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तमिलनाडु

IPS अन्नामलाई जिन्हें देखकर माफिया भागते थे उल्टे पांव, कर्नाटक में ‘सिंघम’ नाम से हैं मशहूर

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कर्नाटक के ‘सिंघम’ नाम से मशहूर आईपीएस अन्नामलाई कुप्पूसामी ने बीते साल भाजपा की सदस्यता ग्रहण की जिसके बाद वो साल भर चर्चा में रहे। अब हाल में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें पार्टी की तमिलनाडु इकाई का अध्यक्ष बनाया गया है।

मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले अन्नामलाई ने 2011 में पुलिस सेवा ज्वायन की थी जिसके बाद अपने कार्यशैली के चलते वह कर्नाटक के सिंघम कहलाने लगे। आइए जानते हैं सिंघम आईपीएस के बारे में। अन्नामलाई कुप्पुस्वामी की पहली पोस्टिंग कर्नाटक के कारकला जिले में की गई जहां उन्होंने ड्रग्स, तंबाकू और अवैध शराब के खिलाफ कैंपेन चलाकर माफियाओं के होश उड़ा दिए।

आईआईएम-लखनऊ से एमबीए और इंजीनियरिंग ग्रेजुएट अन्नामलाई कॉलेज के दिनों में बिजनेसमैन बनने का सोचा करते थे आगे चलकर वह लोगों की सेवा करने के लिए उन्होंने सिविल सेवा में आने का फैसला किया।

कर्नाटक में असल जिंदगी के सिंघम

पूर्व आईपीएस अन्नामलाई कुप्पूसामी अपने काम को लेकर हर किसी की नजरों में रहे हैं। उनके काम करने के स्टाइल के चलते कुछ ही दिनों में वह सिंघम अन्ना के नाम से मशहूर होने लगे।

आपको बता दें कि अन्नामलाई को ईमानदार, बहादुर और एक साफ छवि वाले अधिकारी के तौर पर जाना जाता है।

सिंघम की लोगों के बीच लोकप्रियता का अंदाजा आप इस बात से ही लगा सकते हैं कि जब वह बतौर उडूपी और चिकमंगलुरु में एसपी तैनात थे तो वहां से उनका तबादला होने पर लोगों ने इसका विरोध किया था।

आतंकवाद से लड़ने के लिए इस्लाम को समझा

अन्नामलाई अपना 8 साल की सेवा में हमेशा अपनी पुलिसिंग स्टाइल के लिए लोगों के बीच छाए रहे। वहीं एक अन्य घटना के मुताबिक इस्लामी कट्टरपंथ और इंडियन मुजाहिदीन संगठन जैसे आतंकवादी संगठनों की जड़े उडुप्पी में जमी थीं।अपने कार्यकाल के दौरान अन्नामलाई को इस्लाम में गहरी रूचि पैदा हुई जिसके बाद इस्लाम को समझने के लिए इसकी पढ़ाई शुरू की।

वह आतंकी संगठनों के दिमागी स्थिति समझने के लिए भटकल-कुंडापुरा क्षेत्र के चारों में एक नेटवर्क भी फैला रखा है।

2019 में छोड़ दी आईपीएस की नौकरी

साल 2019 में जब वह उस समय पुलिस उपायुक्त, बेंगलुरु दक्षिण के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे इस दौरान उन्होंने पद त्यागने का फैसला आखिरकार कर ही लिया। इसके अलावा कहा जाता है कि 2017 में हुए सांप्रदायिक दंगे को शांत कराने में अन्नामलाई कुप्पुस्वामी की भूमिका भी रही।

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