीकर के सांसद सुमेधानंद सरस्वती (MP Sumedhanand Saraswati Case registared in Jaipur) समेत 3 लोगों के खिलाफ बीते गुरुवार धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। मामले को लेकर सांसद ने शुक्रवार को अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद है। आर्य समाज को कुछ लोगों ने शादी का अड्डा बना लिया था, ऐसे में जब उनके रोजगार पर हमला हुआ तो उन्हें बदनाम करने की साजिशें शुरू कर दी गईं। सांसद बोले जांच शुरू होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।

MP Sumedhanand Saraswati

सांसद ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि वह कल मुंबई में थे। फोन पर FIR के बारे में पता चला था। आज सीकर आने के बाद FIR देखी। उन्होंने कहा, आर्य समाज संगठन में उनके साथ साल 2021 में कुछ सदस्य मंत्री ने सदस्यता ग्रहण की थी। समाज में कुछ लोगों की ओर से गलत काम किया गया था, तो उन्हें निष्कासित कर दिया गया। सांसद बोले कि कुछ लोग कह रहे हैं कि मुझे समाज के प्रधान पद से हटा दिया गया है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है, ये बातें भ्रामक हैं। उन्होंने कहा- वह 5 दिसंबर, 2022 को प्रधान पद के लिए बहुमत से विजयी हुए थे।

सांसद बोले, दिनांक 7 अगस्त, 2022 को एक बार फिर मैंने और संगठन के पदाधिकारियों ने साधारण सभा की बैठक की, जिसमें साफ कर दिया गया कि पूरा प्रदेश स्वामी सुमेधानंद सरस्वती को ही स्वीकार करता है। सांसद ने कहा कि मैं एक निर्वाचित प्रधान हूं, इसमें कोई संदेह नहीं है। कुछ लोगों ने आर्य समाज को शादी का अड्डा बना दिया था, यह मुझे उचित नहीं लगा, इसलिए उन्हें बाहर कर दिया गया।

MP NEws

क्योंकि उनकी दुकान बंद हुई, इसलिए उन्होंने धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज की है, जो कि उन्हें बदनाम करने की एक साजिश है। सांसद ने कहा कि इस FIR में भी इतनी ही बात है कि लेटर हेड और पद का दुरुपयोग किया गया है, उन्होंने कहा कि मैंने जीवन में कोई ऐसा काम नहीं किया जिससे मेरे ऊपर आरोप लगे। इस मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

आखिर क्या था मामला?

दरअसल, आर्य प्रतिनिधि सेवा राजस्थान के मंत्री जीववर्धन शास्त्री ने जयपुर के आदर्श नगर थाने में कोर्ट में इस्तगासा से मामला दर्ज करवाया है, जिसमें सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती, देवेंद्र कुमार और भरतपुर (Bharatpur) के रहने वाले रवि शंकर गुप्ता, अंकित जैन और दीपक शास्त्री ने पिछले साल मिलकर धोखाधड़ी की थी। साल 2021 में सांसद सुमेधानंद सरस्वती सभा के प्रधान चुने गए थे, लेकिन कुछ दिनों बाद सांसद की जगह किशन लाल गहलोत को सभा (MP Sumedhanand Saraswati Case registared in Jaipur) का प्रधान नियुक्त किया गया तो सांसद ने अन्य नामजद आरोपियों के साथ फर्जी लेटर के साथ व्यक्तिगत कारण बताते हुए इस्तीफा दे दिया।

कुछ समय बाद जब सांसद की जगह किशन लाल गहलोत को सभा का प्रधान नियुक्त किया गया तो सांसद ने अन्य नामजद आरोपियों के साथ फर्जी लेटर पैड छपवा लिए और अपने जयपुर और सीकर आवास पर अवैध बैठक बुलाने लगे। सांसद पर आरोप है कि उन्होंने सभा की गतिविधियों को बंद करने के लिए अपने पॉलिटिकल पावर सभा के बैंक खातों को बंद कराने की भी कोशिश की। साथ ही अपने साथियों के साथ मिलकर रजिस्टार सोसायटी के लोगों को भ्रमित किया है। जिनका इरादा सभा की संपत्तियों पर कब्जा करना है।

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