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सीकर

राजस्थान की लेडी सिंघम नाम ही काफी, आईपीएस प्रीति चंद्रा, पत्रकार से IPS बनने की संघर्ष की कहानी

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हमने सिं’घम का अवतार केवल बॉलीवुड की फिल्म में देखा है। लेकिन हम आपको एक ऐसी आईपीएस महिला अधिकारी की कहानी बताएंगे जो हकीकत की जिंदगी में लेडी सिं’घम के नाम से जानी जाती हैं। हम बात करें हैं आईपीएस अधिकारी प्रीति चंद्रा की। साल 1979 को राजस्थान के सीकर जिले के गांव कुंदन में जन्मी प्रीती चंद्रा। एम.फिल तक पढ़ाई करने के बाद वह यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करने लगी।

साल 2008 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा बिना कोचिंग के पहले ही मौके में पास कर ली। इसके साथ ही बन गई आईपीएस अधिकारी। प्रीति चंद्रा को तेज तर्रार और ईमानदार आईपीएस अफसर माना जाता है। राजस्थान में लोग उनको लेडी सिं’घम के नाम से बुलाते है। वह अलवर में एएसपी, बूंदी में एसपी,कोटा एसीबी में एसपी व अन्य महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रही है। कहा जाता है कि जिस इलाके में प्रीति चंद्रा की पोस्टिंग होती है वहां के अप’ राधी उनका नाम सुनकर ही कां’ प जाते हैं। आपको प्रीति चंद्रा के बारे में बताएं तो वह राजस्थान की पहली महिला एसपी बनी थी।

कई नेक काम करने वाली आईपीएस अधिकारी है प्रीति

उनकी उपलब्धियों के बारे में बताएं तो उन्होंने बूंदी में एसपी रहते हुए छोटी बच्चियों को दे’ ह के व्या’ पार में धकेलने वाले गि’ रोह को पकड़ा था और उन्हें सला’ खों के पीछे पहुंचाया था। साथ ही बीकानेर में अप’ राधियों पर लगाम लगाने का भी काम उन्होंने किया है। करौली में एसपी रहते हुए उन्होंने डकै’ तों को पकड़ लिया और उन्हें सरें’ डर करवा कर सला’ खों के पीछे पहुंचा दिया।

माँ का पूरा सपोर्ट

आईपीएस अधिकारी प्रीति चंद्रा अपने जीवन के बारे में बताती हैं, वह बताती हैं कि वह पत्रकार बनना चाहती थी। साथ ही इसके बाद वह शिक्षिका भी बनी, लेकिन उनके नसीब में आईपीएस अधिकारी बनना लिखा था। वह बताती हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बस उस काम को पूरी लगन और ईमानदारी के साथ करना चाहिए। आईपीएस बनने के पीछे वह बताती हैं कि उनकी मां ने उन्हें हमेशा सपोर्ट किया।

उनकी मां खुद पढ़ी-लिखी नहीं है लेकिन माँ ने प्रीति चंद्रा और उनके भाई बहनों को पढ़ाया। वह बताती हैं कि जब वह कॉलेज में हुई तो रिश्तेदारों ने शादी के लिए लड़को के रिश्ते भेजने शुरू कर दिए। लेकिन मां ने उन सभी को मना कर दिया और बच्चों को पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया।

महिलाएं उठाए सच की आवाज

वही प्रीति कानून पर बताती हैं कि हमेशा से महिलाओं के कानून के लिए आवाजें उठती रहती हैं। हालांकि महिलाओं के लिए पर्याप्त कानून है, लेकिन आज के समय में इसका दुरुपयोग हो रहा है। इससे कानून कमजोर होते जा रहे हैं और इससे जिनके लिए वह कानून बने है वह भी कमजोर होती जा रही है। ऐसे झू ठे मामले लोग दर्ज करवा देते हैं जिससे जांच टीम भी जांच में ढील कर देती है। इन सब चीज़ों से ही कानून का दुरुपयोग होता है। सच्चे मामले झूठ के नीचे दब जाते हैं। इसलिए महिलाओं को अपने लिए सच्ची आवाज उठानी चाहिए।

प्रीति चंद्रा के बारे में बताएं तो आईपीएस अधिकारी प्रीति चंद्रा तेजतर्रार और ईमानदार अफसर है। वह पिछड़े इलाकों में भी ग्राउंड पर उतर कर लोगों की समस्याएं सुनती है और उनकी समस्याओं को पूरी करने का हर संभव प्रयास करती है। राजस्थान की ही रहने वाली इस बेटी ने अपने परिवार का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया, जो मां खुद नहीं पढ़ पाई उसने अपनी बेटी को पढ़ा लिखा कर आईपीएस अधिकारी बना दिया।

प्रीति चंद्रा की कहानी से उनके जीवन से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए और मन में विश्वास करना चाहिए कि हम भी मेहनत करके किसी ऊंचे पद या किसी अच्छी नौकरी को हासिल करें।

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