कंचिता भामू फ्लाइंग ऑफिसर: मेहनत का अंत तक नहीं छोड़ा साथ और फिर कर दिखाया सपना साकार

Sikar Kanchita Bhamu Becomes Flying Officer:  कंचिता भामू फ्लाइंग ऑफिसर नानी सीकर।
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कितनी दूर जाएंगे,
मेहनत से लिख दे ऐसा लेख।
आसमान पूरा खाली पड़ा है,
निशाना लगा कर तो देख।

खेत खलियान से सीधे आसमान का सफर।
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दोस्तों नमस्कार!
दोस्तों आज मैं आपको ऐसी कर्मठ, लक्ष्य के प्रति अडिग, लगन शील और मेहनती युवती से रूबरू करवा रहा हूं, जिसने कभी हिम्मत नहीं हारी और लक्ष्य के प्रति अडिग रहते हुए आगे बढ़ती रही और खुले आसमान को अपना आशियाना बना डाला। घर के कामों को उसने अपनी दिनचर्या मानते हुए लक्ष्य कोअलग रखा और निशाना लगाया।

परिवार और परिचय।
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सीकर (Sikar) जिले के नानी गांव (Nani Village) की रहने वाली कंचीता भामू ने हमारे संवाददाता कुलदीप से बात करते हुए अपने बचपन सेफ्लाइंग ऑफिसर बनने तक के सफर की पूरी कहानी साझा की। उन्होने बताया कि मैं मेरे परिवार जनों की फौज की वर्दी से बहुत ही प्रभावित होती रही हूं। मैंने इनसे इंस्पिरेशन ली है। उसी मोटिवेशन के द्वारा मैं आज यहां तक पहुंची हूं। उस वर्दी से जो सम्मान मिलता है उससे मैं बहुत प्रभावित हुई।
अपनी शिक्षा के बारे में बताते हुए कंचिता कहती है कि मेरी स्कूली शिक्षा पूरी आर्मी स्कूल पुणे (Pune) से हुई है। बाद में ग्रेजुएशन मैंने राजस्थान यूनिवर्सिटी जयपुर (Rajasthan University, Jaiour) से की है। आर्मी स्कूल की पढ़ाई, अपने पापा द्वारा दिया हुआ मोटीवेशन, के अलावा पर्सनैलिटी टेस्ट और चारों तरफ का ज्ञान होना, एक फ्लाइंगऑफिसर के लिए बहुत जरूरी है। बहुत ज्यादा पढ़ाई इतनी जरूरी नहीं है। मैंने रात के समय में नियमानुसार ही पढ़ाई की है, इसके लिए मैंने खेलना, कूदना, टीवी देखना, मूवी देखना या घूमना आदि किसी भी काम को नहीं छोड़ा है।

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फ्लाइंग ऑफिसर बनने के लिए ग्रेजुएशन होना जरूरी है।जबकि अब एनडीए के द्वारा भी जाते हैं। लड़कियों के लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इस पर कंचिता कहती है कि सरकार ने इसके लिए बहुत बदलाव किये हैं। अब तो घर परिवार और सोसाइटी को करने की जरूरत है।किसी भी फील्ड में जाने के लिए जेंडर मायने नहीं रखता है। हर क्षेत्र हर जेंडर के लिए खुला है। मुझे पापा से फिजिकल सपोर्ट और मम्मी से मानसिक सपोर्ट तथा भाई से ओवर ऑल सपोर्ट मिला है। किसी भी लड़की को इस क्षेत्र में जाने के लिए दृढ़ विश्वास और निडर होना पड़ता है।

अब क्या प्रोसेस है!
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कंचिता ने बताया अब आर्मी हेडक्वार्टर हैदराबाद में एक वर्ष की ट्रेनिंग होगी। उसके बाद में पोस्टिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग किस प्रकार की होती है, इसके जवाब में कंचिता कहती है कि वह फिजिकली तैयार करते हैं। मेंटली स्वयं को प्रिपेयर होना पड़ता है। आर्मी स्कूल और सामान्य स्कूल में अंतर बताते हुए वह कहती हैं कि आर्मी स्कूल में जैसे ही पापा का ट्रांसफर होता है वैसे ही बच्चे का हो जाता है। जिसके कारण वह सामान्य ज्ञान बहुत ज्यादा प्राप्त कर चुका होता है। जबकि सामान्य स्कूल में ऐसा नहीं होता है।

अन्य
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मार्च 2022 को 21 साल की हो चुकी कंचिता के लिए उनके मम्मी पापा कहते हैं कि हमारी बेटी के लिए हमारा हर प्रकार से सहयोग रहा है। इसके अलावा मेहनत स्वयं की काम आई है। पुणे जाने के बाद इसने होर्स राइडिंग, स्केटिंग, स्विमिंग आदि जिसका भी मन किया, हमने वह करवाया है। (Sikar Kanchita Bhamu Becomes Flying Officer)
कंचिता के ताऊ जी ने बताया कि हमारे परिवार की सफलता में कंचिता के दादा जी का बहुत बड़ा योगदान रहा है।कंचिता की सफलता में कंचिता के पापा का बहुत बड़ा योगदान रहा है। मैं इसके लिए बहुत खुश हूं। और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वह हमेशा उन्नति करती रहे।

अपने विचार।
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नारी एक शक्ति है,
हर कोई समझ ना पाया।
जिसने इसे पहचान लिया,
वह आगे निकल गया।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

पूरा इंटरव्यू देखें…

 

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