सीकर: 96 साल के स्वतंत्रता सेनानी की कहानी जिन्होंने किसान हित के लिए बोल दिया था हल्ला!

दोस्तों नमस्कार।
आज मैं आपको एक ऐसी शख्सियत की कहानी बताने जा रहा हूं जो सीकर (Sikar) जिले से स्वतंत्रता सेनानी है और 95 वर्ष की उम्र में भी बिल्कुल स्वस्थ है।उनका नाम है श्रीमान कालिदास जी स्वामी (Kalidas Swami)। स्वामी जी सीकर जिले में रींगस (Reengus) के पास जेतूसर गांव (Jetusar Village) के रहने वाले हैं। (Sikar Freedom Fighter Kalidas Swami)

स्वस्थ रहने का राज।
स्वामी जी बताते हैं कि मेरा जन्म सन् 1928 में हुआ था, इस वक्त मेरी उम्र 96 साल है। मैं हमेशा पैदल चलता हूं। एक समय खाना खाता हूं। तीन बार जैतुसर पंचायत का सरपंच रह चुका हूं। जैतूसर पंचायत की अब तीन पंचायत हो गई है। लेकिन उस वक्त एक ही थी और मैं इधर से उधर केवल पैदल ही जाता था।
इस वक्त सीकर जिले में मैं एक ही जीवित स्वतंत्रता सेनानी हूं। पहले कुल स्वतंत्रता सेनानियों की संख्या 79 थी।

अंग्रेजी हुकूमत।
अंग्रेजी शासन के बारे में पूछने पर स्वामी जी ने बताया हिंदुस्तान के लोग एक होते तो ईस्ट इंडिया कंपनी के पांव यहां पर नहीं जमते। अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो (Divide and Rule) की नीति यहां पर चल गई।
अंग्रेजों ने देश में जाति धर्म का बंटवारा करके एक दूसरे को लड़ा दिया। बहुत से राजा उनके गुलाम हो गए थे। जैसा वो कहते वैसा ही करते थे। जागीरदारों को जमीदारों से लड़ाना, इनको राजाओं के विरुद्ध भड़काना। इस प्रकार की दोगली नीतियों ने उनके पांव जमा दिए।

जेल कब गए और क्यों गए।

Sikar Freedom Fighter Kalidas Swami

सन 1942 में किसानों के ऊपर हो रहे अत्याचार तथा अधिक मात्रा में लिया जाने वाला लगान के विरुद्ध आवाज उठाने पर मुझे जेल भी जाना पड़ा था। बजाज भवन के सामने सीकर में पहले जेल थी। जिसमें मैं मेरे दस पंद्रह साथियों के साथ में जेल भेज दिया गया। बाकी लोगों को माफी मांगने पर वापिस भेज दिया, लेकिन मैंने माफी मांगने से इनकार कर दिया।
सन 1946 में जब मैं वापिस जेल से छूटा तो छूटते ही मैंने एक हरिजन स्कूल का शुभारंभ किया। 1946 में एक बार बुलाने के ऊपर जून के महीने में महात्मा गांधी से भी मिला था उन्होंने हाथ उठाकर यही कहा था कि काम करते जाओ।

न्याय व्यवस्था पहले की ओर अब की।
पहले कोई लड़ाई झगड़ा वगैरह हो जाता या अन्य कोई लेन-देन का मामला हो, तो जिसका जितना बड़ा जुर्म होता था उसी के अनुसार सजा मिलती थी। किसी को डाट फटकार कर छोड़ देते थे। किसी से 2 दिन काम करवा लेते थे। किसी को धूप में खड़ा कर देते थे आदि।
आज के समय में न्याय व्यवस्था बहुत खर्चीली हो गई है। पहले भ्रष्टाचार नहीं था और अब घूस का लेन देन बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
उनके पौत्र से जब दादाजी के बारे में पूछा गया, कि आपको दादाजी से कैसा महसूस होता है । उन्होंने कहा कि हमको कौन जानता है। हम तो चारों तरफ इन्ही के नाम से जाने जाते हैं।

आज के विकास के बारे में पूछने पर स्वामी (Sikar Freedom Fighter Kalidas Swami) जी ने बताया कि विकास अब ज्यादा हो रहा है ,शिक्षा के क्षेत्र में, यातायात के क्षेत्र में, संचार व्यवस्था आदि।

अपने विचार
सफेद चमड़ी सफेद जहर था,
फैला दिया पूरे देश में।
कूद पड़ो इस जन आंदोलन में,
जीतना है इस रेस में।

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