राजस्थान का वह धाम जहां महज 4 महीनों में 2,000 से अधिक लोगों के रोग ठीक हुए

Trilochan Bharti Dham in Sikar: त्रिलोचन भारती धाम, दुल्हेपुरा, खंडेला सीकर।
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धाम बना है नया नया,
पर महिमा बहुत पुरानी है।
जिसने इनकी महिमा जानी,
उनकी बात इन्होंने मानी है।

नये धाम का बड़ा करिश्मा।
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दोस्तो नमस्कार!
दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे स्थान पर ले चलता हूं, जिसकी स्थापना 23 अप्रैल 2022 को हुई थी। लेकिन उसकी महिमा इतनी पुरानी है कि केवल चार महीने के अल्प समय में ही 2,000 से अधिक रोगी, रोग मुक्त होकर अपने घर जा चुके हैं। वहां पर आए हुए हजारों श्रद्धालुओं ने अपनी अपनी कहानी बताइ और खुशी जाहिर की। उनके बारे में आगे विस्तार से बताया गया है।

स्थान और परिचय।
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सीकर (Sikar) जिले के खंडेला (Khandela) तहसील में दुल्हेपुरा गांव (Dulhepura) में 23 अप्रैल 2022 को स्थापित त्रिलोचन भारती धाम के महंत ने खुशबू जी से बात करते हुए विस्तार पूर्वक उनकी महिमा का गुणगान किया। उन्होंने बताया कि आज से 500 वर्ष पहले विक्रम संवत 1662 ईस्वी में जोधपुर के पास में स्वामी श्री 1008 श्रीत्रिलोचन भारती जी ने बहुत दिनों तक तपस्या की थीऔर उसके बाद में जीवित समाधि ले ली। आज भी उनके वंशज जोधपुर (Jodhpur) में रहते हैं।
जोधपुर के लूणी तहसील में सदाड़ा गांव में उन्होंने जीवित समाधि ली थी। 2002 की एक घटना, जिसने सब की काया पलट कर रख दी। उनके वंशज जिनका नाम नर्सिंग भारती है, जो कैंसर जैसी असाध्य बीमारी से ग्रसित है। उनके सपने में आए और कहा कि सदाड़ा गांव में मेरी समाधि है। उसके फेरी लगा लो तुम्हारा कष्ट दूर हो जाएगा। उन्होंने वैसा ही किया और उनकी यह असाध्य बीमारी ठीक हो गई। उसके बाद उन्होंने उसी समय से पूजापाठ करनी शुरू की तथा लाखों लोगों को असाध्य बीमारियों से छुटकारा दिला दिया।

दुल्हेपुरा में स्थापना।
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हमारे यहां खंडेला तहसील से हजारों लोग वहां जाकर बीमारियों से छुटकारा पाते हैं। स्थानीय लोगों की समस्याओं को देखते हुए शीशरामजी काजला ने एक अहम निर्णय लेते हुए 23 अप्रैल 2022 को वहां से जलती हुई जोत यहां लाकर श्री श्री 1008 श्री त्रिलोचन जी भारती धाम की स्थापना की। शीशराम जी काजला ने सोचा कि यहां पर 252 गायों की एक गौशाला तो पहले से ही संचालित हैं। और यदि त्रिलोचन भारती धाम की स्थापना हो जाए तो आसपास के लोगों को बहुत सुविधाएं मिल जाएंगी और अनगिनत बीमारियों से छुटकारा मिल जाएगा।

संत महात्माओं से परिचय।
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एक संत की मूर्ति को दिखाते हुए उन्होंने बताया कि यह है, श्री श्री 1008 श्री कामेश्वरी महाराज जी, जिन्होंने यहां से कुछ ही दूरी पर मठ स्थान पर आज से डेढ़ सौ वर्ष पहले जीवंत समाधि ली थी।तो सभी भक्त जनों के सहयोग से इनकी यहां पर मूर्ति स्थापित कर दी गई। Trilochan Bharti Dham in Sikar
दूसरी मूर्ति जिनकी जोधपुर से जोत यहां पर लाई गई थी।श्री श्री 1008 श्री त्रिलोचन जी भारती महाराज की मूर्ति है। जिन की असीम अनुकंपा से यहां पर हजारों भक्त ठीक होरहे हैं। और अभी तो कारवां शुरू ही हुआ है।
तीसरी मूर्ति श्री विशंभर दासजी महाराज, जिन्होंने चारुड़ा धाम में बहुत दिनों तक तपस्या की थी। उन्होंने बताया कि तीनों ही संत किसी परिचय के मोहताज नहीं है। बहुत ही जाने माने हैं, और भक्त जनों के सहयोग से इनकी मूर्तियां यहां पर स्थापित कर दी गई। उन्होंने बताया कि इन तीनों का संयोग इस प्रकार का है कि यहां से कैंसर और उससे नीचे की सभी बीमारियों के मरीज ठीक होकर जाते हैं। उनका यह कहना है कि हम पढ़े लिखे हैं, यह नहीं माननी चाहिए। लेकिन हकीकत में यही हो रहा है।
यहां पर ना कोई झाड़ा लगाया जाता है, ना कोई बूजा की जाती है। शाम को आरती के बाद में पास में ही एक धूना है,वहां पर अपना एक नारियल बांध दो, बस वही से उनकी सिद्धि शुरू हो जाती है। त्रिलोचन भारती जी महाराज ने पूर्णिमा के दिन जीवंत समाधि लीथी इसलिए पूर्णिमा और अमावस्या को लोगों का बड़ा मेला लगता है। वहां सीढियों के अंदर प्रवेश निषेध है।और चमड़े की कोई भी वस्तु ले जाना वर्जित है।

अन्य।
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कॉवंट, नीमकाथाना, अलवर, भरतपुर, झुंझुनू, सीकर आसपास सभी लोगों से खुशबू जी ने बात की और सब के विचार जाने सभी लोगों ने बहुत लाभ होना बताया।

अपने विचार।
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विश्वास श्रद्धा एक बूंटी है,
जिसमें ताकत अपार।
ना हो तो कुछ भी नहीं,
हो जाए तो बेड़ा पार।

विद्याधर तेतरवाल,
मोतीसर।

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