सीकर के श्रीमाधोपुर में स्थापित बालाजी धाम की बेहद अनोखी है कथा, हुए हैं कई चमत्कार!

Poladas Balaji Dham in Shrimadhopur: पोलादास बालाजी धाम श्रीमाधोपुर सीकर।
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आस्था और विश्वास,
शांति के दूत हैं।
माता पिता की सेवा करते,
वैसे ही सपूत है।

सीकर जिले के सबसे पुराने मंदिरों में से एक।
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दोस्तों नमस्कार।
दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसे चमत्कारी बालाजी धाम की यात्रा पर ले चल रहा हूं, जहां की कहानी सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। यह बालाजी मंदिर सीकर जिले के उन पुराने मंदिरों में से एक मंदिर है, जहां पर अनेकों चमत्कार हुए हैं। लोगों की आस्था पूरी हुई है और हजारों श्रद्धालु समय-समय पर वहां पर आते रहते हैं।

इतिहास।
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Poladas Balaji Dham in Shrimadhopur
सीकर (Sikar) जिले के श्रीमाधोपुर उपखंड के पोलादास मंदिर (Poladas TEmple) के पुजारी प्रभुदयाल जी सोनी ने हमारे संवाददाता कुलदीप से बात करते हुए बताया कि इस मंदिर की स्थापना के बारे में बताया, उन्होंने बताया कि आज से चार सौ वर्ष पहले विक्रम संवत 1722 ईस्वी में हुई थी। इस मूर्ति का नाम पोलादास है, इसको जयपुर से दो बैल गाड़ियों में रख कर लाए थे। यहां रात्रि विश्राम किया गया और सुबह जब बैलगाड़ी में जोड़कर चलने लगे तो मूर्ति नहीं चली। चार बैल लगाए, आठ लगाए, सोलह बैल लगा दिए लेकिन मूर्ति यहां से टस मस भी नहीं हुई।तब आकाशवाणी हुई कि इस मूर्ति की स्थापना यहीं पर करनी है।
इस मूर्ति को पोलादास जी खंडेला के पास से यहां लेकर आए थे, और उसके बाद इसकी पूजापाठ का कार्य हमारे परिवार द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी किया जा रहा है। पुजारी जी ने बताया कि हमारे पूर्वज दादा जी दो भाई थे, बड़े पोलादास जी और छोटे भाई की औलाद हम है।जो इनकी सेवा चाकरी में लगे हुए हैं। बताते हैं कि पोला दास जी के दर्शन मात्र से लोगों के दुख दर्द और रोग दोष दूर हो जाते हैं।

मेला।
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पुजारी जी कहते हैं कि हनुमान जी महाराज अजर अमर है। वह आज भी लोगों के हर कार्य को पूर्ण करते हैं। हनुमान जयंती को यहां पर बहुत बड़ा मेला लगता है। व शनिवार मंगलवार को खूब श्रद्धालु यहां अपने कष्टों का निवारण करने आते हैं, और लाभ प्राप्त करते हैं।
सुबह चार बजे मंदिर के पट खोल दिए जाते हैं, और सवा चार बजे आरती होती है। मंगलवार और शनिवार को खूब भीड़ होती है ।लेकिन सामान्य दिनों भी लोगों का तांता लगा रहता है। बालाजी के गुड़ भुंगड़ा और रोट का भोग चढ़ाया जाता है। खीर चूरमा और पेड़ा उनका मुख्य भोज है। शिव जी महाराज की मूर्ति को दिखाते हुए पुजारी जी कहते हैं कि इन की गोद में पार्वती और पार्वती जी की गोद में गणेशजी है। यह मूर्ति भी 400 साल पुरानी है।

इच्छापूर्ति।
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Poladas Balaji Dham in Shrimadhopur
बालाजी की मूर्ति दिखाते हुए पुजारी जी कहते हैं कि इस मूर्ति को पोलादासजी महाराज घूमते हुए जयपुर चले गए थे वहां एक मूर्तिकार से कहा मुझे बाला की मूर्ति चाहिए। मूर्तिकार ने कहा, मैं आपको बाला की मूर्ति दूंगा। आप मुझे लाला दो। जाओ तुम्हारे लाला हो जाएगा, और इस प्रकार उस मूर्तिकार को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
श्रीमाधोपुर से रोज दर्शनों का लाभ लेने हेतु आने वाले श्रद्धालुओं ने बताया कि हम पिछले तीस साल से, चालीस साल से, पचास साल से लगातार आ रहे हैं। और हमको इनके दर्शनों से शांति की प्राप्ति होती है। और हमारी इच्छाओं की पूर्ति भी होती। Poladas Balaji Dham in Shrimadhopur

अपने विचार।
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जीवन सुखमय हो जाता है,
जहां मुख पर मुस्कान आती है।
ऐसा ही यह स्थान है,
जहां आत्मा खिल जाती है।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

देखें इंटरव्यू…

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