400 बच्चों को तस्करों से बचाने वाले उदयपुर के दुर्गाराम होंगे राष्ट्रपति अवॉर्ड से सम्मानित

Udaipur: शिक्षा के क्षेत्र में दिए जाने वाले राष्ट्रपति अवॉर्ड में उदयपुर के रहने वाले शिक्षक दुर्गाराम को भी चुना गया है। दुर्गाराम उदयपुर के झाडोल उपखंड के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत हैं। यह क्षेत्र आदिवासी बहुल इलाके में आता है। खास बात यह है कि इस क्षेत्र में दुर्गाराम रॉबिनहुड (Robin Hood teacher Durgaram) के नाम से जाने जाते हैं, और ऐसा इसलिए क्योंकि दुर्गाराम ने यहां रहने वाले लगभग 400 बच्चों को गुलामी के चंगुल से छुटा शिक्षा के मार्ग पर प्रशस्त किया है।

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जी हां, दुर्गाराम ने बाल तस्करी एवं बाल श्रम के खिलाफ लड़ाई लड़ 400 बच्चों को बचाया है, यह काम बेहद मुश्किल था- इस अभियान के दौरान दुर्गाराम को बारंबार मौ’त की धमकियां मिला करती थीं, मगर वह घबराए नहीं और अपनी जान की बाजी लगा बच्चों को शोषण और अत्याचार के गर्त में जाने से बचाया। मौजूदा वक्त में दुर्गाराम उजयपुर के झाडोल उपखंड के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पारगियापाडा़ में एक शिक्षक के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं।

दुर्गाराम ने बच्चों को मुक्त कर उन्हें शिक्षा के पथ पर अग्रसर भी किया है, वह एक शिक्षक तो हैं ही साथ ही एक सामाजिक एक्टिविस्ट भी हैं। कोरोना काल में उन्होंने आसपास के लोगों में वैक्सीन से जुड़ी भ्रांतियां दूर की थी तथा कोरोना के बारे में बताते हुए उन्हें नियमों का पालन करने के लिए जागरूक भी किया था। अपनी टीम के साथ मिलकर दुर्गाराम ने घटनाओं से जूझते हुए महज 15 दिन के भीतर मादड़ी पंचायत को भारत की सबसे पहली सबसे ज्यादा टीकाकरण वाली आदिवासी पंचायत बनाया था।

दुर्गाराम न इस सफर की शुरुआत साल 2008 में की थी, उनकी पहली पोस्टिंग पलासिया इलाके के स्कूल में हुई थी। इसके बाद जब उन्होंने ग्रामीण आदिवासी के हालात देखें तो उन्होंने ग्रामीणों से बात करते हुए वहां के हालात को समझा। जब उन्होंने बच्चों को गैर-हाजिर पाया तो मालूम हुआ कि स्कूलों से बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई छोड़ कर बाल तस्करी और बालश्रम के गर्त में समा रहे हैं. दुर्गाराम ने इन परिस्थितियों को चुनौती के तौर पर स्वीकारा और अपने स्तर पर आदिवासी बाहुल्य गांव की तस्वीर बदलने का निर्णय लिया। उन्होंने अपना मुखबिर तंत्र विकसित किया और बाल तस्करों तथा बाल श्रम के गिरोहों के खिलाफ जाकर क्षेत्र के लगभग 400 बच्चों को तस्करों से बचाया।

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दुर्गाराम बताते हैं कि यह इतना आसान नहीं था, उन्होंने बच्चों को गुजरात, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जाकर बचाया। इस बीच उनपर जानलेवा हमले भी हुए, मगर वह ठहरे नहीं और नेकी की राह पर चलते हुए, उन्होंने जीत हासिल की। वह कहते हैं शुरुआत में उन्हें लोगों का समर्थन नहीं मिलता था, मगर बाद में लोग उनके संघर्ष को पहचानने लगे और उनके साथ आगे आ गए। वह बताते हैं कि यह इलाका गुजरात से सटा हुआ है, इसलिए तस्कर बच्चों को डरा धमकाकर गुजरात ले जाते हैं और उनसे मजदूरी करवाते हैं। दुर्गाराम कहते हैं कि उन्हें इस बात का दुख है कि अभिभावक भी बच्चों को नरक में भेजने के लिए पैसा लेते हैं, ये जानते हुए भी कि बच्चों के साथ वहां मारपीट और शोषण के अलावा कुछ नहीं होगा।

दुर्गाराम (Robin Hood teacher Durgaram) इस नेक और साहसिक काम के लिए राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस पर आईजी और एसपी से संभाग स्तर पर सम्मानित भी हो चुके हैं। उन्होंंने लगभग 200 से ज्यादा बालिकाओं को शोषण से बचाया है तथा उन्हें शिक्षा की ओर प्रशस्त किया है। दुर्गाराम के इस काम को लेकर झलको मीडिया (Jhalko Media) परिवार उन्हें नमन करता है। हम राजस्थानवासियों को उन पर गर्व है।

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