मिट्टी से बने मजबूत अनूपगढ़ के किले की विरासत और इतिहास की कहानी, जर्जर हालत की दास्तान

राजस्थान राज्य के श्रीगंगानगर जिले में स्थित एक नगर जिसका नाम है अनूपगढ़ है। पाकिस्तान की सीमा के करीब और बीकानेर जिले के पश्चिमोत्तर क्षेत्र में घग्घर नदी के किनारे बसा ये प्राचीन नगर अनूपगढ़ जहाँ पर यह पुरातन किला बना हुआ है। यह किला नगर के बीचों-बीच बना हुआ है जिसके चारों तरफ शहरी आबादी निवास करती है। यह किला 12, 13, 14 और 18 वार्ड नंबर के बीच में बना हुआ है।

प्राचीन समय में चुघेर, अनूपगढ़ से लेकर जैसलमेर तक तथा पाकिस्तान सीमा के कुछ क्षेत्रों और उसके आस-पास के क्षेत्रों पर भाटियों का कब्जा था। यह भाटी जाति यदुवंशी क्षत्रियों की एक वंशावली थी। यह किला भाटी राजपूतों को खाड़ी में रहने मे मदद करता था।किले का निर्माण 1689 में मुगल गवर्नर द्वारा अनूपगढ़ नगर को मुगलों के संरक्षण में रखने के लिये किया गया था। सन् 1677-78 में मुगल शासक औरंगजेब द्वारा महाराजा अनूप सिंह को औरंगाबाद के शासक के रुप में नियुक्त किया गया। उन दिनों महाराजा अनूप सिंह आदूणी में थे।

उन्होने मुकंदराय को बुलाकर उनसे सलाह परामर्श करके चुघेर में गढ़ बनवाकर वहाँ पर थाना स्थापित करने का निश्चय किया। सन् 1678 ईस्वी में चुघेर में महाराजा अनूप सिंह ने नये गढ़ का निर्माण शुरु करवाया गया जिसका नाम अनूपगढ़ रखा गया। कभी यह किला अपने सुनहरे दिनों में बेहद भव्य संरचना हुआ करती थी लेकिन यह किले का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि वर्तमान समय में इस किले की अवस्था एकदम जर्जर हो चुकी है और यह किला विशाल खण्डहर में बदल गया है। किले में जगह-जगह पर कंटीली झाडियां उग आई है।

किले का अधिकतर हिस्सा नष्ट हो चुका है और शेष बची हुई दीवारों की हालत भी ऐसी बन गयी है कि यह कभी भी गिर सकती है। गढ़ की दीवारें लगभग 60-80 फीट ऊँची है। इस किले को बनाने के लिए पतली-पतली ईंटों का इस्तेमाल किया गया और पूरे गढ़ में दीवारों की चिनाई के लिए मिट्टी के गारे का इस्तेमाल हुआ है। दरवाजे और खिड़कियों को बनाने के लिए मोटे लौह का और मजबूत लकड़ियों को काम में लिया गया था किन्तु रखरखाव और देखभाल की कमी के कारण यह किला नष्ट होने के कगार पर पहुँच चुका है।

 

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वर्तमान समय में आबकारी विभाग 1993 से इसी किले में स्थित है। इससे पहले यहाँ पर राजस्व विभाग की तहसील हुआ करती थी। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने भी इस किले को असुरक्षित घोषित कर दिया है। शहर के हृदय स्थल में बीचों-बीच स्थित होने और आस-पास शहरी जन आबादी के निवास करने की वजह से लोगों के जान माल का नुकसान होने का भय हमेशा बना रहता है। वर्तमान में इस प्राचीन किले और अमूल्य धरोहर को बचाने के लिए हिफाज़त और मरम्मत की आवश्यकता है जिससे कि विरासत की पहचान बनी रहे।

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