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राजस्थान

सीकर के इस गांव में हर शाम रोशन होती है पीर की मजार, हिंदू पुजारी करते हैं देखरेख

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राजस्थान के सीकर से 22 किलोमीटर दूर एक गांव थोरासी है जो अपनी सांप्रदायिक सौहार्द की पहचान के लिए जाना जाता है। गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं होने के बावजूद भी यहां पीर बाबा की मजार हर दिन रोशन होती है जिसका आयोजन गांव के ही एक हिंदू पुजारी करते हैं।

मजार की देखरेख हिंदू करते हैं और चढ़ावे के रूप में इकट्ठा धन गांव के विकास में लगाय़ा जाता है। खर्चे के लिए ऑडिट की जाती है जिसके लिए एक समिति भी बना रखी है।

गांव के रहने वाले राजकुमार का कहना है कि हमारे पूर्वजों के मुताबिक करीब 500 साल पहले यह गांव बसा था और उस समय से यहां पर मजार है। गांव के लोगों ने इस मजार की देखरेख करना शुरू किया और करीब 25 साल पहले इसका जीर्णोद्धार करवाया। आज पीर बाबा की मजार पर हर साल उर्स लगता है और यहां अब तक 27 उर्स लग चुके हैं।

मजार पर हर धर्म के लोग मांगते हैं मन्नत

मजार पर उर्स के दौरान फुटबॉल प्रतियोगिता का भी आयोजन होता है। गांव में पीर बाबा सेवा समिति के अध्यक्ष कप्तान रामलाल बताते हैं कि समिति ने टेनिस, फुटबॉल और बॉस्केटबॉल के कोर्ट तैयार किए हैं।

पीर बाबा की मजार के अंदर आज भी सैकड़ों ट्रॉफियां इस खेल भावना की प्रतीक है। हर साल भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की द्वादशी से चतुर्दशी तक 3 दिनों तक उर्स का मेला लगता है। वहीं खेल आयोजन तथा गांव के विकास हेतु काफी राशि ग्रामीणों ने चंदे से जुटाई है। थोरासी के पीर बाबा की मजार पर तमाम धर्मों के लोग सिर झुकाते हैं।

गांव में पेड़ पौधे काटने पर पाबंदी

पीर बाबा की मजार के आसपास अच्छी हरियाली है। इसकी वजह यह है कि गांव में हरे पेड़-पौधे काटने पर पाबंदी है। समिति सचिव ताराचंद जांगिड़ के अनुसार मजार के पास बोरिंग कर स्टेडियम के चारों तरफ ड्रिप प्रणाली के तहत पौधे लगा रखे हैं। पुराने पेड़ को गांव का कोई भी व्यक्ति नहीं काटता है।

पुरानी मान्यता के अनुसार पीर बाबा ने रात को लोगों को पेड़ पौधे काटने हेतु मना किया तथा जबरदस्ती करने पर उनको सबक भी सिखाया। एक अन्य मान्यता के अनुसार गांव में चोर डाकू लुटेरे आते थे तो पीर बाबा पहले से ही गांव वालों को आगाह कर देते थे।

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