जीवित माँ के लिए बेटों ने किया ऐसा काम जिसकी हर कोई कर रहा है तारीफ, पेश की अनूठी मिसाल

पिता संग जिंदा मां की प्रतिमा लगाकर दो पुत्रों ने अनूठी पहल की।

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुना रहा हूं जिसमें अपने माता-पिता की प्रतिमा का अनावरण उनके पुत्रों द्वारा किया गया है, आप कहोगे कि इसमें खास बात क्या है, ऐसा तो सभी पुत्र अपने माता-पिता की प्रतिमा का अनावरण करके करते हैं।

लेकिन हां इसमें खास बात यह है की माता अभी जिंदा है। इस कहानी में एक मां अपने पुत्रों से कहती है कि जो कुछ करना है, वह मेरे जिंदा रहते ही करो। मरने के बाद मैं तो देखूंगी नहीं। आप करते हो या नहीं करते हो इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

माता-पिता की प्रतिमा।

फतेहपुर के पास में मंडेला पंचायत के अंतर्गत खुड़ी गांव में श्री नाथू राम जी का दो वर्ष पहले देहांत हो गया था, उनके दो पुत्र श्री सतपाल और श्रीमान महेंद्र ने अपने पिताजी की प्रतिमा बनाने की सोची। पिता जी की प्रतिमा बनाने की बात आई तो बात को मां से पूछना जरूरी समझा।मां ने कहा कि बेटा तुम्हारे पिताजी ने हम दोनों की प्रतिमा बनाने की बात कही थी। तो आपने अकेले की बनाने की कैसे सोची।

बेटों ने कहा कि मां आप तो अभी जिंदा है, आपकी कैसे बना सकते हैं। तब मां ने कहा कि बेटा मेरी तो जिंदा की ही बना दो। मरने के बाद कौन देखेगा।
बहू ने अपने सास-ससुर की प्रतिमा के बारे में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे ससुर जी नौकरी तो नहीं करते थे लेकिन किसी भी सामाजिक कार्य के अंदर सबसे आगे रहने वाले वो पहले व्यक्ति थे। दो बीघा जमीन अपनी गोदान के हेतु दे दी। और अब उनके पुत्रों ने दो बीघा जमीन हॉस्पिटल के लिए दान दी है।

आगे बहू ने कहा कि दोनों पुत्र अपनी माता और दोनों बहनों से सलाह मशवरा करके ही आगे अपना कार्य करते हैं। यह दोनों भाई माता-पिता को और बहनों को बहुत ज्यादा मानते हैं। उनके पुत्र सतपाल जी कहते हैं कि मेरे पिताजी बहुत ही सरल स्वभाव के व्यक्ति थे।वो दोनों की साथ मूर्ति बनाने की सदा ही इच्छा रखते थे। वो शिवजी महाराज के बड़े भक्त थे। उन्होंने 30 वर्ष तक लगातार तीस सावन उपवास किया है।

मेरे पिताजी के किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं थी और बैठे-बैठे ही छः जून 2019 को अनंत में विलीन हो गए। ऐसी सरल मृत्यु मैंने आज तक नहीं देखी। जिसमें किसी प्रकार की कोई पीड़ा नहीं हो। यह सब भोलेनाथ की कृपा थी।

सतपाल जी कहते हैं, मैं मेरे माता पिता को सबसे बड़ा देवता और गुरु मानता हूं वह मेरे लिए आदेश है। वह शिव जी के बहुत बड़े भक्त थे। नत्थू राम जी के छोटे भाई ने भी अपने बड़े भाई की याद में रोते हुए बहुत कुछ कह डाला। महेंद्र और सतपाल का अपने माता पिता के प्रति प्यार के बारे में कहते हुए उनके चाचा जी कहते हैं कि पुत्र हो तो ऐसे हो।

अपने विचार।
*************
प्यार तो प्यार होता है,
प्यार की कोई किस्म नही।
मूर्ति तो एक बहाना है इसका,
वह तो अंदर छुपा है कोई रस्म नहीं।

विद्या धर तेतरवाल,
मोतीसर।

Add Comment

   
    >