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तेलंगाना

गलवान हीरो कर्नल संतोष बाबू की शहादत की गाथा,खूब ल’ड़ा मर्दाना वह तो बिहार रेजीमेंट का शेर था

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आज हम आपको एक ऐसी शूरवीर और जाबाज सैनिक की कहानी बताएंगे जिसने भारत की रक्षा करते हुए अपने प्राणों को देश के नाम न्योछावर कर दिया। हम बात कर रहे हैं 16 बिहार रेजीमेंट के कर्नल संतोष बाबू की। संतोष बाबू का जन्म 13 फरवरी 1983 को सूर्यपेट तेलंगाना में हुआ था। पहले यह गांव आंध्र प्रदेश में हुआ करता था। लेकिन तेलंगाना बनने के बाद यह तेलंगाना राज्य में आता है। बात करें संतोष बाबू की तो संतोष बाबू अपने पिता बिक्कू माला उपेंद्र के इकलौते बेट थे।

संतोष के पिता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर पद से रिटायर है। संतोष बाबू की बात करें तो उन्होंने गांव के श्री सरस्वती शिशहु मंदिर स्कूल से पहली से पांचवी कक्षा तक की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने कोरूकोंडा विजयानगरम जिले के सैनिक स्कूल में आगे की पढ़ाई की थी। साल 2000 में 27 नवंबर को संतोष एनडीए में भर्ती हो गए थे। साल 2014 में उन्होंने भारतीय सेना को ज्वाइन कर लिया था।

बेहतरीन रहा सेना का करियर एक के बाद एक प्रोमोशन

संतोष बाबू की बात करें तो साल 2004 में भारतीय सेना में भर्ती हो चुके थे। संतोष बाबू लेफ्टिनेंट पद पर भारतीय सेना में शामिल किए गए थे। उन्होंने 10 दिसंबर 2004 को 16 बिहार रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट पद पर सेना को जॉइन किया था। इसके बाद संतोष बाबू की पोस्टिंग जम्मू कश्मीर पर इलाके में हो गई थी। साल 2006 में 10 दिसंबर को उन्हें कैप्टन के तौर पर प्रमोशन दिया गया। वहीं साल 2010 में 10 दिसंबर को ही वह मेजर बने थे। इसके बाद 10 दिसंबर साल 2017 को संतोष बाबू लेफ्टिनेंट कर्नल पद पर कार्यरत हो गए थे। फरवरी 2020 में संतोष बाबू को कर्नल पद पर भारतीय सेना में प्रमोट किया गया था।

चीनी झड़प में श’हीद हुए सन्तोष बाबू

आप बताएं तो पिछले साल जून के महीने में भारत और चीनी सैनिकों की झड़प हो गई थी। 15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ भारत के सैनिकों की झड़प हो गई थी। चीनी सैनिक तय सीमा से पीछे नहीं हट रहे थे, जिसके बाद कर्नल संतोष बाबू खुद चीनी सैनिकों को समझाने के लिए गए थे। लेकिन कायर चीनी सैनिकों ने चोरी से संतोष बाबू पर ह’मला कर दिया था।

जिसके बाद भारतीय सैनिक और चीनी सैनिकों की झड़प हो गई थी। दोनों तरफ से प’त्थर ला’ठी और डं’डे चलाए गए थे। चीनी सैनिकों के साथ हाथापाई के दौरान भारतीय सैनिकों ने जमकर जवाब दिया था। इस झड़प में भारत के 20 सैनिक श’हीद हो गए थे। साथ ही चीनी सैनिक भी 4 दर्जन से ज्यादा मा’ रे गए थे, हालांकि चीन ने इस बात को स्वीकार नहीं किया था। चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में संतोष बाबू भी शहीद हो गए थे। कर्नल संतोष बाबू ने घायल होने के बाद भी चीनी सैनिकों को जमकर जवाब दिया था। वह अंतिम सांस तक भारत की रक्षा के लिए लड़ते रहे थे। साल 1967 के बाद संतोष बाबू पहले भारतीय थे जो चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी के खिलाफ कार्रवाई करते श’हीद हो गए थे।

बहादुरी को मिला महावीर चक्र

कर्नल संतोष बाबू को उनकी बहादुरी के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें भारतीय सेना के सर्वोच्च सम्मान में से एक महावीर चक्र से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें स्पेशल सर्विस मेडल, सैन्य सेवा मेडल, हाई एल्टीट्यूड सर्विस मेडल, विदेश सेवा मेडल लगातार 9 सालों तक सेवा करने का मेडल और यूएन मिशन में कांगो मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है।

गांव में बनी मूर्ति

संतोष बाबू जब श’हीद हुए थे तो उनके परिवार में उनकी पत्नी के अलावा 4 साल का बेटा और 8 साल की बेटी थी। इसके अलावा बच्चो और पत्नी के साथ संतोष बाबू के माता-पिता भी परिवार में मौजूद है। संतोष बाबू की पहली पुण्यतिथि पर उनके गांव में नगर प्रशासन और शहरी विकास मंत्री राम राव और ऊर्जा मंत्री जी जगदीश रेड्डी ने उनके गांव सूर्यपेट में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। आपको बताएं उस समय उनके परिवार के सभी सदस्य मौजूद रहे थे।

कर्नल संतोष बाबू आज देश के लिए एक प्रेरणा हैं। उन्होंने साबित किया कि भारतीय सैनिक भारत की रक्षा के लिए अपने प्राणों की भी चिंता नहीं करता है। देश की रक्षा करते हुए चीनी सैनिकों के साथ झड़प में संतोष बाबू शहीद हो गए थे। उनकी पहली पुण्यतिथि पर हम उन्हें याद करते हैं। संतोष बाबू को नमन भी करते हुए यह कहना चाहते है कि उन पर पूरे देश को आज गर्व है। साथ ही संतोष बाबू जैसे तमाम सैनिक जो देश के लिए शहीद हो जाते हैं उन्हें झलको इंडिया की पूरी टीम सलाम करती है।

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