एस.सरस्वती एक ऐसा नाम जिसने धर्म- कर्म पर विश्वास कर बचाई हजारों जान, खूब मिले पुरस्कार

दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपने जीवन को दूसरों की सेवा में ही समर्पित कर देते हैं। इसी क्रम में आज हम आपको ऐसी ही एक महिला की कहानी बताएंगे. जिन्होंने अपना जीवन सेवा भाव हेतु समर्पित कर दिया है। आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के चित्तूर (Chittoor) जिले में जन्मी एस.सरस्वती (S. Saraswathi Story) की कहानी। एस.सरवस्ती ने 35 साल से ज्यादा वक्त तक सेना में काम किया है। उन्होंने ऑपरेशन थिएटर में नर्स के तौर पर 3000 से ज्यादा आपातकालीन और जीवन बचाने वाली सर्जरी में हिस्सा लिया है। साथ ही उन्होंने हजारों से ज्यादा नर्सेज को प्रशिक्षण भी दिया है किया है।

आर्मी अस्पतालों में दे चुकी हैं अपनी सेवा

सरस्वती ने कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय लेवल पर एमएनएस (MNS)का प्रतिनिधित्व किया है। सरस्वती बेसिक लाइफ सपोर्ट में 100 से ज्यादा सैनिक और उनके परिवारों को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने आर्मी के कई अस्पतालों में काम किया है। वह कई आधिकारिक और प्रशासनिक पदों पर रहकर भी सेवा कर चुकी हैं। वह एमएनएस में बतौर उप-महानिदेशक भी रही हैं।एस.सरस्वती दिनांक 28 दिसंबर 1983 को मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में भर्ती हुई थीं।

कई पदों से हुई सम्मानित

S. Saraswathi Story

सरस्वती को उनके इस सेवा भाव और इतने बेहतरीन कार्य के लिए साल 2005 में ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ कमेंडेशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वहीं साल 2007 में उन्हें संयुक्त राष्ट्रीय पदक और साल 2015 में चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ कमेंडेशन से भी सम्मानित किया गया, इसके अलावा बीते 15 सितंबर, 2021 को देश के पूर्व महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Former President Ramnath Kovind) ने उन्हें राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार से भी नवाजा था।

नर्सिंग के क्षेत्र में बेहतर कार्य के लिए मिलता है सम्मान

फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार नर्सिंग क्षेत्र में बढ़िया प्रदर्शन करने वाले प्रोफेशनल्स को दिया जाता है। यह पुरस्कार फ्लोरेंस नाइटिंगेल के नाम पर पड़ा था। फ्लोरेंस नाइटिंगेल (florence nightingale) को एक व्यवस्थित प्रोफेशनल बनाने का क्रेडिट दिया जाता है, और उन्हीं के नाम पर हर साल इस पुरस्कार से नर्सिंग के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाले लोगों को पुरस्कार दिया जाता है। इसके अलावा उनके जन्मदिवस पर नर्सेज डे (Nursing Day) के तौर पर भी मनाया जाता है।

फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने सेवा में किया था महान कार्य

फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म 1820 में ब्रिटिश परिवार में हुआ था। उनके माता पिता चाहते थे कि वह अच्छे घर में शादी करके जाएं। लेकिन फ्लोरेंस हमेशा से नर्स बनना चाहती थी। वह लोगों की सेवा में विश्वास रखती थी और जब परिवार वालों ने शादी करने के लिए कहा तब उन्होंने शादी करने से मना कर दिया। वह नर्सिंग की ट्रेनिंग के लिए चली गई इसके बाद उन्होंने खुद नर्सिंग का काम सीखा और बाकी लोगों को भी सिखाया।

युद्ध में घायलों की मदद

1853 से 1856 तक कृमियन वॉर चला था। जिसमें एक तरफ रूस (Russia)और दूसरी तरफ यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, ओटोमन अंपायर थे। इस युद्ध में ब्रिटेन के कई सैनिक घायल हो गए थे। इसके बाद फ्लोरेंस ने अपने द्वारा ट्रेंड की गई 38 नर्सों के साथ मिलकर उनकी सेवा की थी। उसी दौरान उन्होंने देखा कि घायल होने के पीछे गंदगी भी एक बड़ी वजह हैं। जिसके बाद उन्होंने ब्रिटिश सरकार के साथ मिलकर एक अस्पताल बनवाया जिसमें साफ सफाई का ध्यान रखा और इसका असर यह हुआ कि मरने वालों की संख्या में कमी आ गई। साल 1860 में फ्लोरेंस नाइटिंगेल ट्रेनिंग स्कूल भी उन्होंने खोला जिसमें उन्होंने नर्सेज को ट्रेंड किया।

वही एस.सरस्वती (S. Saraswathi Story) की बात करें तो उन्होंने रोगी शिक्षण सामग्री और कार्डियक सर्जरी के लिए इंप्रोवाइज्ड ड्रेस किड्स और सीने के घाव लिए धागेतैयार किए थे। उनकी सेवा भाव और मेहनत के लिए राष्ट्रपति ने उन्हें नर्सिंग के क्षेत्र सर्वोच्च के सम्मान से सम्मानित किया है। S. Saraswathi Story

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