सीकर: दिनारपुरा के श्याम बाबा ने जब एक गरीब के घर किया अद्भुत तरीके से प्रवेश!

Shyam Baba Dinarpura: श्याम बाबा दिनारपुरा कटराथल सीकर।
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कण कण में भगवान है,
हर चीज पर उनका नाम।
पर सेवा और सत्कर्म में,
लगाना हमेशा ध्यान।

श्याम बाबा रोटी पर प्रकट हुये।
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दोस्तों नमस्कार।
दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे स्थान पर ले चलता हूं, जहां की चमत्कारिक घटनाओं का देखकर आप भी दंग रह जाएंगे। एक गरीब आदमी के घर में किस प्रकार श्याम बाबा प्रवेश करते हैं, और किस प्रकार एक विशाल मंदिर का निर्माण करवा लेते हैं।

स्थान और परिचय।
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Shyam Baba Dinarpura

सीकर (Sikar) जिले के कटराथल (Katrathal) के पास में दिनारपुरा (Dinarpura) गांव की इस घटना के बारे में हमारे संवाददाता खुशबू से बात करते हुए मंदिर के पुजारी जी ने विस्तार पूर्वक सारी बात बताई। उन्होंने बताया कि मेरा परिवार हमेशा से धार्मिक प्रवृत्ति का रहा है। मैं पेंटर का काम करता हूं। एक दिन की बात हैकि जब मैं काम करने के बाद में घर लौट कर आया तो मैंने पत्नी से कहा कि श्याम बाबा को भोग लगा दो। उसके बाद में खाना खाएंगे।
बेटी ने कहा की रोटी के ऊपर श्याम बाबा विराज रहे हैं।इसलिए मैं इसका भोग नहीं लगाऊंगी। रोटी को घरवालोंने देखा,सबने देखा गांव वालों ने देखा। असल में श्याम बाबा रोटी के ऊपर उकेरे हुए थे। गांव वालों ने कहा कि बाबा की बुजा दिखाओ। पुजारी जी मान गए और सब के साथ नारियल लेकर बुजा दिखाने चले गए।

बाबा ने क्या कहा।
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पुजारी जी सब गांव वालों के साथ में जब नारियल रखकर बुजा दिखाने लगे, तो श्याम बाबा ने कहा कि मेरी बुजा दिखाने आए हो तो सवामणी करो और मंदिर बनाओ। उसी समय पुजारी जी ने कहा कि महाराज मेरी श्रद्धा नहीं है, तब श्याम बाबा ने कहा कि मैं करूंगा। आप शुरू करो। पुजारी जी ने कहा कि यह बात सन 2004 की है, मैंने सवामणी की और मंदिर का कार्य शुरू कर दिया।
पुजारी जी कहते हैं कि मैंने नींव भराई का काम पूरा कर लिया। उसके बाद में मिट्टी भराव करने की बात आई,तो ट्रैक्टर वालोंने एक लाख रु मांगे। रात को बाबा दर्शन देते हैं और कहते हैं कि जेसीबी ले आओ। मैंने दूसरे दिन सीकर जा कर जेसीबी मशीन वाले को बुलाया। जेसीबी मशीन वाले ने पास में ही गड्ढा खोद कर, पूरा भराव कर दिया। भराव के ऊपर रात को श्याम बाबा  (Shyam Baba) घूमते हैं, और अपने पैरों की छाप छोड़ देते हैं।
मंदिर निर्माण कार्य शुरू हुआ तो भूटान में रहने वाले अशोक शर्मा को रात में स्वप्न आया कि दिनारपुर में मैं रोटी पर प्रकट हुआ हूं। वहां पर मेरा मंदिर बनेगा। उसमें सीमेंट लोहा कंक्रीट सब आपको देनी है,तो दूसरे दिन अशोक शर्मा गांव आया और पूरी वस्तुस्थिति का जायजा लिया। अशोक शर्मा ने रोटी पर श्याम बाबा के दर्शन किए, और पूरा मंदिर निर्माण का सामान लाकर डाल दिया।

मूर्ति का निर्माण।
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मूर्ति स्थापना की बात आई तो मैं झुंझुनू (Jhunjhunu) जिले के देलसर (Delsar) गांव में श्याम बाबा (Shyam Baba) के मंदिर में गया। वहां के पुजारी जी से मैंने मूर्ति के बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि घुरसली गांव में श्याम बाबा की मूर्ति बनाई जाती है। मूर्ति बनाने वाले ने कहा कि मैं स्वयं आपके पास आऊंगा और मूर्ति बनाऊंगा।
मूर्ति बनाने वाले ने रोटी पर श्याम बाबा की फोटो लीऔर मूर्ति बनाने का काम शुरू किया। तब उन्होंने श्याम बाबा से विनम्र प्रार्थना की कि हे बाबा मेरी शादी को तेरह वर्ष हो गए हैं, मेरे कोई संतान नहीं हुई है। यदि मुझे संतान सुख प्राप्त हो जाता है। तो मैं गुंबज का पूर्ण कार्य करूंगा। श्याम बाबा ने उसको संतान सुख दिया और उसने मंदिर निर्माण में चार चांद लगा दिए। Shyam Baba Dinarpura

श्याम बाबा पुजारी के मुंह बोलते हैं।
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Shyam Baba Dinarpura
कुछ दिन बाद में पुजारीन के मुंह से श्याम बाबा बोलने लग गए तो मैंने श्याम बाबा से अरदास की, हे बाबा हमारा घर बंद होने जा रहा है। इसलिए कृपा करके पुजारिन को छोड़ो और मुझे अनुमति प्रदान करो।उसके बाद आज तक श्याम बाबा मेरे द्वारा ही लोगों को संदेश देते हैं।
जो गांव में और आसपास में नूगरा लोग थे, वह भी सब सुगरा हो गए हैं। और घडोलिया घड़ोलिया श्याम बाबा के दर पर आते हैं। लोगों की सभी मान्यताएं यहां पर पूरी होती है। बाबा के नाम से झाड़ा लगाते हैं और प्रसाद देते हैं तो उनकी समस्याएं कट जाती है।

अन्य।
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मेला कब लगता है के जवाब में पुजारी जी कहते हैं कि कार्तिक सुदी बारस और जन्माष्टमी को श्याम बाबा का मेला लगता है। पुजारी जी कहते हैं कि 2004 से लगातार ज्योत जल रही है। और रोटी भी ज्यों की त्यों आज भी बिना किसी नुकसान की रखी हुई है। जो भी मंदिर का आज तक कार्य हुआ है, वह सब श्रद्धालुओं और भक्तों के द्वारा ही करवाया हुआ है मैं तो केवल सेवक हूं और सेवा कर रहा हूं। Shyam Baba Dinarpura

अपने विचार।
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सादा जीवन और प्रेम में,
ईश्वर वास करता है।
त्याग तपस्या सबसे ऊपर,
मन में खुशियां भरता है।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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