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तेलंगाना

खुद भूखे रहकर भरते हैं सैकड़ों का पेट, हैदराबाद के अजहर मानते हैं रोटी को ईश्वर और भूख को मजहब

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“काम करो ऐसा की पहचान बन जाए,

हर कदम ऐसा चलो की निशां बन जाए,

यहां जिंदगी तो सभी काट ही लेते हैं,

जिंदगी जियो ऐसी की मिसाल बन जाए.”

भगवान उठाता भूखे पेट है लेकिन सुलाता किसी को भूखे पेट नहीं ! यह कहावत आपने बचपन में अपने बुजुर्गों से काफी बार सुनी होगी, लेकिन क्या भगवान खुद आते हैं भूख-प्यास मिटाने ये आपने कभी नहीं देखा होगा…पर कुछ लोग ऐसे होते हैं जो भगवान के इस काम को हमारे बीच रहकर अंजाम देते हैं।

हम बात कर रहे हैं एक ऐसे शख्स की जिनका यह मानना है कि भूख से बड़ा ‘मजहब’ और रोटी से बड़ा कोई ‘ईश्वर’ हो तो, बता देना। इसी को चरितार्थ कर रहे हैं सैयद उस्मान अज़हर मक़सूसी जो लोगों के पेट की आग को अपना मजहब मानते हैं। मक़सूसी रोजाना सैकड़ों भूखे लोगों को खाना खिलाते हैं।

हैदराबाद के दबीरपुरा फ्लाईओरवर के पास एक छोटी सी दुकान चलाने वाले मकसूसी हर दिन बेघरों को दोपहर में खाना खिलाते हैं, इनकी दुकान के आगे खाने के लिए खड़ा शख्स एक दिन भी भूखा नहीं लौटा।

बचपन में पढ़ाई छोड़ करने लगे मजदूरी

अजहर के पिता ऑटो चलाया करते थे लेकिन मकसूसी की 4 साल की उम्र में ही वो चल बसे। पिता का साया उठने के बाद चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर के अजहर पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने लगे।

अजहर बताते हैं कि बचपन में उन्होंने ऐसे कई दिन गुजारे हैं जब वह दिन में एक बार खाना खाते थे।

जब आंखों से देखी भूख की पीड़ा

अजहर लोगों को खाना खिलाने के शुरूआत करने के पीछे जुड़े किस्से को याद करते हुए बताते हैं कि, एक बार सड़क पर एक भूख से झटपटाता लड़की को देखकर मैं खुद को रोक नहीं पाया और उसे खाना खिलाया, बस उस दिन के बाद से मैं लगातार लोगों को खाना खिला रहा हूं। अजहर खुद फ्लाईओवर के नीचे खाना पकाते हैं और वहीं करीब 150 लोगों को खिलाते हैं।

गरीबों को खाना खिलाने के लिए खोली संस्था

अजहर ने बीते 3 साल पहले सिकंदराबाद में अस्पताल के पास भूखों को खाना खिलाना शुरू किया जिसके बाद उन्होंने ‘सनी वेल्फेयर फाउंडेशन’ नाम की एक संस्था खोली जिसमें अब एक छोटी टीम के साथ वह काम करते हैं। आपको बता दें कि अजहर अभिनेता अमिताभ बच्चन के कार्यक्रम ‘आज की रात है जिंदगी’ में भी जा चुके हैं।

अजहर संसाधनों की बात पर कहते हैं कि वह संस्था के लिए मदद करने वाले लोगों से पैसा ना लेकर राशन लेते हैं। अजहर अपने इस काम के पीछे अपनी मां को प्रेरणास्त्रोत मानते हैं।

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