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साहित्य

ओम नागर री छह नान्ही कवितावां

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ओम नागर री छह नान्ही कवितावां

(1)

कोई
कुण नै याद करै
न्हं करै

ओळमो देता बी तो
कुण नै ?

यां दिनां
एकस्यार छा
संदा का दुख।

( 2 )

जीजी
पूछ रही छी
एक दिन
तड़तड़कै ई

रोटी खायी
कै न्हं खायी ?

फेर बोली
आ जातौ तो
चोखो रहतौ

कांई
जवाब देतो
घणी बगत तांई
देखतौ रह्यौ

जीजी की
गळगचा आंख।

( 3 )

पारुल की मम्मी
रातै फोन पै बता रही छी

डेढ़ बरस सूं बेसी
छोटी बेटी की
तोतली बोली में
बंतळ का किस्सा

ममी…
पप्पा…
वै ल्यां…
वो ग्या…आग्या…।

( 4 )

यां दिनां
छोटा भाई सूं

बात करती बगत
हमेस कहतो रह्यौ

घर नै
मत कह ज्ये
कै म्हूं
जाबा लागग्यौ दफ़तर

पूछै तो
घणी बड़ी छै बम्बई
गांव सूं जैपर ताडै

वूं रहै जठै
साता छै हाल।

( 5 )

अकसमचै
कद कांई हो जावै
कुणी पतौ

घोडबंदर हाइवे पै
घड़ी-घड़ी

एम्बुलेंस का
सायरन बाजता बस !

यां दिनां
कै तो पखेरू बोल रह्या छा
यां फेर एम्बुलेंस का सायरन।

( 6 )

ओळयूँ तो
थांरी बी घणी आई
यां दिनां

कतना दिन सूं
भगवान सूं एक ई चीज
मांग रही छै तू

बावळी
भगवान रूसग्या तो !

तो बोली
भगवान कुण नै देख्या

बस
थांरै-म्हारै हरदै
बस्यो भरोसो ई
भगवान छै।

परिचय :

ओम नागर राजस्थानी-हिंदी री नूंई पीढ़ी रा लूंठा अर चावा कवि है।वांरी हिन्दी राजस्थानी दोनां में कविता री पोथी आयगी।एक डायरी ई।ए कवितावां आवण वाळी डायरी सूं ली गई है।वे मुंबई में रेवे।

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