कॉलेज के दिनों में पुलिसवाले ने मांगी रिश्वत, सिस्टम बदलने की जिद में तय किया IPS से IAS तक का सफर

जब कोई बात आपके मन में चोट कर जाए तो आप उस व्यवस्था को बदलने के लिए जमीन आसमान भी एक करने की सोच लेते हैं। आपकी मेहनत को पंख लग जाते हैं, कुछ ऐसी ही कहानी उत्तरप्रदेश की महिला अफसर गरिमा सिंह की है जिन्होंने खुद की आपबीती के बाद इस तंत्र में शामिल होकर उसे बदलने की ठान।

गरिमा सिंह ने अपने पहले ही प्रयास में आईपीएस बन गई और इसके बाद एसपी रहते वह 2016 में सिविल सर्विसेज परीक्षा में 55वी रैंक हासिल कर आईएएस बनी। आइए जानते हैं गरिमा सिंह का कैसा सफर रहा।

पहले प्रयास में बन गई थी IPS अफसर

गरिमा सिंह का जन्म 14 फरवरी, 1987 को उत्तर प्रदेश के बलिया मे हुआ लेकिन फिलहाल उनका परिवार दिल्ली बस गया है। गरिमा बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थी और एमबीबीएस करना चाहती थी लेकिन उनके पिता चाहते थे कि बेटी सिविल सेवा में जाए।

बता दें कि गरिमा के पिता एक इंजीनियर थे। स्कूल के बाद गरिमा ने हिस्ट्री से बीए और एमए किया और 2012 में सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी। गरिमा को पहले ही प्रयास में सफलता हासिल हुई। आईपीएस बनने के बाद वह लखनऊ में वो 2 साल तक प्रशिक्षु एएसपी रही और झांसी में एसपी सिटी का पद भी संभाला।

जब पुलिस वाले ने मांगी थी 100 रूपए रिश्वत…

गरिमा सिंह अपने कॉलेज के दिनों का एक किस्सा बताते हुए कहती है कि एक बार देर रात मॉल से लौटते समय रास्ते में चेकिंग पर एक पुलिसवाले ने उनका रिक्शा रोककर कुछ सवाल पूछने के बाद 100 रुपए की घूस मांगी।

वह बताती है कि जब उन्होंने देने से मना कर दिया तो वह परिवार को फोन कर शिकायत करने की कहने लगे। हालांकि थोड़ी देर बाद पुलिस वाले ने उन्हें जाने दिया लेकिन ये वाकया गरिमा के दिल में घर कर गया और उन्होंने इसे बदलने की ठान ली।

गरिमा ने एसपी रहते हुए 2016 में सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी और 55वीं  रैंक हासिल की। गरिमा ने आईपीएस बनने के 2 साल बाद शादी की, उनके पति इंजीनियर हैं और नोएडा में काम करते हैं।

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